• मसला हथियारों का

नयी दिल्ली, 06 अप्रैल, नससे. भाजपा ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार परमाणु शक्तियों से मुकाबले के लिए जावानों को खिलौना बंदूके दे रही है. विदेशी खतरों का सामना करने की हालत में सेना की तैयारियों पर कैग की रिपोर्ट के संदर्भ में भाजपा ने शुक्रवार को सरकार पर व्यंग्य करते हुए कहा कि सेना को परमाणु शक्तियों से लडऩे के लिए द्वितीय विश्व युद्ध की पुरानी खिलौना बंदूकें दी जा रही हैं.

पार्टी प्रवक्ता तरूण विजय ने यहां दिल्ली में कहा कि कैग रिपोर्ट सरकार द्वारा सशक्त बलों की आपराधिक उपेक्षा किए जाने को दर्शाती है. परमाणु शक्ति संपन्न चीन और पाकिस्तान से मुकाबला करने के लिए सेना को द्वितीय विश्व युद्ध के जमाने की खिलौना बंदूकों जैसे हथियार दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि इस सरकार ने इस संबंध में जो किया है उससे बड़ा कोई और अपराध नहीं हो सकता है. कांग्रेस नीत संप्रग सरकार की आलोचना करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यह पहली रिपोर्ट नहीं है जिसने सेना के प्रति इस घोर लापरवाही को उजागर किया है. इससे पहले की कैग रिपोर्टे भी नौसेना की कमियों और पुराने हथियार खरीदने के मुद्दों को उठा चुकी हैं. यह भी बताया जा चुका है कि जिन तोपों को 2007 तक खरीद लेना चाहिए था उन्हें 2011 तक नहीं खरीदा गया.

भाजपा ने सरकार से मांग की कि कैग की रिपोर्टों में इन कमियों को उजागर करने पर क्या सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं, उनके बारे में देश को बताए. उसने आरोप लगाया कि  कैग द्वारा सेना के आधुनिकीकरण प्रक्रिया की कमियों को बताने और हथियारों की कमियों के बारे में थल सेना अध्यक्ष वी के सिंह द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे पत्र पर चर्चा की बजाय यह सरकार इस बात पर लोगों का ध्यान बंटा रही है कि सेना की कुछ इकाइयों ने किस तरह दिल्ली की ओर कूच किया.

विवाद के बीच सेनाध्यक्ष की वतन वापसी आज
थल सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह अपना नेपाल दौरा पूरा करके आज देश लौट रहे हैं. वो सेना की दो टुकडिय़ों के दिल्ली की तरफ बढऩे की  खबर पर हुए विवाद के दौरान नेपाल में ही थे और गुरुवार को वहीं से उन्होंने इस बारे में अपनी प्रतिक्रिया भी दी थी. मौजूदा हालात में सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि क्या जनरल वीके सिंह देश लौटने के बाद इस बारे में फिर कुछ कहेंगे.

सेनाध्यक्ष ने गुरुवार को कहा था, ये पूरी तरह से मूर्खतापूर्ण खबर है. सेनाध्यक्ष के खिलाफ ऐसी कहानियां तैयार करना दुखद है. ये दिखाता है कि कुछ लोग सरकार और सेना दोनों पर कीचड़ उछालने की गैर-जरूरी कोशिश कर रहे हैं. ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए. जनरल सिंह ने यह भी कहा कि भारतीय सेना का लोकतंत्र में पूरा भरोसा है. उन्होंने ये प्रतिक्रिया गुरुवार को नेपाल में दी थी, जहां वो एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने गए थे. इस बीच, अंग्रेजी पत्रिका द वीक में छपे जनरल वी के सिंह के एक इंटरव्यू से सवाल उठ रहे हैं कि क्या सेनाध्यक्ष को इस खबर की भनक पहले से लग गई थी?

द वीक को दिए इंटरव्यू में जनरल वीके सिंह ने कहा था, सैनिक टुकड़ी की गतिविधियों को कुछ लोग चटपटी खबर की तरह पेश कर सकते हैं. ये खबर पहले पन्ने पर छप भी जाएगी और कोई इसकी चिंता नहीं करेगा कि इसमें कितनी सच्चाई है. सेनाध्यक्ष के मताबिक, मान लीजिए हमारी कोई सेना या डिविजन या ब्रिगेड कोई अभ्यास करती है तो कोई कह सकता है कि ये लोग कुछ और ही करना चाहते थे. आप इसमें से कहानी बनाएंगे. बहुत सारे लोग हैं जो इन दिनों स्वार्थपूर्ण उद्देश्यों के साथ कहानी बनाना चाहते हैं. आप उनको कुछ भी चटपटा बताइए, ये पहले पन्ने पर छपेगा और कोई देखेगा भी नहीं कि इसमें सच है या नहीं. ऐसा हो चुका है. मुझे नहीं पता कि उनके उद्देश्य क्या हैं?

गौरतलब है कि चार अप्रैल को द इंडियन एक्सप्रेस ने यही खबर ये बताते हुए छापी थी कि 16-17 जनवरी को सेना की मूवमेंट से सरकार घबरा गई थी. इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री की तरफ से खबर का खंडन किए जाने के बाद भी च्द इंडियन एक्सप्रेसज् न सिर्फ लगातार अपनी रिपोर्ट पर अड़ा रहा, बल्कि अगले ही दिन यानी गुरुवार को उसने इसी मसले से जुड़ी एक और खबर भी छापी. पहले पन्ने पर छपी इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि उसकी चार अप्रैल की रिपोर्ट पर सरकार और सेना की तरफ से जो सफाई दी गई है, उससे सुरक्षा मामलों की स्थाई संसदीय समिति संतुष्ट नहीं है.

