नई दिल्ली, 12 जुलाई. हनुमान जी, पहलवान जी, रुस्तम-ए-हिंद आदि न जाने कितने नामों से दुनियाभर में प्रसिद्घ दारा सिंह अपने प्रशंसकों के बीच नहीं रहे. अखाड़ा हो या सिल्वर स्क्रीन हर जगह अपना लोहा मनवाने वाले दारा सिंह आखिरकार अपने जिंदगी की जंग हार गए. दारा सिंह का जन्म 19 नवंबर 1928 को पंजाब के अमृतसर के धरमूचक में हुआ था. उनका पूरा नाम दारा सिंह रंधावा था.

दारा सिंह के पिता का नाम सूरत सिंह रंधावा और माता का नाम बलवंत कौर था. बचपन से ही पहलवानी का शौक रखने वाले दारा सिंह छोटी उम्र से ही अपने छोटे भाई के साथ मिलकर आसपास के जिलों में कुश्ती समारोहों में हिस्सा लेते थे. दोनों भाइयों ने कई कुश्तियां जीतीं. भारतीय स्टाइल को दुनिया में पहुंचाया इलाके में अपनी पहलवानी का लोवा मनवाने के बाद दारा सिंह 1947 में सिंगापुर चले गए. वहां जाकर उन्होंने कुश्ती में हाथ आजमाया और भारतीय स्टाइल की कुश्ती से दुनियाभर को अवगत कराया. मलेशियाई चैंपियन तरलोक सिंह को कुश्ती में हराने के बाद उन्हें दुनियाभर में पहली बार ख्याति मिली. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

विश्व चैंपियन किंग कॉन्ग को पछाड़ा

विदेश में अपनी कामयाबी का झंडा गाड़कर 1952 में दारा सिंह भारत लौट आए. 1954 में भारतीय कुश्ती चैंपियन बने. इसके बाद उन्होंने राष्ट्रमंडल देशों का दौरा किया और विश्व चैंपियन किंग कॉन्ग को भी धूल चटा दी. दारा सिंह की लोकप्रियता से भन्नाए कनाडा के चैंपियन जार्ज गार्डीयांका और न्यूजीलैंड के जॉन डिसिल्वा ने 1959 में कोलकाता में कॉमनवेल्थ कुश्ती चैंपियनशिप में उन्हें खुली चुनौती दे डाली. यहां भी दारा सिंह ने दोनों पहलवानों को धो डाला. इसके बाद 1968 में दारा सिंह ने फ्रीस्टाइल कुश्ती के अमेरिकी चैंपियन लाऊ थेज को हराकर विश्व चैंपियन का खिताब हासिल कर दिया. लेकिन 1983 में उन्होंने कुश्ती को अलविदा कह दिया.

बॉलीवुड में बढ़ाया कदम

कुश्ती के करियर को खत्म करने से पहले दारा सिंह ने सोच लिया था कि अब उन्हें क्या करना है. सामने कामयाबी का एक और रास्ता दिखाई दे रहा था. चुनौतियां तो थीं लेकिन दारा सिंह को तो मुश्किलों से जूझने में मानो मजा आने लगा था लिहाजा वो निकल पड़े बॉलीवुड के सफर पर. 1952 में वतन वापसी के बाद दारा सिंह को पहली फिल्म मिली संगदिल लेकिन उनकी असल पहचान बनी 1962 में आई फिल्म किंग कॉन्ग से. इस फिल्म ने उन्हें वो शोहरत दिलाई जो कम लोगों को ही नसीब होती है.ये फिल्म कुश्ती पर ही आधारित थी.

हनुमान के रोल ने बनाया स्टार

अपने 60 साल लंबे फिल्मी करियर में दारा सिंह ने 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा शोहरत मिली टीवी सीरियल रामायण से. इस सीरियल में उन्होंने हनुमान का किरदार निभाया. इसकी वजह से दारा सिंह को देखते हीं लोगों के जेहन में आज भी जो पहलवान अक्स उभरता है वो बजरंगबली का ही होता है.

