भारत ने मालदीव में हुये सार्क शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों (भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, बंगलादेश, श्रीलंका व मालदीव) के लिये सीमा शुल्क लगभग खत्म करके सार्क देशों के बीच खुले व्यापार व बाजार का आर्थिक सहयोग बनाया है. इससे मालदीव की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा बाजार मिल गया है.

भारत ने मालदीव को 500 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद भी दी है. प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत दक्षिण एशिया में शांति से प्रगति का मार्ग चाहता है. उन्होंने सार्क नेताओं को यूरो जोन में बढते हुये आर्थिक संकट की ओर सावधान किया. उन्होंने सार्क देशों के लिये शून्य कस्टम ड्यूटी की घोषणा की है. दुनिया के आर्थिक संकट के संदर्भ में उन्होंने बताया कि सार्क क्षेत्र ने आपसी सहयोग से इस दिशा में काफी स्थाईत्व दिखाया है. सार्क के आपसी सहयोग पर ही इस क्षेत्र की आर्थिक प्रगति निर्भर करेगी.

मालदीप में 17वें शिखर सम्मेलन से दो दिन पहले ही चीन ने इस देश में दूतावास खोला है. चीन भी सार्क क्षेत्र में अपनी व्यापारिक बढ़त के लिये प्रयत्नशील है. भारत के प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह पहले राजनेता हैं, जिन्होंने मालदीप की संसद (मजलिस) को संबोधित किया. मालदीप के साथ जो समझौते हुये हैं, उसमें आंतक के विरुद्घ संयुक्त अभियान व कार्यवाही का करार है. आतंक के प्रश्न पर उन्होंने स्पष्टï कर दिया कि वे पाकिस्तान की यात्रा पर उसी हालत में जायेंगे जब सीमा पार से आतंक को खत्म किया जायेगा. अगर मुंबई जैसा एक कांड और हो गया तो क्षेत्र में शांति प्रयासों को गहरा झटका लगेगा. सार्क शिखर सम्मेलन का समापन मालदीव के राष्टï्रपति मोहम्मद नाशिर ने संयुक्त घोषणा पत्र के साथ किया. इसमें कहा गया है कि आतंक और ड्रग की तबाही के कड़ाई से संयुक्त प्रयास होंगे. देशों के बीच रेल, सड़क के नेटवर्क को बढ़ाते हुये व्यापार की बाधाओं (ट्रेड बेरियर) को भी खत्म किया जायेगा.

सम्मेलन ने बढ़ते हुये आतंकवाद पर गहरी चिंता जताते हुये इसे सभी रूपों में खत्म करना होगा. सार्क ने खाद्यान्न की दिशा में ‘सीड बैक’ स्थापित करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है. मालदीप से सार्क एक संयुक्त आर्थिक क्षेत्र व बंधनमुक्त व्यापार की ओर अग्रसर हो गया है. सार्क शिखर सम्मेलन की यह भी एक बड़ी खूबी रही कि सम्मेलन के अलावा प्रधानमंत्री व राष्टपतियों की जमात आपस की चर्चा भी कर सके. प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने सम्मेलन में पाक प्रधानमंत्री श्री युसुफ रजा गिलानी, बंगलादेश की प्रधानमंत्री श्रीमती बेगम शेख हसीना व नेपाल के प्रधानमंत्री श्री भट्टराई से भी भेंट की. भारत-नेपाल के बीच दोहरे कराधान की समस्या चली आ रही है. प्रधानमंत्री श्री सिंह ने श्री भट्टराई को आश्वस्त कर दिया है कि केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री प्रणव मुखर्जी शीघ्र ही नेपाल की यात्रा पर जायेंगे और इस दोहरे कराधान को खत्म करने के समझौते पर हस्ताक्षर हो जायेंगे. इस अवसर पर श्री सिंह व अफगानिस्तान के राष्टपति श्री करजई के बीच भी विस्तृत व्यापार पर विचार-विमर्श सम्पन्न हो गया.

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