देश का पहला गेहूं उपार्जन संयत्र बाबई में चालू

माखननगर,22 मई नससे. बाबई कृषि प्रक्षेत्र स्थित 26 एकड़ के प्लाट पर सायलो बैग इंडिया प्रायवेट लिमिटेड दिल्ली द्वारा टाईल व टेस्टेड तकनीक पर आधारित भारत का प्रथम संयत्र जो मध्यप्रदेश शासन से अनुबंधित है 20 मई से चालू हो गया है.

इस तकनीक से न बोरों की जरूरत, न विचौलियों की जरूरत, न डकैतों की जरूरत किसान अपना गेहूं लेकर आए ,म.प्र.शासन के निर्धारित मापदंडों के अनुसार परीक्षण कराए और तुरंत ट्राली की व ान कर मैदान में ढ़ेर लगाए और रसीद प्राप्त कर सब झंझटों से मुक्ति पाए. इस संयत्र में इस समय ट्रालियों के अत्यधिक भीड़ के बाद भी संयत्र की समता के अनुसार माल नहीं आ पा रहा है. कंपनी को प्रतिदिन 200 से 250 टन खरीदी का लक्ष्य दिया गया और यह पूरी खरीदी 31 मई तक पूर्ण करना है यदि इसके बाद भी यदि कोई किसान रह जाता है तो यह खरीदी को आगे बढ़ाई जा सकती है इस प्लाट में छोटे एवं बड़े किसान दोनों अपने माल को तुलवा सकते है. यदि किसी किसान का मंडी में माल पड़ा है तो वह भी मंडी से गेट पास लेकर यहों माल तुलवा सकता है.

आस्ट्रेलिया से आए सायलो बैग अर्जेन्टीना की मशीनों द्वारा पैक की जा रहीं है एक बैग की लंबाई 200 स्वैयर फुट है जिसमें 2 हजार क्विंटल गेंहू भरा जा सकता है इन बैगों में 3 वर्ष तक रखे गए अनाज को कोई क्षति नहीं पहुंचेगी. इस प्रकार के संयत्र भारत के अलावा 45 अन्य देशों में भी चल रहें है. और यह संयत्र भारत का पहला संयत्र है. इस संयत्र की कार्यप्रणाली को देखने हेतु आस पास से ह ाारों व्यक्ति पहुंच रहें है. शासन द्वारा निर्धारित मापदंडों के चलते 21 मई को 40 ट्राली एवं 22 मई को 35 ट्राली गेहूं में कीडे होने के कारण वापिस कर दिया गया जबकि एक ट्राली गेहूं मिट्टी के कारण वापस कर दिया गया. प्लांट में 39 ह ाार मीट्रिक टन माल रखा जा सकता जबकि शासन द्वारा 30 हजार मिट्रिक टन गेहूं रखने रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है इस कंपनी का एक निजी प्लांट गंगानगर में चल रहा है.

इन सब व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने हेतु एडीएम सपना शिवाले, तहसीलदार अनिल सोनी, नायब तहसीलदार मोनिका बागमारे, आरआई राजेश त्रिपाठी एवं कर्मचारी व पुलिसकर्मी व्यवस्था सुचारू रूप से चले इसलिए निगाहें बराबर बनाए हुए है. दो-दो किमी लंबी ट्रलियों की लाई को ज्यादा समय तक इंतजार नहीं करना पड़ता और तुलाई हो जाती है. जबकि इसी संयत्र से लगा हुआ विशान केप जिसमें हजारों बोरे अभी तक प्लेटफार्म बनाकर जमाए जा चुके है व त्रिपाल से पैक कि या जा रहा है परन्तु रेतीली जमीन होने के कारण दीमक के हमले होने से इंकार नहीं किया जा सकता जबकि दूसरे संयत्र में दीमक या अन्य किसी प्रकार से गेहूं को क्षति पहुंचने की संभावना बिल्कुल नहीं है.

Related Posts: