कथा प्रसंग का अंतिम दिवस, कृष्ण-सुदामा प्रसंग में भावुक हुए स्रोता

भोपाल, 3 जनवरी. भटके हुए मन को खूटे में बांधने का नाम विवाह है विवाह भोग के लिए नहीं योग के लिए. विवाह एक धार्मिक संस्कार है. मनुस्मृति में आठ प्रकार के विवाह की चर्चा है.

ब्राम्हण, दैव, आर्य, प्रजापत्य, असुर, गंधर्व, राक्षस और वैदिक. वैदिक विवाह ही सर्वोत्तम विवाह है. यह बात आज कथा प्रसंग के अंतिम दिन आचार्य नवलेश जी ने श्रोताओं से कही. कथा माधव बाल उद्यान में चल रही है. भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी के साथ वैदिक विवाह करके जनमानस को यही संदेश दिया. आचार्य नवलेश ने कहा कि मित्र सुदामा की कथा समर्पण की कथा है. द्वारकाधीश और सुदामा की मित्रता सदा से अनुकरणीय रही है और  रहेगी. यदु और दत्तात्रेय का संवाद, 24 गुरुओं की कथा जीवन में पालन शिक्षा देती है. आपने कहा कि पृथ्वी जैसा क्षमावान, सहन शीलता जब तक जीव में नहीं आती तब तक उसके जीवन में सुगंध नहीं आती. विकास के लिए विपत्ति अनिवार्य है, देश में जितने भी महापुरुष हुए थोड़ा जीवकर राष्टï्र को बहुत कुछ देकर गये. सात दिन तकसुक मुनि ने सम्राट परीक्षित को कथा सुनाने के बाद अंतिम प्रश्र पूछा कि क्या तुम मरोगे? उत्तर मिला कि मैं नहीं मरुंगा शरीर मरता है मैं तो आत्मा हू अजर अमर अविनाशी हू. मृत्यु जीवन का सारस्वत सत्य है. कथा पंडाल में आज अंतिम दिन भगवान की महाआरती की गई 500 लोगों ने दीप जलाकर आरती की भगवान ने फूलों की होली भी खेली जिसकी भव्यता देखते ही बन रही थी. पण्डाल में हजारों की संख्या में श्रद्घालुजन उपस्थित थे.

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