दारा सिंह ने की थी दो शादी

दारा सिंह की जिंदगी से जुड़ी एक और भी खास

बात है जो काफी कम लोगों को ही पता है. दरअसल दारा सिंह नाबालिग होते हुए ही एक बच्चे के पिता बन गए थे. कम उम्र में ही दारा सिंह के घरवालों ने उनकी शादी कर दी. नतीजतन महज 17 साल की उम्र में ही एक बच्चे के पिता बन गए लेकिन जब उन्होंने कुश्ती की दुनिया में नाम कमाया तो उन्होंने अपनी पसंद से दूसरी शादी सुरजीत कौर से की. आज दारा सिंह के भरे-पूरे परिवार में तीन बेटियां और तीन बेटे हैं.

शोक में डूबा बॉलीवुड

अखाड़े से लेकर हिंदी फिल्म जगत में अपनी काबिलियत का लोहा मनवाने वाले 'रूस्तम ए हिंद' दारा सिंह के निधन पर समूचा बालीवुड शोक में डूब गया है और लोगों ने ट्वीट कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. हिंदी फिल्म जगत के महानायक अमिताभ ने माइक्रो ब्लागिंग वेबसाइट ट्विटर पर लिखा कि दारा सिंह जी का आज सुबह निधन हो गया. वह एक महान भारतीय और बेहतरीन इंसान थे. उनकी अजीमो शान शख्सियत के जाने से एक पूरे दौर का अंत हो गया.

बालीवुड के सुपर स्टार शाहरूख खान ने ट्वीट किया, 'पहलवान कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता के साथ बनते हैं और दारा सिंह इन सबके मिले जुले रूप थे. दारा सिंह जी हमारे अपने सुपरमैन थे. हम आपको बहुत याद करेंगे सर. नामचीन फिल्मकार शेखर कपूर ने लिखा, 'ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दे. इस उम्र में भी वह अक्सर जूहू बीच पर सैर करते थे.  चेहरे पर मुस्कान रहती थी. उनकी चाल 20 साल के युवक को भी मात देने वाली होती थी. चर्चित अभिनेता अनुपम खेर ने लिखा, 'दारा सिंह जी जीती जागती किंवदंती थे लेकिन बहुत ही जमीन से जुड़े व्यक्ति थे. वह बहुत मजबूत और विनम्र इंसान थे. सभी तरह से वह एक हीरो हैं.

अभिषेक बच्चन ने लिखा, 'दारा जी का निधन हो गया है. फिल्म 'शरारत' में मुझे उनके साथ काम करने का अवसर मिला था. वह बहुत ही विनम्र और दयालु व्यक्ति थे. हम उन्हें हमेशा याद करेंगे. उन्होंने कहा कि वह हमेशा बहुत प्यार करते थे और गले लगाते थे. मुझे आज भी उनसे अपनी पहली मुलाकात याद है जब पिता जी (अमिताभ बच्चन) फिल्म 'मर्द' की शूटिंग कर रहे थे. वह बहुत दृढ़ निश्चयी व्यक्ति थे. संगीतकार और गायक विशाल डडलानी ने ट्वीट किया, 'दारा सिंह साहब ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दे. आपके नाम के आने का मतलब होता है मजबूती. जब भी कोई वीरता वाला काम करता है उससे पूछा जाता है 'ओये दारा सिंह है क्या? गायिका हार्ड कोर ने कहा, 'असली बादशाह दारा सिंह, ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दे. आप हमेशा मेरे दिल में रहेंगे और मुझे शक्ति देंगे. अभिनेता अरशद वारसी ने लिखा, 'एक और महान आत्मा ने हमारा साथ छोड़ दिया. दारा सिंह बेहद विनम्र इंसान थे जिनका कद फौलादी और दिल सोने का था. ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दे.

संसद में भी रहे दारा सिंह

2003 में बीजेपी ने हनुमान की छवि को भुनाने के लिए दारा सिंह को राज्यसभा के जरिए संसद पहुंचाया। हालांकि अखाड़े और स्क्रीन में अपना जलवा दिखा चुके दारा सिंह की दिलचस्पी पर्दे से कम नहीं हुई और 2003 में उन्होंने जव वी मेट में करीना कपूर के दादा का किरदार निभाया। अखाड़े को पहले ही अलविदा कह चुके दारा सिंह ने इसके बाद किसी फिल्म में काम नहीं किया। जिसकी वजह शायद उनकी बढ़ती उम्र और खराब सेहत ही थी।

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