जब देश के प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह व केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शरद पवार देश में अल्प वर्षा व संभावित सूखे से चिंतित हैं, उस समय मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में ताप्ती नदी खतरे के निशान से 13.5 मीटर ऊपर बह रही है. मध्यप्रदेश इस मामले में भाग्यशाली है कि एक चिन्ताजनक अन्तराल के बाद राज्य में अच्छी वर्षा हो रही है. अन्य राज्यों में भी वर्षा सुधर रही है. मौसम विभाग का अब यह अनुमान है कि वर्षा का अनुपात सामान्य से कुछ ही कम रह सकता है और काफी इस दूसरे दौर की वर्षा में प्राप्त हो जायेगा.

मध्यप्रदेश के किसान इस समय धान व सोयाबीन की बुवाई की ओर ध्यान दे रहे हैं. इस बार छत्तीसगढ़ राज्य तो धान की लेवी लेगा, लेकिन मध्यप्रदेश में यह नहीं ली जायेगी. यह अपने आप में बहुत बड़ा प्रोत्साहन है. धान के समर्थन पर भी राज्य ने बोनस देने की घोषणा कर दी है. पूर्वी भाग में चक्रवात व कम दबाव का क्षेत्र बनने से वर्षा में तीव्रता आ गई है. रीवा, शहडोल, जबलपुर व सागर संभागों में मूसलाधार वर्षा हो रही है. वर्षा के घने बादल ग्वालियर व चंबल संभाग की ओर बढ़ गए हैं और वहां भी जोरदार वर्षा हो रही है.
मध्यप्रदेश में इस दूसरे दौर की जोरदार वर्षा ने तिलहन की फसलों को और उसके किसानों को नई जिंदगी दे दी है. राज्य में सोया फसल बरबाद होने से बच गई. मध्यप्रदेश सोया उत्पादन में देश का प्रथम राज्य है. देश भर में सोयाबीन की फसल का रकबा 102 लाख हेक्टेयर तक पहुंच जायेगा. मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में सोयाबीन का तेल मुख्य खाद्य तेल बनता जा रहा है. कभी तिल्ली का तेल मुख्य था, उसे मूंगफली ने पीछे कर दिया अब सोया तेल आगे आ रहा है.

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