सरकार को कोई खतरा नहीं: सोनिया

भाजपा कर रही नकारात्मक राजनीति: कांग्रेस

नई दिल्ली, 25 सितंबर. कांग्रेस ने बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई को मंजूरी देने समेत सरकार के आर्थिक सुधार के सभी नए उपायों का मंगलवार को पूरी तरह से समर्थन किया। सोनिया के आवास दस जनपथ पर आज कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई।

इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भाजपा को ‘नकारात्मक राजनीति’ करने को लेकर आड़े हाथ लिया और विपक्षी पार्टी से जिम्मेदार भूमिका निभाने को कहा। सोनिया ने सरकार को किसी तरह के खतरे की आशंका को सिरे से खारिज कर दिया। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर करीब पौने दो घंटे चली सीडब्ल्यूसी की बैठक में आर्थिक सुधारों और वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की गई। सोनिया गांधी ने शुरूआती संबोधन में कहा कि आर्थिक सुधार जरूरी कदम है और सरकार ने उस दिशा में पहल की है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मुख्य विपक्षी दल भाजपा की भूमिका नकारात्मक है और उन्हें जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभानी चाहिए जैसा पूर्व में कांग्रेस ने निभाया था। आर्थिक सुधारों के मसले पर सोनिया ने खुलकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का समर्थन किया।  कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि पार्टी सरकार के आर्थिक सुधारों के समर्थन में दिल्ली में एक बड़ी रैली आयोजित कर सकती है।

बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को विशेष तौर पर बुलाया गया था। कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि लोगों को बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई की अनुमति समेत आर्थिक सुधार के अन्य विषयों के बारे में बताने के लिए जिला स्तर पर भी रैलियों का आयोजन किया जाना चाहिए। बैठक के बाद कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ लेकिन सोनिया गांधी के संबोधन से यह पूरी तरह से स्पष्ट हो गया था कि पार्टी सरकार के आर्थिक सुधार पहल के साथ है। बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव जनार्धन द्विवेदी ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष ने कुछ इलाकों में पैदा हुई सम्प्रदायिक स्थिति पर चिंता व्यक्त की, साथ ही स्थिति के सामान्य होने पर संतोष व्यक्त किया। वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने सीडब्ल्यूसी को उन सभी स्थितियों के बारे में बताया जिसके कारण हाल ही में आर्थिक सुधार के फैसले लेने पड़े।

चिदंबरम का इशारा हाल ही में डीजल की कीमतों में वृद्धि, एलपीजी गैस सिलिंडर की राशनिंग और बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई की मंजूरी के सरकार के फैसले की ओर था। सीडब्ल्यूसी की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वित्त मंत्री पी चिदंबरम, रक्षा मंत्री एके एंटनी, कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी समेत 30 सदस्य मौजूद थे। कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यू) ने आर्थिक सुधार जारी रहने और महंगाई पर रोक लगाने की जरूरत को रेखांकित किया।  कांग्रेस कार्य समिति के सदस्यों ने महसूस किया कि सरकार के कदमों पर विपक्ष की ओर से चलाये जा रहे अभियान के बारे में लोगों को बताया जाना चाहिए और केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं द्वारा विभिन्न राज्यों में चलाए जा रहे एक सप्ताह के अभियान को आगे बढाया जाएगा।  कांग्रेस अध्यक्ष ने असम में जातीय हिंसा पर भी दुख व्यक्त किया। एक सदस्य ने केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत चलाये जा रहे कार्यों से जुड़े पोस्टर पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर होने के विषय को भी उठाया। सीडब्ल्यूसी की बैठक में सरकार की ओर से शुरू किए गए आर्थिक सुधार के कदमों के बारे लोगों के मन में उठने वाली आशंकाओं को दूर करने के लिए पहल करने की भी बात उठी क्योंकि अगले कुछ महीनों में कुछ राज्यों में चुनाव होने है और इसका प्रभाव पड़ सकता है।

कल्याण के कार्य जारी रहेंगे

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सीडब्ल्यूसी से कहा कि सरकार के किसी कार्य में कोई कमी नहीं आएगी तथा गरीबों एवं समाज के कमजोर वर्ग के लोगों के कल्याण के लिए कार्य जारी रहेंगे। आम आदमी और विकास के बारे में कांग्रेस की नीति जारी रहेगी।

ममता का खुलासा
मनमोहन एफडीआई के विरोध में थे

रीटेल में एफडीआई को लेकर सरकार से समर्थन वापस ले चुकीं तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने नया खुलासा किया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने फेसबुक पर एक चि_ी डाली जिससे पता चलता है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह खुद एफडीआई के विरोधी थे। यह चि_ी फेडरेशन ऑफ असोसिएशंस ऑफ महाराष्ट्र की है। चिट्ठी के मुताबिक फेडरेशन के लोग 2002 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिले थे। तब वह राज्यसभा में विपक्ष के नेता थे। ममता का कहना है कि ये चि_ी बताती है कि उस वक्त मनमोहन सिंह भी एफडीआई के विरोधी थे। उस समय मनमोहन सिंह कहा था, हमें ऐसे सुधार नहीं चाहिए जिनसे रोजगार के अवसर बढऩे की बजाय घटें। फेडरेशन को मनमोहन ने यह भी याद दिलाया था कि राज्यसभा में 18 और 19 दिसंबर 2002 में उन्होंने उस समय के वित्त मंत्री से आश्वासन लिया था कि एफडीआई का कोई प्रस्ताव नहीं है। गौरतलब है कि 2002 में एनडीए की सरकार थी। लेकिन जब 2004 में यूपीए की सरकार बनी तो सत्ता की कमान भी मनमोहन सिंह के हाथों में आई और फिर मनमोहन सिंह ने किराना में एफडीआई की वकालत शुरू कर दी।

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