लाल बत्ती, लाल झंडी खतरे का निशान है लेकिन कार पर लगी लाल बत्ती व्यवस्था के आधार पर तो रुतबा का निशान है. यह मंत्रियों व संवैधानिक पदाधिकारियों की गाडिय़ों पर इसलिए लगाया जाता है कि सड़क परिवहन में इन वाहनों की सुरक्षा व निर्बाध चलने दिया जाए. इन्हीं गाडिय़ों पर दिन में राष्टï्रीय ध्वज बोनट पर लगता है.

लेकिन इसका इतना ज्यादा दुरुपयोग हो गया कि भावार्थ व अर्थ ही अनर्थ हो गया. यह सुरक्षा से ज्यादा असुरक्षा व खतरा बन गया. हम लोग भी इस प्रणाली के अभ्यस्त हो गए हैं कि जब कुछ अप्रिय घट जाए और अनिष्टï हो जाए उसी समय कुछ चेतते व सावधान होते हैं, बाद में सब कुछ नजरअंदाज होकर फिर वही सब कुछ चलने लगता है.

एन.डी.ए. के शासन काल में जब संसद पर अब तक का जबरदस्त आतंकी हमला हुआ था तब यह उजागर हुआ कि वे हमलावर उनकी कार पर लालबत्ती लगाकर आये थे जिससे उन्हें वी.आई.पी. समझकर जाने दिया जाए, उसी समय यह बात बड़े जोरों पर उठी थी अब लाल बत्ती पर सख्ती से रोक लगाई जायेगी और बराबर चेकिंग होती रहेगी. राज्यों को भी ऐसे निर्देशे भेजे गये.

अभी भोपाल में कुख्यात अपराधी मुख्तार की गिरफ्तारी के समय उसकी एक गाड़ी पर लालबत्ती लगी पाई गई. अब कई गाडिय़ों में पुलिस सुरक्षा व गश्त वाहनों के हूटर भी लगा लिये गये हैं. इन दिनों मध्यप्रदेश में इस पर हल्ला मचा हुआ है. सरकार कार्यवाही कर रही है. कुछ दिनों तक यह चलेगा और फिर से वही चल पड़ेगा. इससे पहले भी कई बार लालबत्ती के अनाधिकृत प्रयोग पर मुहीम चल चुकी है, लेकिन अवैध लालबत्ती में कोई कमी नहीं आई.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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