नई दिल्ली, 9 सितंबर. रिकार्डों के बेताज बादशाह मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में लगातार तीन बार बोल्ड होने पर पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने एक आलोचनात्मक टिप्पणी क्या की. क्रिकेट की दुनिया में सचिन के संन्यास को लेकर भावनाओं की जंग ही छिड़ गयी.

सचिन के इस प्रदर्शन और उनके संन्यास के प्रश्न पर दुनिया भर के तमाम पूर्व और मौजूदा खिलाडियों ने अपनी अपनी राय दे डाली है. कुछ का मानना है कि सचिन को संन्यास का फैसला खुद ही लेना चाहिए और कुछ का कहना है कि सचिन को नये खिलाडिय़ों के लिए रास्ता साफ करना चाहिए. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सचिन अपने ब्रांड को बनाये रखने के लिए क्यिकेट में टिके हुए हैं.

हालांकि इस मामले पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने चुप्पी साध रखी है. सचिन ने भी ऐसी बातों पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है. संभवत वह इन आलोचनाओं का जवाब देने के लिए सही मौके का इंतजार कर रहे हैं लेकिन इस वर्ष राहुल द्रविड और वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गजों के संन्यास ने कहीं न कहीं सचिन पर दबाव बना दिया है.
गावस्कर ने सचिन के बोल्ड होने पर उनके फुटवर्क को लेकर सवाल उठाये थे लेकिन पूर्व भारतीय कप्तानों कपिलदेव, मोहम्मद अजहरुद्दीन और सौरभ गांगुली का कहना है कि संन्यास का फैसला करने का हक सिर्फ सचिन को ही है. गावस्कर के साथ ही सचिन की आलोचना करने वाले कमेंटेटर और पूर्व भारतीय खिलाड़ी संजय मांजरेकर के सुर हालांकि बाद में बदल गये. कपिल ने सचिन की वकालत की लेकिन इस दिग्गज आलराउंडर के कोच देश प्रेम आजाद का कहना है कि उम्र बढऩे के साथ-साथ सचिन का फुटवर्क धीमा होता जा रहा है जिसे देखते हुए उन्हें खुद अपने संन्यास के बारे में सोचना चाहिए.

दूसरी तरफ आस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाजों डेनिस लिली और ग्लेन मैक्ग्रा का भी कहना है कि सचिन को अपने संन्यास के बारे में खुद ही फैसला करना चाहिए लेकिन न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान मार्टिन क्रो मानते हैं कि मास्टर ब्लास्टर इस बात से इंकार नहीं कर सकते हैं कि वह उम्र के साथ धीमे होते जा रहे हैं. गौरतलब है कि न्यूजीलैंड सीरीज में कमेंट्री कर रहे गावस्कर और मांजरेकर ने दो टेस्ट मैचों की तीन पारियों में लगातार बोल्ड होने के बाद सचिन के फ्टु वर्क पर सवाल उठाते हुए उनके प्रदर्शन पर उम्र हावी होने का हवाला दिया था. हालांकि मांजरेकर ने बाद में अपने सुर बदलते हुए कहा कि सचिन आज भी भारतीय टीम के लिए अहम हैं और उन्होंने कभी नहीं कहा कि इस महान खिलाड़ी को अब संन्यास ले लेना चाहिए.

मांजरेकर ने कहा कि कुछ हफ्ते पहले ही मैंने कहा था कि सचिन नवंबर 2013 में भारत के दक्षिण अफ्रीका के दौरे के लिए टीम का अहम हिस्सा साबित होंगे. मैं आज भी अपने बयान पर कायम हूं. सचिन न्यूजीलैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की तीन पारियों में जिस तरह से आउट हुए थे उस पर टिप्पणी करने का मजलब यह बिल्कुल नहीं था कि उन्हें अब संन्यास ले लेना चाहिए. मांजरेकर ने कहा कि मैं कमेंट्री बाक्स में गावस्कर के पास बैठा हुआ था. मुझे सचिन के बोल्ड होने के तरीके पर काफ्ी चिंता हुई. एक महान बल्लेबाज होने के नाते यह गावस्कर की दूसरे बल्लेबाज के लिए परख थी. मैं मानता हूं कि यह खेल के तकनीकी पहलू होते हैं जो आम इंसान नहीं समझ पाता लेकिन एक खिलाड़ी उसे समझ पाता है.

गांगुली ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं है कि सचिन बोल्ड हुए हैं. वह अपने चरम समय में भी इस तरह बोल्ड हुए थे लेकिन उन्होंने इससे निपटने का तरीका ढूंढ़ निकाला था और वह एक बार फिर ऐसा कर सकते हैं. मुझे भरोसा है कि लोग उनके संन्यास की बात कर रहे हैं. उससे उन्हें दुख हुआ होगा और वह निश्चित ही इसका जवाब देंगे. इन खिलाडियों के बीच कपिल के कोच देश प्रेम आजाद की टिप्पणी भी ध्यान देने योग्य है. आजाद ने कहा कि सचिन फुटवर्क धीमा होने के कारण ही सीरीज में तीन बार बोल्ड हो गये. मैंने न्यूजीलैंड के खिलाफ सचिन की बल्लेबाजी को गौर से देखा और अब समय आ गया है कि बीसीसीआई की चयन समिति गंभीरता से विचार करे कि सचिन को संन्यास ले लेना चाहिए. आजाद ने कहा कि सुनील गावस्कर. राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण जैसे खिलाड़ी खुद अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायर हुए. सचिन को भी युवा खिलाडिय़ों के लिए रास्ता साफ करना चाहिए. उन्हें बिना किसी उद्देश्य के राष्ट्रीय टीम में नहीं टिके रहना चाहिए. सचिन एक लीजेंड हैं और उन्हें लीजेंड की तरह संन्यास लेना चाहिए.

.

Related Posts: