रालेगण सिद्धी, 16  अक्टूबर. सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने आत्म शाति के लिए रविवार से अपने पैतृक गाव में एक सप्ताह का मौन व्रत शुरू किया। हजारे के करीबी सहयोगी दत्ता अवारी ने बताया कि हजारे ने आज सुबह से अपना मौन व्रत शुरू किया। वह यहा पद्मावती मंदिर के पास बरगद के पेड़ के नीचे बैठे हैं। अवारी ने बताया कि 74 वर्षीय गाधीवादी कार्यकर्ता हजारे इस दौरान एक कुटी में रहेंगे।

लोकपाल बिल पास हुआ तो कांग्रेस के साथ – अन्ना हजारे ने वादा किया है कि केंद्र सरकार अगर लोकपाल लाएगी तो वह कांग्रेस के साथ मिलकर काम करेंगे. प्रधानमंत्री की ओर से खुद को भेजे गए हालिया पत्र से उत्साहित अन्ना हजारे ने वादा किया है कि अगर संप्रग सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में मजबूत लोकपाल विधेयक पारित करेगी और दूसरे सुधार भी लागू करेगी, तो वह कांग्रेस के साथ काम करेंगे. इसके साथ-साथ उन्होंने सत्ताधारी पार्टी को चेतावनी भी दी है कि अगर शीतकालीन सत्र में विधयेक पारित नहीं हुआ तो वह उत्तर प्रदेश और दूसरे चार प्रदेशों में आने वाले विधानसभा चुनाव में हिसार की तरह कांग्रेस के खिलाफ काम करेंगे. भूषण ने कश्मीर में जनमत संग्रह की वकालत की थी। हजारे ने यह कह कर खुद को भूषण के वक्तव्य से अलग कर लिया था कि वह इससे सहमत नहीं हैं और यह भूषण की निजी राय है। हिसार लोकसभा उपचुनाव में काग्रेस के खिलाफ प्रचार करने के बाद हजारे ने कल कहा कि अगर संप्रग सरकार शीतकालीन सत्र में मजबूत लोकपाल विधेयक लाती है और चुनाव सुधार के अपने दूसरे वादों पर कायम रहती है, तो वह देश भर में काग्रेस के साथ काम करेंगे।

साथ ही उन्होंने काग्रेस को चेतावनी भी दी कि अगर शीतकालीन सत्र में मजबूत लोकपाल विधेयक नहीं आता तो वह उत्तर प्रदेश और दूसरे चार प्रदेशों में विधानसभा चुनावों में हिसार की तरह काग्रेस के खिलाफ काम करेंगे। अपने मौन व्रत के पहले एक टीवी साक्षात्कार में गाधीवादी कार्यकर्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हालिया पत्र के बाद उन्हें लग रहा है कि सरकार एक मजबूत लोकपाल लेकर आएगी। उन्होंने हजारे पक्ष के काग्रेस विरोधी होने के दावे को भी खारिज करते हुए इस बात से भी इंकार कर दिया कि हजारे पक्ष ने हिसार में भाजपा और संघ के कहने पर कांग्रेस का विरोध किया। हजारे ने कहा था कि मैंने संघ प्रमुख मोहन भागवत को सिर्फ टीवी पर देखा है। मैं कभी ना तो उनसे मिला हूं और ना ही उनसे बात की है। ये सभी सिर्फ आरोप हैं। राजनीति में राजनीतिक दल कुछ भी करने के लिए तैयार रहते हैं।

काग्रेस, भाजपा और संघ मिल कर अन्ना को बदनाम कर रहे हैं। मेरा संघ या भाजपा से कोई लेना-देना नहीं है। गौरतलब है कि दिल्ली में 13 दिन तक अनशन कर सरकार को झुकाने में कामयाब रहे अन्ना हजारे अब अपने ही सहयोगियों के बड़बोलेपन से त्रस्त होकर मौनव्रत करने जा रहे हैं। उन्होंने हालाकि इसे अपने स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जा रहा मौनव्रत बताया है। पिछले एक सप्ताह से अपने सहयोगियों पर हो रहे हमलों के बीच अन्ना ने शनिवार को अचानक मौनव्रत की घोषणा कर सबको चौंका दिया। वह इससे पहले भी मौनव्रत करते रहे हैं। लेकिन, कई चुनावी राज्यों के दौरों की घोषणा के बाद अचानक मौनव्रत का निर्णय चौंकानेवाला है। अन्ना के अनुसार वह रविवार से अनिश्चितकालीन मौनव्रत शुरू करेंगे। इस दौरान वह रालेगण सिद्धि के पद्मावती देवी मंदिर परिसर स्थित एक विशाल वटवृक्ष की लटकती जटाओं की बीच बनी विशेष कुटिया में बैठेंगे। मौनव्रत के दौरान वह अपने गाव से बाहर नहीं जाएंगे। यानी, पूर्व घोषित उनके सारे दौरे रद हो जाएंगे।

