द्रविड़ ने ठोंका शतक, गंभीर और लक्ष्मण ने खेलीं अद्र्धशतकीय पारियां

कोलकाता, 14 नवंबर. भले ही सचिन तेंदुलकर के महाशतक का इंतजार बढ़ गया हो लेकिन दीवार के नाम से मशहूर राहुल द्रविड़ के करियर के 36वें नायाब शतक और वीवीएस लक्ष्मण (नाबाद 73) के साथ शतकीय साझेदारी की बदौलत भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन ठोस शुरुआत करते हुए विशाल स्कोर की ओर कदम बढ़ा दिए हैं.

सधी हुई बल्लेबाजी करने वाले तेंदुलकर मात्र 38 रन बनाकर पवेलियन लौट गए लेकिन द्रविड़ ने एक छोर संभाले रखा और 119 रन बनाए. श्रीमान भरोसेमंद के पिछले आठ मैच में पांचवें शतक तथा वीवीएस लक्ष्मण (नाबाद 73 रन, 116 गेंदच 5 चौके) और गौतम गंभीर (65 रन, 103 गेंद, 8 चौके) के अर्धशतकों की मदद से भारत ने पहले दिन का खेल समाप्त होने तक पांच विकेट पर 346 रन बनाए. द्रविड़ ने अपनी शतकीय पारी में 207 गेंद खेली तथा नौ चौके और दो छक्के लगाए. दिल्ली में पहला टेस्ट मैच जीतकर तीन मैच की सीरीज में 1-0 से आगे चल रहे भारत ने दिन के अंतिम क्षणों में चार गेंद के अंदर दो विकेट गंवाए. इनमें द्रविड़ का विकेट भी शामिल है जो क्रेग ब्रेथवेट के करियर का पहला शिकार भी बने.

इससे पूर्व टास जीतने के बाद भारतीय पारी की शुरुआत करते हुए गंभीर और वीरेंद्र सहवाग ने सुबह पहले विकेट के लिए 66 रन की साझेदारी की. पारी के शुरू में ही सहवाग के हेलमेट पर गेंद लगी लेकिन इससे उन पर कोई असर नहीं पड़ा और उन्होंने 33 गेंद पर आठ चौकों की मदद से 38 रन की तूफानी पारी खेली. ईडेन के 67,000 क्षमता वाले स्टेडियम में सुबह लगभग 1000 दर्शकों के सामने सहवाग ने अपना नैसर्गिक खेल दिखाया. रवि रामपाल के अस्वस्थ होने के कारण कैरेबियाई कप्तान डेरेन सैमी ने नई गेंद थामी लेकिन सहवाग ने उन्हें विशेष रूप से निशाने पर रखा लेकिन आखिर में वह इसी गेंदबाज की सामान्य गेंद पर अपना विकेट दे गए. वहीं गंभीर ने प्रवाहमय बल्लेबाजी करके टेस्ट क्रिकेट में 17वां अर्धशतक पूरा किया लेकिन उन्होंने फिडेल एडव?र्ड्स की गेंद पर ढीला शाट खेलकर शार्ट कवर पर खड़े एड्रियन बराथ को आसान कैच थमाया. उन्होंने 103 गेंद का सामना करके 65 रन बनाए जिसमें आठ चौके शामिल हैं.

दूसरी ओर द्रविड़ एक छोर पर खड़े रहे और सचिन तेंदुलकर के साथ पारी को आगे बढ़ाना शुरू किया. तेंदुलकर क्रीज पर उतरने के बाद से ही पूरे प्रवाह से रन बनाने लगे. उन्हें कमजोर आक्रमण का सामना करने में किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई. वह जब पूरी लय में दिख रहे थे तो शतकों के शतक की उम्मीदें भी बढ़ गई और स्टेडियम पर दर्शकों की संख्या में भी तेजी से इजाफा होने लगा. लेकिन लेग स्पिनर देवेंद्र बिशू फिर से भारतीयों के लिए खलनायक बनकर उभरे. उन्होंने यह कीमती विकेट लेकर दर्शकों को खामोश कर दिया. बिशू की शार्ट गेंद को तेंदुलकर ने पुल करके मिडविकेट पर खड़े मर्लोन सैमुअल्स को आसान कैच थमाया. उन्होंने 71 गेंद खेलकर 38 रन बनाए जिसमें पांच चौके शामिल हैं. इस बीच उन्होंने द्रविड़ के साथ 56 रन की साझेदारी की. इस दिग्गज बल्लेबाज ने अपना आखिरी शतक आठ महीने पहले दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ विश्व कप मैच में लगाया था. तब से वह छह टेस्ट मैच की 11 पारियां और चार वनडे मैच खेल चुके हैं.

