नयी दिल्ली, 31जुलाई. प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज केन्द्र सरकार से खाद की कीमतों में कमी लाने और कृषि क्षेत्र में समाप्त की गई सब्सिडी को बहाल करने का आग्रह किया ताकि खेती में घाटे को काबू में किया जा सके.

श्री चौहान ने यहां कृषि मंत्रालय में केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार से भेंट कर मध्य प्रदेश के किसानों के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. श्री चौहान ने कहा कि खाद के दाम ढाई से तीन गुना बढा देने से खेती की लागत बढ गई है जिससे किसान की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है1 उन्होंने किसान को बाजार के भरोसे छोड देने की नीति को गलत बताया और इसे तुरंत समाप्त करने पर जोर दिया. उन्होंने पिछले रबी की फसलों के लिए बारदानों की अपर्याप्त व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि बारदानों की व्यवस्था समय से पहले ही करना चाहिये ताकि फसलों की बरबादी रोकी जा सके और पिछले वर्ष जैसी स्थिति निर्मित नहीं हो पाये. उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय पर बारदाने की व्यवस्था नहीं हो पाती है तो प्लास्टिक की बोरियों के इस्तेमाल की अनुमति दी जानी चाहिये. श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश दलहन उत्पादक राज्य है.

केन्द्र द्वारा समाप्त की गई सब्सिडी को किसानों को आर्थिक बदहाली से बचाने के लिए बहाल किया जाना बहुत जरूरी है. उन्होंने केन्द्रीय कृषि मंत्री को राज्य में अतिवर्षा से उत्पन्न हुई स्थिति से अवगत कराते हुए कहा कि राज्य में नौ जिले अति वर्षा से प्रभावित है जबकि सात जिलों में अल्प वर्षा की स्थिति है. इन दोनों ही स्थितियों में खेती को नुकसान पहुंचा है1 उन्होंने कहा कि अतिवर्षा एवं अल्प वर्षा से प्रभावित फसलों के नुकसान का आकलन किया जा रहा है जिसकी विस्तृत जानकारी केन्द्र सरकार को भेजी जायेगी. बैठक में राज्य के मुख्य सचिव आर. परशुराम एवं कृषि उत्पादन आयुक्त मदन मोहन उपाध्याय तथा केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

बाघ संरक्षित वनों में पर्यटन पर प्रतिबंध हटाए

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज दिल्ली में केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री श्रीमती जयंती नटराजन से भेंट कर बाघ संरक्षित वनों में पर्यटकों पर प्रतिबंध के बारे में न्यायालय में प्रतिबंध हटाने संबंधी पक्ष रखने का आग्रह किया. उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार मध्यप्रदेश के टाइगर संरक्षित क्षेत्रों नेशनल पार्कों में पर्यटन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इस संबंध में श्री चौहान ने केन्द्रीय मंत्री से कहा कि इससे स्थानीय निवासियों और बडी संख्या में पर्यटन से जुडे लोगों की रोजी-रोटी पर विपरीत प्रभाव पडा है1 श्री चौहान ने कहा कि केन्द्र सरकार इस संबंध में उच्चतम न्यायालय में उचित पहल करे1 उन्होंने बताया कि वन्य-प्राणियों के संरक्षण की पारदर्शी व्यवस्था के साथ ही स्थानीय लोगों की आजीविका भी आवश्यक है.

प्रतिबंध की वजह से इन क्षेत्रों में पर्यटन प्रतिबंधित होने से वन्य-प्राणियों और वनों को खतरा उत्पन्न हो सकता है. पर्यटकों की आवाजाही रहने से वन्य-प्राणियों और वनों को कोई क्षति नहीं होगी. मुख्यमंत्री श्री चौहान ने वन क्षेत्रों से गुजरने वाले मार्गों ऊर्जा सिंचाई योजनाओं से संबंधित प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति देने का भी आग्रह किया1 उन्होंने बताया कि अधिकांश प्रकरण में सैद्धांतिक सहमति दी जा चुकी है1 श्री चौहान ने बताया कि वनों के कोर क्षेत्रों के 831 गाँव में से 108 गाँव के लोग अन्यत्र बसने को सहमत हैं1 श्री चौहान ने केन्द्र सरकार से इन परिवारों के पुनर्स्थापन के लिए अपेक्षित राशि उपलब्ध करवाने की मांग की1

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