द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी इस खबर में शिरोमणि अकाली दल के राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल और हैदराबाद से एआईएमआईएम के लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी का नाम लेकर उन्हें सरकार की सफाई से असंतुष्ट बताया था. लेकिन इन दोनों सांसदों ने गुरुवार को ही साफ कर दिया कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री की तरफ से खबर का खंडन किए जाने के बाद इस मामले में शक की कोई गुंजाइश नहीं है.

पनाग के बयान से बवाल
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग ने बयान देकर नया बवाल खड़ा कर दिया है. उनके मुताबिक सेना की टुकड़ी के दिल्ली कूच करने का मकसद सेनाध्यक्ष वीके सिंह को हटाने की खबरों के खिलाफ प्रदर्शन हो सकता है. पनाग ने ट्विटर पर लिखा है, सेना की टुकडिय़ों के दिल्ली कूच करने का कदम शायद इसलिए उठाया गया क्योंकि उस वक्त ये आशंका थी कि अदालत का दरवाजा खटखटाने पर सेना प्रमुख को पद से हटाया जा सकता है.

मुझे लगता है इस कदम के पीछे असली मंशा की जानकारी सिर्फ तीन लेफ्टिनेंट जनरलों और जनरल स्तर के कुछ अन्य अधिकारियों को ही थी. जवानों और स्थानीय कमांडरों को भी इस अभियान के असली मकसद के बारे में भनक नहीं थी. रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग इस वक्त आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल के चंडीगढ़ बेंच के सदस्य हैं. पनाग का नाम 2008 में सुर्खियों में तब आया था, जब उन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी जांच में तत्कालीन सेना प्रमुख दीपक कपूर को निशाने पर ले लिया था. लेकिन इसके बाद उन्हें उत्तरी कमान के कमांडर पद से हटा दिया गया.

सेना-सरकार संबंध सबसे निम्न स्तर पर
सरकार को सूचित किए बिना सेना की दो इकाइयों के दिल्ली कूच करने संबंधी खबरों को बेहद चिंताजनक बताते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि इससे लगता है कि सेना और सरकार के संबंध अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुके हैं तथा ये संस्थागत हलकों में विश्वास की कमी की ओर इशारा करते हैं.

आडवाणी ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि यदि कोई चार अप्रैल की खबर और पांच अप्रैल को प्रकाशित अन्य संबद्ध खबरों को विस्तार से पढ़े तो उसे यह मानना होगा कि यह खबरें बेहद चिंताजनक हैं. उन्होंने भाजपा प्रवक्ता की इस राय से सहमति जताई कि सेना और सरकार के संबंध सर्वकालिक निचले स्तर पर हैं. आडवाणी के अनुसार, इससे यह पता चलता है कि इन दिनों संस्थागत हलकों में आपसी विश्वास की किस कदर कमी हो गई है. हालांकि आडवाणी ने इस बात पर राहत जताई कि अखबार की खबर में खुद ही इस बात का ध्यान रखा गया है कि इस समाचार का कोई गलत मतलब न निकाला जाए. आडवाणी ने लिखा है कि इस खबर को छापने का मकसद जिज्ञासा से ज्यादा और कुछ नहीं था.

भाजपा नेता ने हालांकि इस मौके पर पूर्व गृह मंत्री बूटा सिंह की आलोचना करते हुए 1989 के एक वाकये को याद किया जब चुनाव में कांग्रेस के हारने और राजीव गांधी के प्रधानमंत्री पद से बेदखल होने के बाद लोकसभा भंग किए जाने से पहले उन्होंने सेना को बुलाने का प्रयास किया था. आडवाणी ने कहा, उपराज्यपाल भंडारी इस मामले में खुद को निर्दोष बता सकते हैं, लेकिन तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री बूटा सिंह इससे इंकार नहीं कर सकते कि उन्होंने एक कपट चाल के आधार पर सेना को बुलाने की चाल की शुरुआत की थी. उपराज्यपाल की गवाही से यह साबित भी हुआ.

आडवाणी ने कहा कि उनके मित्र और पड़ोसी दिल्ली के पूर्व उप-राज्यपाल विजय कपूर ने राजीव गांधी के हारने पर सेना बुलाने की बूटा सिंह की कोशिश की घटना के बारे में उन्हें विस्तार से बताया था. कपूर उस समय दिल्ली के मुख्य सचिव थे. दिल्ली के तत्कालीन उप-राज्यपाल रोमेश भंडारी की आत्मकथा में उस घटना के उल्लेख के हवाले से आडवाणी ने कहा कि अजित सिंह और अन्य द्वारा हरियाणा तथा पश्चिम उत्तर प्रदेश से लाखों किसानों को गोलबंद करके उनके दिल्ली कूच करने और संसद एवं राष्ट्रपति भवन का घेराव करने की अफवाहों के आधार पर बूटा सिंह ने उप-राज्यपाल पर तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बनाया था. भाजपा नेता ने कहा कि राजीव के हारने पर बूटा सिंह लोकसभा भंग करने से पहले सेना को बुलाना चाहते थे और वह भी मनगढंत कहानी के आधार पर.

Related Posts: