हेडली की सज़ा से भारत नाख़ुश

Salman khurshidनई दिल्ली, 25 जनवरी. अमेरिका की एक अदालत ने मुंबई आतंकी हमलों के लिए पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक और लश्कर-ए-तोएबा के आतंकवादी डेविड हेडली को 35 साल की सजा सुनाई।

इस फैसले के बाद विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने शुक्रवार को कहा कि यदि हेडली के खिलाफ यहां ट्रायल होता तो भारत हेडली के लिए और ज्यादा सजा दिए जाने का पक्ष रखता और इसे दिलवाना चाहता। उसे कम सजा मिलने से भारत को निराशा है। वहीं, केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने कहा कि हम हेडली के प्रत्यर्पण
की मांग करते रहेंगे। भारत डेविड हेडली और मुम्बई हमलों में शामिल सभी लोगों के लिए मौत की सजा चाहता है।

एक बातचीत में खुर्शीद ने कहा कि यदि हम उसका ट्रायल करते तो हम इससे ज्यादा सजा चाहते। विदेश मंत्री ने यह बात उस समय कही, जब उनसे पूछा गया कि हेडली को मिली 35 साल की सजा पर्याप्त है। एक समझौते के तहत अमेरिकी अभियोजक इस बात पर सहमत हो गए थे, कि वे हेडली को मृत्युदंड दिए जाने की मांग नहीं करेंगे और उसे उसके अपराधों के लिए पाकिस्तान, भारत या डेनमार्क को भी नहीं सौंपेंगे। जब खुर्शीद से पूछा गया कि क्या हेडली पर भारत में कभी मुकदमा चलेगा। इस पर उन्होंने कहा कि इस सवाल का जवाब केवल अभियोजन अधिकारी ही दे सकते हैं, इस बारे में मैं अटकलें नहीं लगा सकता। उन्होंने आगे कहा कि भारत, हेडली के प्रत्यर्पण व उसके मामले की भारत में सुनवाई के लिए लगातार दबाव बनाता रहा है। यह जानकर अच्छा लगा कि उसे इसके लिए जबावदेह ठहराया गया और उसे कम से कम 35 साल की सजा तो दी गई।

गौर हो कि अमेरिका की एक अदालत ने मुंबई आतंकी हमलों के लिए पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक और लश्कर-ए-तोएबा के आतंकी डेविड हेडली को गुरुवार को 35 साल की सजा सुनाई। लेकिन अमेरिकी सरकार के साथ एक समझौते के चलते वह मौत की सजा पाने से बच गया जिस पर सजा सुनाने वाले जज ने भी गंभीर आपत्ति जाहिर की। जज लेनेनवेबर ने कहा कि ‘जो सजा मैं सुना रहा हूं, मुझे उम्मीद है कि यह श्रीमान हेडली को ताउम्र सलाखों के पीछे रखेगी। जज ने कहा कि मौत की सजा सुनाना अधिक आसान होता। उन्होंने कहा कि आप उसी के हकदार हैं। 52 वर्षीय हेडली ने अमेरिकी जांचकर्ताओं के साथ एक समझौता किया था जिसके तहत वह मौत की सजा पाने से बच गया। लेकिन बहुत लोगों को इससे हैरानी हुई कि अमेरिकी अभियोजकों ने हेडली के लिए आजीवन कारावास की सजा क्यों नहीं मांगी। अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज हैरी लेनेनवेबर ने हेडली को 35 साल जेल में बिताने का आदेश दिया जिसमें बाद में पांच साल के सुपरवाइज्ड रिलीज (निगरानी में रिहाई) का प्रावधान होगा। इस सजा में पैरोल की कोई व्यवस्था नहीं है और दोषी को अपनी सजा की कम से कम 85 फीसदी सजा पूरी करनी होगी। जज ने खचाखच भरे अदालत कक्ष में सजा सुनाते हुए कहा कि श्रीमान हेडली एक आतकी हैं। लेनेनवेबर ने यह भी कहा कि उसने अपराध को अंजाम दिया, अपराध में सहयोग किया और इस सहयोग के लिए बाद में इनाम भी पाया। उन्होंने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं क्या करता हूं। इससे आतंकवादी रूकेंगे नहीं। दुर्भाग्यवश, आतंकवादी इन सब की परवाह नहीं करते। मुझे श्रीमान हेडली की इस बात में कोई विश्वास नहीं होता जब वह यह कहते हैं कि वह अब बदल गए हैं।