  •  सरकार समझती है मौन की भाषा

अन्ना ने मौनव्रत की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार मौन की भाषा ही समझती है, इसलिए वह मौन धारण करने जा रहे हैं। लेकिन, समझा जा रहा है कि इस मौनव्रत का उनके भ्रष्टाचार विरोधी आदोलन से कोई लेना-देना नहीं है। सहयोगियों के बड़बोलेपन से तंग आकर ही उन्हें इसके लिए मजबूर होना पड़ा है। पिछले कुछ दिनों के दौरान अन्ना के कई सहयोगी गलत वजहों से चर्चा में रहे। कुछ दिन पहले रालेगण सिद्धि में ही अन्ना के निकट सहयोगी सुरेश पठारे के दुव्र्यवहार के चलते बाहर से आए लोगों के साथ उनकी मारपीट हुई। कश्मीर पर विवादास्पद बयान देने के कारण प्रशांत भूषण की दिल्ली में पिटाई कर दी गई। इसके बाद संतोष हेगड़ ने टीम के ही साथी अरविंद केजरीवाल परज् यादा बोलने को लेकर टिप्पणी की। इस सबसे अन्ना खिन्न नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि इस मौनव्रत से अन्ना अपने सहयोगियों को संदेश देंगे। साथ ही मीडिया द्वारा सहयोगियों के बारे में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देने से भी बच सकेंगे।

  •  विवादों से बच रहे अन्ना

हालांकि सूत्रों के अनुसार आरएसएस के नेता मनमोहन वैद्य  का कहना है कि विवादों से बचने के लिए अन्ना हजारे ने चुप्पी साध ली है। उन्होंने दावा किया कि अन्ना के आंदोलन में आरएसएस के स्वयंसेवक शामिल थे।  आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. वैद्य ने कहा, अन्ना आंदोलन को राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का पूरा सहयोग मिला लेकिन अन्ना विवाद से बचने के लिए इंकार कर रहे हैं। आंदोलन के हिस्से के तौर पर संघ के नहीं होने संबंधी हजारे के दावे को झूठा बताते हुए वैद्य ने कहा, ”साधारण आरएसएस कार्यकर्ता सैकड़ों हजारों की तादाद में रामलीला मैदान और देश भर में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में मौजूद रहे।

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने उत्तर प्रदेश की यात्रा टालने के लिए अन्ना पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर किसी राय में भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध करने की सबसे ज़्यादा जरूरत है तो वह उत्तर प्रदेश है। गौरतलब है कि अन्ना ने काफी पहले ऐलान किया था कि वह 15 अक्टूबर से उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे। लेकिन अब उनके बजाय उनकी टीम 17 से 22 अक्टूबर तक राय के दौरे पर रहेगी।

  •  कई बार मौन व्रत धारण कर चुके हैं अन्ना

अन्ना हजारे के निजी सचिव सुरेश पठारे के  मुताबिक अन्ना ने अपने जीवन में करीब 12 बार मौन व्रत रखा है। शिवसेना-बीजेपी की सरकार द्वारा जेल भेजे जाने पर अन्ना ने पहली बार मौन व्रत रखा था। पठारे ने बताया कि जब भी उन्हें गहन चिंतन करना होता है, वह मौन व्रत पर चले जाते हैं। इस दौरान यदि उन्हें कोई बात कहनी होती है तो लिखकर कहते हैं।  उन्होंने बताया कि मौन व्रत के दौरान वह गांव में ही रहेंगे।

  •  टीम अन्ना में गहराए मतभेद

मौन व्रत पर जाने से ठीक पहले अन्ना ने जहां यह साफ संकेत दे दिया कश्मीर पर प्रशांत भूषण के बयान को वह अब भी पचा नहीं पा रहे और भूषण को टीम में बनाए रखने का फैसला अभी तक नहीं हुआ है। उन्होंने अपनी टीम के एक अन्य अहम सदस्य केजरीवाल के उस बयान पर भी नाराजगी जताई जिसमें अन्ना को संसद से ऊपर बताया गया था। अन्ना ने यह भी कह दिया कि अगर कांग्रेस जनलोकपाल बिल और दूसरे मसलों पर अपने वादे पूरे कर देती है तो वह कांग्रेस के पक्ष में देश भर में प्रचार कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने दोहराया कि अगर कांग्रेस शीतकालीन सत्र में जनलोकपाल बिल पास नहीं करवाती है तो वह कांग्रेस के खिलाफ प्रचार करेंगे।

अहसान फरामोशी कर रहे अन्ना : दिग्विजय

नई दिल्ली.  अन्ना हजारे के  अनिश्चितकालीन मौन व्रत के बीच कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे पर वार करते हुए कहा है कि अन्ना राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से अहसान फरामोशी तो नहीं कर रहे है। यह बात दिग्विजय सिंह ने अन्ना हजारे की चिट्ठी का जवाब देते हुए कही।  एक तरफ तो अन्ना आरएसएस का सहयोग ले रहें हैं और दूसरी इंकार भी कर रहे हैं कि हमारा आरएसएस से कोई संबंध नहीं है।

  •  फिर अन्ना आएसएस से परहेज क्यों कर रहे है।

उन्होंने ने कहा यह बहुत आश्चर्य करने वाली बात है। गौरतलब है कि अन्ना हजारे ने गुरूवार को दिग्विजय सिंह को लिखे पत्र में कहा था कि आपने मुझे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा से जोड़ने की कोशिश की। लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने बीच विवाद दिखाते हुए देश के लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं।

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