तेंदुलकर के आउट होने के बाद क्रीज पर द्रविड़ और लक्ष्मण की जोड़ी खड़ी थी. इस जोड़ी ने चौथे विकेट के लिए 140 रनों की शतकीय साझेदारी कर उस यादगार मैच में याद ताजा कर दी जिसमें इन दोनों ने बड़ी साझेदारी कर भारत को आस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबले में न सिर्फ हार के मुंह से बाहर निकाला बल्कि अपनी टीम को शानदार जीत दिलाकर टेस्ट क्रिकेट में इसे ऐतिहासिक जीत की श्रेणी में ला दिया. दोनों ने सभी गेंदबाजों की खूब क्लास ली और मनमाफिक अंदाज में बल्लेबाजी की. द्रविड़ ने केमोर रोच की नो बाल को स्क्वायर लेग पर चार रन के लिए भेजकर अपने करियर का 36वां, इस साल का पांचवां और गार्डस पर 179 गेंदों में चौथा शतक पूरा किया. उनकी इस पारी की खासियत यह रही कि उन्होंने इस बीच बिशू और सैमुअल्स की गेंदों पर छक्के भी जड़े. जब लग रहा था कि द्रविड़ और लक्ष्मण अपनी साझेदारी को लंबी खींचने में सफल रहेंगे तब कैरेबियाई टीम को द्रविड़ का अमूल्य विकेट मिल गया. डेरेन सैमी ने नई गेंद नहीं ली और अपने कामचलाऊ गेंदबाज ब्राथवेट को गेंद सौंप दी. लक्ष्मण ने उनका स्वागत चौके से किया लेकिन अगले ओवर की उनकी अंतिम गेंद अच्छा टर्न लेकर द्रविड़ के आफ स्टंप की गिल्लियां उड़ा गई. भारत ने इसके बाद ईशांत शर्मा को नाइटवाचमैन के रूप में भेजा लेकिन वेस्टइंडीज ने तुरंत ही नई गेंद ले ली. रोच के ओवर की तीसरी गेंद ही बाउंसर थी जिस पर ईशांत ने विकेट के पीछे कैच दे दिया. इसके बाद कम रोशनी के कारण दिन का खेल समाप्त कर दिया गया.

फिर महाशतक से चूके!

सचिन तेंदुलकर के करोड़ों चाहने वालों की शतकों का शतक देखने की बेसब्री अपनी हदों को पार करती दिख रही है. इसके लिए देश और दुनिया के तमाम क्रिकेट प्रेमी इस वर्ष मार्च से लगातार इंतजार में हैं. ऐसी उम्मीद लगाई जा रही थी कि सचिन ईडन गार्डेन में वेस्टइंडीज के साथ जारी दूसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में यह महाशतक पूरा कर लेंगे, लेकिन देवेंद्र बिशू ने उन्हें 38 रन पर आउट करके भारतीय दर्शकों को निराश कर दिया. सचिन ने अपना आखिरी अंतर्राष्ट्रीय शतक नागपुर के विदर्भ क्रिकेट संघ मैदान पर इस वर्ष मार्च में विश्व कप के दौरान दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लगाया था. इसके बाद वह इंग्लैंड के खिलाफ चार मैचों की टेस्ट शृंखला में नाकाम रहे थे. बिशू ने सचिन को लगातार दूसरी बार आउट किया है. इससे पहले बिशु ने दिल्ली टेस्ट की दूसरी पारी में सचिन को आउट किया था. उस पारी में सचिन ने 76 रन बनाकर भारत की जीत पक्की की थी, लेकिन वह अपने महाशतक से 24 रनों से चूक गए थे. कोटला टेस्ट की पहली पारी में सचिन सात रन बना सके थे. उस पारी में सचिन का विकेट फिडेल एडवडर्स को मिला था. कोलकाता में सचिन ने अपनी 71 गेंदों की पारी में पांच चौके लगाए और राहुल द्रविड़ के साथ तीसरे विकेट के लिए 56 रन जोड़े. भारत में सचिन को महाशतक पूरा करने के लिए अब और तीन पारियों में बल्लेबाजी करनी है. कोलकाता टेस्ट की एक पारी के अलावा सचिन के पास मुम्बई टेस्ट की दो पारियां हैं. अगर सचिन मुम्बई में यह महाशतक पूरा करने में सफल रहे तो यह और भी यादगार होगा क्योंकि मुम्बई उनका गृहनगर है.

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