मृत्युदंड का हकदार था हेडली: अमेरिकी जज

शिकागो. मुम्बई में 26 नवम्बर, 2008 को हुए आतंकवादी हमले में प्रमुख भूमिका निभाने वाले डेविड हेडली को एक अमेरिकी न्यायाधीश ने भले ही 35 वर्ष कारावास की सजा दी है, लेकिन उसने कहा है कि पाकिस्तानी मूल का यह अमेरिकी आतंकवादी वास्तव में मृत्युदंड का हकदार था। अमेरिका के जिला न्यायाधीश हैरी लीनेनवेबर ने गुरुवार को हेडली के खिलाफ अपेक्षाकृत हल्की सजा सुनाते हुए कहा कि हेडली एक आतंकवादी है। न्यायाधीश ने कहा कि मृत्युदंड सुनाना काफी आसान होता। न्यायाधीश ने 52 वर्षीय हेडली से कहा कि तुम इसके हकदार हो।
हेडली ने मुम्बई आतंकवादी हमले को अंजाम देने के लिए संदेह से बचने के लिए अपना असली नाम दाउद गिलानी से बदलकर डेविड हेडली कर लिया था। एक समझौते के तहत अमेरिकी अभियोजक इस बात के लिए राजी हो गए थे कि उसके खिलाफ मृत्युदंड की मांग नहीं की जाएगी और उसे इस मामले में पाकिस्तान, भारत या डेनमार्क को प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा। न्यायाधीश ने कहा कि मुझे हेडली की इस बात पर कोई भरोसा नहीं होता कि वह अब बदल गया है। मैं समझता हूं कि यह मेरा दायित्व है कि मैं आम लोगों को हेडली से बचाऊं और वह फिर कभी ऐसी वारदात में शामिल न हो।

न्यायाधीश ने कहा कि 35 साल की सजा उपयुक्त नहीं है। लेकिन मुझे आशा है कि मैंने जितनी सजा उसे दी है, उसका शेष जीवन जेल में ही बीत जाएगा। 35 साल की सजा पूरी हो जाने के बाद हेडली पर पांच साल तक निगरानी रखी जाएगी। संघीय पैरोल की कोई व्यवस्था नहीं होगी और आरोपी को कम से कम 85 फीसदी सजा भुगतनी होगी।
अभियोजकों ने कहा कि अपना गुनाह कबूलते हुए और बाद में अपने मित्र तहव्वुर हुसैन राणा के खिलाफ सुनवाई में गवाही देते हुए हेडली ने कबूल किया था कि वह 2002 से 2005 के बीच पाकिस्तान में पांच अलग-अलग मौकों पर लश्कर-ए-तैयबा द्वारा संचालित प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुआ था। 2005 के अंतिम दिनों में लश्कर के तीन सदस्यों ने हेडली को सर्वेक्षण के लिए भारत जाने का निर्देश दिया। इसके बाद सितम्बर 2006 से जुलाई 2008 के बीच उसने पांच बार भारत की यात्रा की थी और विभिन्न लक्ष्यों के विडियो तैयार किए थे। प्रत्येक यात्रा से पहले लश्कर सदस्यों ने हेडली को उन खास स्थानों के बारे में उसे जानकारी दी थी, जहां के निरीक्षण उसे करने थे। प्रत्येक भारत यात्रा के बाद उसने पाकिस्तान की यात्रा की और लश्कर सदस्यों से मिलकर उन्हें अपने निरीक्षण के परिणाम पर रिपोर्ट दी थी और निरीक्षण के वीडियो उन्हें उपलब्ध कराए थे।

कुंभ के पंडाल में आग, 25 झुलसे

इलाहाबाद, 25 जनवरी. इलाहाबाद में कुंभनगरी में शुक्रवार को अचानक आग लग गई. यहां एक पांडाल के एक टेंट में आग लगी. इसके बाद देखते ही देखते इसने पांच टेंटों को अपनी चपेट में ले लिया. इस हादसे में 25 लोग झुलस गए. इनमें से चार की हालत गंभीर है. राहत की बात ये रही है कि आग की खबर पाकर फायर ब्रिगेड की तीन गाडिय़ां तुरंत मौके पर पहुंच गईं. इसके बाद आग पर काबू पा लिया गया. आग लगने के कारणों के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं मिल पाई है.

 

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