भोपाल, 9 नवंबर. भारतीय सुदूर संवेदन सोसायटी एवं म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जियो स्पेशियल कुंभ मेले के चौथे दिन अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी द्वारा ग्रामीण सशक्तिकरण पर राष्ट्रीय सिम्पोजियम का शुभारंभ हुआ.

शुभारंभ सत्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि गाँव और किसानों के विकास से ही विकास की कल्पना साकार हो सकती है. उन्होंने कहा कि विज्ञान के छोटे-छोटे प्रयोगों का उत्पादन में उपयोग किया जाये तो हमारी आर्थिक क्षमता बढ़ेगी. आधुनिक प्रौद्योगिकी का लाभ समाज में अंतिम स्थान प्राप्त व्यक्ति को मिलना चाहिये. विशेष अतिथि म.प्र. शासन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी पर आधारित उपग्रह से प्राप्त चित्रों और जानकारियों का उपयोग म.प्र. के संसाधन एटलस को तैयार करने में हो रहा है. इस प्रौद्योगिकी का उपयोग भावी पंचवर्षीय योजना में भी किया जायेगा.

राष्ट्रीय आयोजन समिति के कार्यकारिणी अध्यक्ष एवं म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक प्रो. प्रमोद के वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय परिचर्चा में मंचन से प्राप्त सुझावों का उपयोग प्रदेश के विकास के रोड मैप बनाने में किया जा सकेगा. स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद के निदेशक पदमश्री डा. आर. नवलगुड ने कहा कि बीते वर्षो में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का बहुआयामी विकास हुआ है. उन्होंने कहा कि झाबुआ के विकास में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी अहम भूमिका निभा सकती है. इस अवसर पर प्रकाशित स्मारिका का विमोचन तथा वैज्ञानिकों को आईएसआरएस एन्युल कन्वंशन अवार्ड्ïस प्रदान किये. राष्ट्रीय सिम्पोजियम के उद्ïघाटन से पहले विजयवर्गीय ने विज्ञान भवन परिसर में नव निर्मित अतिथि विश्राम वीथिका का उद्घाटन भी किया. उन्होंने जियोस्पेशल कुंभ मेले में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विविध समस्याओं का समाधान तथा ग्रामीण प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी के विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया. ग्रामीण प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी की थीम है ग्रामीण प्रौद्योगिकी परम्परागत तरीकों से आर्थिक समृद्घि. यह प्रदर्शनी सभी के लिए सायं 5.30 बजे तक खुली रहेगी. प्रदर्शनी में 26 जिलों के कारीगर एवं शिल्पी भाग ले रहे है.

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