मध्य प्रदेश में राजनैतिक यात्राओं का दौर दौरा चल रहा है. अभी भोपाल में कांग्रेस की किसान बचाओ जन चेतना रथ यात्रा का समापन हुआ और उधर भारतीय जनता पार्टी ने बलराम शिवराज किसान संदेश यात्रा शुरू कर दी. मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी के बीच टू पार्टी सिस्टम की स्वस्थ राजनैतिक स्थिति निर्मित हो चुकी है. सत्ता भी इन दोनों पार्टियों के बीच ही घूमा करती है. देश के संसदीय जनतंत्र के लिये यह कितनी बड़ी उपलब्धि होगी. यदि मध्य प्रदेश का अनुसरण कर पूरे भारत में हर राज्य व अखिल भारतीय स्तर पर दो पार्टी व्यवस्था जम जाये.

अगले साल 2013 में मध्य प्रदेश विधानसभा के आम चुनाव आ रहे हैं. उसी की तैयारियों में दोनों पार्टी की यात्रायें निकल रही हैं और राजनैतिक सक्रियता बढ़ती जा रही है. भारतीय जनता पार्टी तीसरी बार जीत कर हेट्रिक बनाना चाहती है और कांग्रेस हार कर हार की हैट्रिक नहीं बनाना चाहती, बल्कि जीत कर भाजपा को आऊट करना चाहती है. फिलहाल दोनों पार्टियों का किसानों पर प्रचार प्रभाव पर सबसे ज्यादा जोर है. कांग्रेस कह रही है कि राज्य में 6-7 वर्षों में कर्ज व अन्य समस्याओं से 11,000 किसान आत्महत्या कर चुके हैं. किसान खाद, बिजली व कर्ज के लिये त्राहि-त्राहि कर रहे हैं. भाजपा जवाब में कहती है कि केंद्र सरकार जानबूझ कर खाद पूरी मात्रा में नहीं दे रहे हैं. किसानों को देश में सबसे अधिक सुविधा एक प्रतिशत ब्याज पर कर्ज दिया जा रहा है. बलराम यात्रा में 75,000 हजार से अधिक मोटर साइकिल से पूरे प्रदेश में 50 हजार गांवों में किसानों से संपर्क करेंगे. कांग्रेस की यात्रा एक जनवरी को ग्वालियर से शुरू हुई थी और 40 जिलों में 6000 किलोमीटर का भ्रमण कर किसानों से संपर्क किया.

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