एक युवक हरविंदर सिंह ने केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शरद पवार पर यह कहते हुए हमला कर दिया कि वह महंगाई व भ्रष्टाचार से परेशान हो चुका है. वह इतना उत्तेेजित था कि कृपाण निकालकर चिल्लाया कि सब चोर हैं- वह सबको चीर देगा. इसी व्यक्ति ने कुछ दिन पूर्व ही दिल्ली की अदालत से सजा पाकर बाहर आते समय पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री सुखराम पर हमला कर दिया था. यह व्यक्ति पिछले 8 सालों से अवसाद और अत्याधिक क्रोध के नियंत्रण के लिए दवाई ले रहा है. इसका कृत्य सिर्फ व्यक्तिगत आक्रोश है. इसे सामाजिक या राजनैतिक परिस्थितियों का प्रतीक नहीं माना जा सकता.

इराक युद्ध और सद्दाम को फांसी की वजह से एक व्यक्ति ने बगदाद में अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश पर जूते फेंके थे. वह इराक का प्रतीक नहीं था. हालांकि इराक के अलावा सभी अरब राष्ट्रों के लोग उस हमले व फांसी के लिए अमेरिका से क्रोधित थे. आज महंगाई व भ्रष्टाचार से सभी परेशान हैं. उन पर अन्ना हजारे का अनशन व चलता जा रहा आंदोलन बहुत ही कारगर साबित हो रहा है. उस दिशा में न सिर्फ संसद, सरकार बल्कि पूरा देश जाग्रत हुआ. लेकिन यदि अन्ना ने भी व्यक्तिगत हमले जैसे कोई कार्यवाही की होती तो वह भी क्षणिक आवेश की मामूली सी घटना के रूप में वहीं खत्म हो जाता. श्रीलंका में प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर गार्ड ऑफ ऑनर की रस्म के समय एक नौसैनिक ने राइफल की बट से हमला कर दिया था. मध्यप्रदेश के कटनी नगर में भाजपा नेता श्री आडवानी पर एक व्यक्ति ने चप्पल फेंकी थी. ऐसे व्यक्ति कुछ ऐसा करके स्वयं के लिए ख्याति प्राप्त करना चाहते हैं. जो कुछ ही दिन खबर और चर्चा बनकर लुप्त हो जाती है लेकिन कभी-कभी ऐसा व्यक्तिगत आक्रोश देश या विश्व की बड़ी त्रासदी बन जाता है. गांधी जी की हत्या एक व्यक्तिगत दुष्कृत्य था लेकिन उस वेदना को राष्टï्र और विश्व आज तक महसूस करता है. ऐसे ही व्यक्तिगत दुष्कृत्य में अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन, जान कैनेडी, श्रीलंका के प्रधानमंत्री श्री एस. डब्ल्यू.आर.डी. भंडारनायके, म्यनमार के राष्ट्रपिता आन सांग आदि महान व्यक्ति मार दिये गए.

यह कैसे माना जाए कि श्री पवार पर हमला करने वाला अन्ना हजारे या यशवंत सिन्हा से प्रेरित था. जो अन्ना से प्रेरित है वो अप्रैल में जंतर मंतर अनशन से अन्ना के साथ हैं. इन दिनों जब हर आंदोलन प्रदर्शन हिंसक हो ही जाता है- अन्ना का अनशन आंदोलन, कानून व संविधान की मर्यादा में रहा और वह सार्वजनिक व राजनैतिक रूप से सफल रहा. हरविंदर भारतीय जनता पार्टी का सदस्य नहीं है. बल्कि अवसाद और क्रोध का मरीज है. यह सच है कि श्री पवार के हर बयान से मूल्य वृद्धि हो जाती है. उनके बयानों में शक्कर मिल मालिकों और सट्टi बाजार को बढ़ावा साफ नजर आता है. लेकिन हमारी जो संवैधानिक शासन व्यवस्था है उसमें महंगाई के लिये प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनकी पूरी सरकार जिम्मेवार है. यहां कोई राजा-नवाब की तरह व्यक्तिगत शासक व उसका शासन नहीं है. हमारी संवैधानिक व्यवस्थाओं में अभिव्यक्ति और प्रतिकार के इतने अधिकार व प्रावधान है कि उनसे ही हम अपने आपको और पूरे देश को स्वतंत्र महसूस करते हैं. 1977 में आपातकाल के बाद के तत्कालीन पार्टी के शासन को उखाड़ फेंका. उसके बाद जनता पार्टी भी जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप नहीं साबित हुई तो उसे भी 30 महीनों में उखाड़ दिया. ऐसे माहौल में थप्पड़ और चप्पल जैसे घटनाएं बिलकुल बेमानी और किसी व्यक्ति का सिरफिरापन है. उससे अभी तक किसी को भी कुछ हासिल नहीं हुआ और न ही उन लोगों की कोई ख्याति बनी हुई है. सार्वजनिक व राजनैतिक जीवन गंभीर और बौद्धिक आचरणों का होता है. हरविन्दर के पागलपन से महंगाई और भ्रष्टाचारपर क्या असर पडऩे वाला है?

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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