खुलेआम बिक रही खुली हुईं दवाईयां

भोपाल, 30 मई, नभासं. मीठी गोलियों में आखिर कौन-सी होम्योपैथिक दवाईयां डाल कर ग्राहकों को दवा विक्रेता देते हैं, इसकी जानकारी न तो होम्योपैथिक चिकित्सक को ही होती है और न ही ग्राहक को. यह कहना है उन तमाम होम्योपैथिक चिकित्सकों का जिनके यहां मरीजों का उपचार होम्योपैथिक विधा से किया जाता है.

वहीं होम्योपैथिक मेडिकल स्टूडेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. दीपक ङ्क्षसह ने दवा विक्रेताओं पर आरोप लगाया है कि दवा दुकान में यदि चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवाईयां मौजूद नहीं रहती तो विक्रेता द्वारा ग्राहक को कोई और दवाईयां या फिर सिर्फ एल्कोहल की 2-4 बूंदें शीशी में डालकर दे दी जाती है, जिसे समझ पाना कोई आसान काम नहीं होता है.
आखिरकार इसका परिणाम यह होता है कि मरीजों को चिकित्सक के यहां महीनों चक्कर काटने के बावजूद भी बीमारी अपने प्रारंभिक अवस्था में बनी रहती है. हालांकि अधिकांश होम्योपैथिक चिकित्सक मरीजों को दवाईयां स्वयं देते हैं. कुछ इसी तरह का वाक्या अभी राजधानी भोपाल के एक निजी होम्योपैथिक कॉलेज के ओपीडी में देखने को मिला है. चिकित्सक द्वारा मरीज को लम्बे समय से आर्निका 1 एम, कैल्केरिया-200 जैसी दवाईयां लिखी जा रही थीं. मरीज को कई महीने बाद भी जब फायदा नहीं हुआ तो मामले की पड़ताल की गई तो पता चला कि ये दवाईयां ओपीडी में छह महीने से उपलब्ध नहीं थीं.

आखिर इस दौरान मरीज को कौन-सी दवाईयां दी गईं, यह कोई भी नहीं जानता. होम्योपैथिक चिकित्सकों एवं इससे जुड़े संगठनों का मानना है कि यदि एलोपैथिक दवाईयों की तर्ज पर होम्योपैथिक दवाईयां भी सीलबंद शीशी में आने लगे तो काफी हद तक जटिलतायें खत्म हो सकती हैं. गौरतलब है कि दवाईयों की खुदरा बिक्री पर बहुत पहले से ही प्रतिबंध लगा हुआ है. लेकिन इसके बावजूद भी दवाईयां सीलबंद बोतलों से निकाल कर खुले में बेची जा रही हैं. इससे इसकी प्रमाणिकता पर सवाल खड़ा होना लाजमी है. उल्लेखनीय है कि शीशी में भर कर बेची जा रही मीठी गोलियों में न तो दवा के पोटेंसी का पता चलता है और न ही दवा की प्रमाणिकता. इन सबके अलावा ग्राहकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह हो रही है कि आखिर शीशी का मूल्य क्या होना चाहिये. कोई दवा विक्रेता उसी शीशी का दाम बीस रुपये लेता है तो कोई तीस रुपये. केंद्रीय होम्योपैथिक चिकित्सा परिषद इन सारी जटिलताओं को बखूबी जानता है. इन सबके बावजूद भी कोई साहसिक कदम अब तक नहीं उठाया गया है. वहीं एलोपैथिक एवं आयुर्वेदिक दवाईयों की बिक्री सीलबंद तरीके से होने के कारण दवा का निर्धारित मूल्य, प्रमाणिकता, एक्सपाईरी सारी चीजों का ज्ञान ग्राहक को आसानी से हो जाता है.

एक विशेष बातचीत के दौरान होम्योपैथिक चिकित्सक एवं हमसाई अध्यक्ष डॉ. अमित पांडे ने बताया कि होम्योपैथिक विधा में शत-प्रतिशत परिणाम न मिलने के पीछे गलत दवाईयां हैं. वहीं संगठन के उपाध्यक्ष डॉ. उपेंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि केंद्रीय होम्योपैथिक चिकित्सा परिषद को दवा की बिक्री एवं प्रमाणिकता को लेकर नया मसौदा तैयार करना चाहिये कि इन दवाईयों का प्रभाव नहीं है. बशर्ते इसमें सुधार की आवश्यकता है.

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