मध्यप्रदेश विधानसभा ने रचा इतिहास

भोपाल, शुक्रवार, 27 जुलाई . मध्यप्रदेश विधानसभा ने शुक्रवार को ऐतिहासिक कदम उठाते हुए कांग्रेस के दो निष्कासित विधायकों चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी और सुश्री कल्पना परूलेकर की सदस्यता बहाल करने संबंधी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया.

राज्य विधानसभा के विशेष सत्र की शुरुआत होते ही अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी ने वंदेमातरम के गान के बाद अपनी बात रखी और संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा को प्रस्ताव पढऩे को कहा.
मिश्रा ने कांग्रेस के इन दो निष्कासित विधायकों चतुर्वेदी और परूलेकर का निष्कासन निरस्त करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया. रोहाणी ने प्रस्ताव के संबंध में सदन की राय जानने के बाद इसे सर्वसम्मति से पारित करने की घोषणा करते हुए विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी. इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को पारित करने की पूरी कार्यवाही में मात्र सात मिनट का समय लगा. इस प्रस्ताव को आज ही विधानसभा सचिवालय द्वारा चुनाव आयोग को भेज दिया जाएगा जहां इन दो विधायकों की सदस्यता की बहाली के संबंध में अंतिम निर्णय होगा.

संसदीय प्रक्रिया की जीत: चतुर्वेदी

विधानसभा से बहाली का प्रस्ताव पारित होने के बाद कांग्रेस विधायक चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी ने कहा कि यह संसदीय प्रक्रिया की जीत है. लोकतंत्र इससे मजबूत होगा. संविधान के तहत यह प्रक्रिया हुई है.  विधानसभा परिसर में शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष कक्ष के बाहर पत्रकारों से चर्चा करते हुए चतुर्वेदी ने कहा कि उनका खेद व्यक्त करना संसदीय परंपरा का हिस्सा है. विस. अध्यक्ष रोहाणी को पत्र भी परंपरा के तहत लिखा गया है. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार तो जन सामान्य का मुद्दा है और यह मप्र में बना रहेगा. इस पर अगले सत्र में चर्चा करेंगे. न्यायालय में लगी याचिका और निर्वाचन आयोग पर पूछे गए सवालों पर उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया. हम न्यायालय एवं निर्वाचन आयोग का सम्मान करते है.

राजनीति में कोई परमानेंट दुश्मन नहीं होता : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राजनीति में कोई परमानेंट दुश्मन नहीं होता है. कांग्रेस के दोनों विधायकों की बर्खास्तगी और बहाली नूरा कुश्ती नहीं है. उन्होंने ऐसा कोई जुर्म नहीं किया है कि हम लाठी लेकर लड़ाई करें.  चौहान ने यह बात दोनों विधायकों की बहाली के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कही. उनका कहना है कि विपक्ष भ्रष्टाचार का मुद्दा लाए या फिर कोई और, हम सामना करने को तैयार हैं.

हमने दोनों विधायकों की बर्खास्तगी और बहाली का फैसला बहुत ही सोच समझ कर लिया है. यह फैसला भारतीय संसदीय परंपरा में एक नया इतिहास रचेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि जब 18 जुलाई को दोनों विधायकों को बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया तो मुझे बहुत पीड़ा हुई थी. सबकी भावनाओं का सम्मान करना संसदीय परंपरा है. जिसका सरकार ने निर्वहन किया. इसमें कोई राजनीति नहीं है. उन्होंने कहा कि संसदीय निर्वहन में ऐसी परिस्थितियां बनती हैं. लेकिन लोकतंत्र में विरोध भी जरुरी है, लेकिन इसका तरीका क्या होगा? विपक्षी दल को समझना चाहिए. यदि मर्यादाओं के दायरे में रहकर विरोध किया जाएगा तो हम स्वागत करेंगे.

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