अहमदाबाद. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर पडऩे और व्यापक घरेलू अर्थव्यवस्था संबंधी मुश्किलों के बीच शेयर बाजारों में जेवरात कंपनियों के शेयरों की चमक फीकी पड़ती नजर आ रही है। पिछले साल दीवाली के बाद से 6 महीनों का रुझान दर्शाता है कि जेवरात कंपनियों के शेयर भाव में 4 फीसदी से लेकर 48 फीसदी तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है।

पिछले साल 25 अक्टूबर से लेकर अब तक बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में गीतांजलि जेम्स लिमिटेड, राजेश एक्सपोट्र्स लिमिटेड और श्री गणेश ज्वैलरी हाउस लिमिटेड समेत कुछ प्रमुख जेवरात कंपनियों के शेयर भाव में भारी गिरावट आई है। इक्विटी विश्लेषकों के मुताबिक रुपये की कमजोरी, ब्रांडेड जेवरात पर उत्पाद शुल्क के मामले में सरकारी नीति से संबंधित अनिश्चितता और घरेलू बाजार में लगातार उच्च मुद्रास्फीति की वजह देश में जेवरात की खपत पर विपरीत असर हुआ है। जाहिर है, इसका नकारात्मक प्रभाव जेवरात बनाने वाली कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन पर भी पड़ा।

बीएसई में आज गीतांजलि जेम्स के शेयर की खरीद-फरोख्त 332.55 रुपये के स्तर पर बंद हुई, जो 25 अक्टूबर, 2011 के भाव से 10.17 फीसदी कम है। इसी तरह रेनेसा ज्वैलरी लिमिटेड का शेयर 83.55 रुपये के स्तर पर बंद हुआ, जिसमें समान अवधि में 14.74 फीसदी गिरावट दर्ज की गई। कोलकाता की जेवरात निर्माता एवं निर्यातक कंपनी श्री गणेश ज्वैलरी हाउस लिमिटेड के शेयर भाव में तो दीवाली से लेकर अब तक 48 फीसदी से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई और यह 78.85 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। सु-राज डायमंड्स ऐंड ज्वैलरी लिमिटेड के शेयर की खरीद-फरोख्त तकरीबन 1 फीसदी गिरावट के साथ 44.80 रुपये के स्तर पर बंद हुई।

राजेश एक्सपोट्र्स लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राजेश मेहता ने कहा, पिछले 6 महीनों के दौरान सोने की ऊंची कीमत के चलते इसके जेवरात का कारोबार कम हुआ। मेहता ने आगे कहा, ‘लेकिन राजेश एक्सपोट्र्स के मामले में ऐसा नहीं है क्योंकि हमने खुदरा कारोबार पर ध्यान केंद्रित करके परिचालन में स्थिरता बनाए रखी है। तिमाही-दर-तिमाही आधार पर हमारा राजस्व 30-35 फीसदी बढ़ा है और हमें उम्मीद है कि अगले पांच साल तक यही स्थिति रहेगी। बीएसई में आज राजेश एक्सपोट्र्स लिमिटेड का शेयर भाव 2.36 फीसदी गिरकर 133.40 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। 25 अक्टूबर, 2011 से लेकर अब तक इस शेयर में 9.3 फीसदी गिरावट आई है। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष (इक्विटीज) रिकेश पारीख ने कहा, ‘कुछ व्यापक आर्थिक घटकों की वजह से हाल के महीनों के दौरान घरेलू बाजार में जेवरात की खपत कम हुई है। जेवरात की मांग की तुलना में निवेश के साधन के तौर पर सोने की मांग ज्यादा बढ़ी है। हो सकता है कि जेवरात बनाने वाली कंपनियों के लिए इस वजह से मुश्किलें खड़ी हुईं हों और इसीलिए उनके शेयरों के मूल्यांकन पर विपरीत असर हुआ।

पारीख के मुताबिक देश के कुल आयात में सोना आयात की हिस्सेदारी कम करने के उपाय के तहत करों में की गई बढ़ोतरी जेवर बनाने वाली कंपनियों का उत्साह ठंडा करने वाला कदम साबित होगा। इस उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-फरवरी 2011-12 के दौरान देश में कुल 54.5 अरब डॉलर मूल्य के सोने का आयात हुआ, जो हाल के वर्षों में सर्वाधिक है। वित्त वर्ष 2007-08 के दौरान देश में 15 अरब डॉलर के सोने का आयात किया गया था, जो वित्त वर्ष 2008-09 में बढ़कर 22 अरब डॉलर हो गया। वित्त वर्ष 2009-10 में 30 अरब डॉलर के सोने का आयात हुआ था और वित्त वर्ष 2010-11 के दौरान लगभग 33 अरब डॉलर का सोना आयात किया गया था।

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