मास्को, 22 अप्रैल. रूस इन दिनों किशोरों की आत्महत्याओं से हिला हुआ है। वहां के अखबार इन खबरों से पटे हैं। स्थिति यहां तक पहुंच चुकी है कि राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव को गुरुवार को मीडिया को इन आत्महत्याओं का कवरेज कम करने की चेतावनी देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से यह गंभीर हादसे हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम इन्हें लगातार बड़ा बनाते जाएं।

रूस में किशोरों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं ने इस साल फरवरी से उछाल भरी। जब दो 14 वर्षीया लड़कियों ने मास्को में एक 16 मंजिला इमारत से हाथों में हाथ डाल कर छलांग भरी। इसके बाद मीडिया में इमारतों से छलांग लगाकर आत्महत्या की घटनाएं सुर्खियों में छा गई। बीती 9 अप्रैल को 24 घंटे के भीतर छह किशोरों ने जान दे दी। एक 16 वर्षीया लड़की सर्बिया में अस्पताल की अधबनी इमारत से कूद गई। जबकि पांच अन्य ने अलग-अलग जगहों पर फांसी लगा ली। एक 15 वर्षीय किशोर ने तो जन्मदिन पर मौत को गले लगाया। एक अन्य की मां को बेटे की लाश दो दिन बाद उसके कमरे में झूलती मिली। बीते एक हफ्ते में ऐसे दस हादसे और सामने आए हैं। रूस में पिछले कुछ वर्षों में संपन्नता आने के बाद वयस्कों की आत्महत्या के मामले भले कम हुए है, लेकिन किशोरों की आत्महत्याएं वहां दुनिया में इसकी औसत दर से तीन गुना ज्यादा हैं।

समाजशास्त्री इसके लिए रूस में परिवारों के टूटने की बढ़ती दर, किशोरों में शराब की लत और सोवियत संघ के विघटन से पैदा हुई अन्य समस्याओं को जिम्मेदार मान रहे हैं। कई इसके लिए फेसबुक समेत अन्य सोशल नेटवर्किंग साइटों को भी अलग-अलग कारणों से जिम्मेदार ठहराते हैं। वे मेदवेदेव से सहमत हैं क्योंकि बच्चों और किशोरों में नकल करने की प्रवृत्ति होती है। ऐसी खबरें उन्हें इस रास्ते पर चलने को उकसाती हैं। यूएन चिल्ड्रंस फंड के अनुसार विश्व में किशोरों के आत्महत्या करने की दर प्रति एक लाख में सात है, जबकि रूस में यह प्रति एक लाख किशोरों में 22 है। चौंकाने वाली बात यह है कि रूस के दो क्षेत्रों तुवा और चुकोत्का में यह दर प्रति लाख पर सौ से अधिक है।

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