आय से अधिक संपत्ति का मामला

नई दिल्ली, 6 जुलाई. नससे. उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती को आय से अधिक संपत्ति मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दे दी।

यूपी में सत्ता से बेदखल होने के बाद माया के लिए यह फैसला काफी अहम था। उन पर आय से अधिक संपत्ति मामले में 1995 में सीबीआई ने जांच शुरू की थी। जिसके बाद उन पर सितंबर 2003 में आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। माया ने अदालत का रुख किया था और कहा था कि सीबीआई राजनीतिक ताकतों के इशारे पर उनके खिलाफ यह जांच कर रही है। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की जरूरत नहीं थी। कोर्ट ने माया के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद कर दिया। सीबीआई ने कहा था कि उसके पास मायावती के खिलाफ पुख्ता सुबूत हैं। इस केस के दौरान सीबीआई बार-बार यह तर्क देती रही है कि 2003 में मायावती के पास एक करोड़ रुपये की कुल संपत्ति थी, जो 2007 में 50 करोड़ रुपये में तब्दील हो गई। सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर और जांच के खिलाफ माया ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी.

जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था, जो शुक्रवार को सुनाया गया। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट के द्वारा यह कभी नहीं कहा गया था कि माया के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो। मायावती ने अर्जी में सफाई देते हुए कहा था कि उनके पास आय के ज्ञात स्त्रोत से अधिक संपत्ति नहीं है और जो है वह कार्यकताओं के पैसे और चंदे से जोड़ी गई है। कोर्ट के फैसले के बाद मायावती को सीबीआई के शिकंजे से फौरी तौर पर मुक्ति मिल गई है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले सीबीआई ने जो दलील दी है, वह गैरवाजिब है। सीबीआई ने उसके पूर्व निर्देश को समझने में गलती की।

बसपा ने कहा, मिला न्याय -फैसले के तुरंत बाद बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि आखिरकार नौ साल बाद न्याय मिल ही गया। उन्होंने कहा कि सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर गैरकानूनी थी। यह बीजेपी सरकार के दबाव में दर्ज की गई थी। दो घंटे बाद मायावती ने प्रेस से मुखातिब हो कहा कि वह इस फैसले का स्वागत करती हैं और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देती हैं। उन्होंने सतीश मिश्रा को भी धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने इस मामले में सटीक पैरवी की। मायावती ने इसे बसपा की जीत बताते हुए कहा कि बसपा कार्यकर्ताओं ने बड़े धैर्य के साथ इस दिन का इंतजार किया और अंत में हमारी जीत हुई।

क्या था मामला :

सीबीआई ने 1995 से लेकर 2003 कर मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में जांच कर एफआईआर दर्ज की थी। सितंबर, 2003 को सुको ने ताज कॉरिडोर मामले में माया के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे, जिसके बाद 18 सितंबर 2003 को सीबीआई ने मायावती के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज कर दी थीं।

एक ताज कॉरिडोर प्रोजेक्ट में अनियमितता से जुड़ी थी और दूसरी आय से अधिक संपत्ति मामले से। माया ने आय से अधिक संपत्ति मामले में चार्ज शीट के खिलाफ 2008 में सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी। बसपा सुप्रीमो ने यह गुजारिश भी की थी कि सुप्रीम कोर्ट सीबीआई को निर्देश दे कि वह आयकर विभाग ट्राइब्यूनल की ओर से संपत्ति को जायज ठहराने संबंधी आदेश पर गौर करे, जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था।

क्या कहना था सीबीआई का :

सीबीआई का कहना था कि बसपा सुप्रीमो की नगद राशि, चल व अचल संपत्तियों और उपहारों के बारे में एजेंसी ने भरोसेमंद, पुख्ता, मौखिक, दस्तावेजी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए हैं। उपहारों के बारे में सीबीआई के दलीलें भरोसेमंद और स्वीकार करने योग्य साक्ष्यों पर आधारित हैं। सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि आयकर अथारिटी के निष्कर्ष के आधार पर उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला बंद नहीं किया जा सकता। मायावती के खिलाफ जाच पुख्ता सुबूतों पर आधारित है जिसमें धारा 164 के बयान और दस्तावेजी सुबूत शामिल है। पुख्ता परिस्थितिजन्य साक्ष्य हैं, जिनसे मायावती और उनके परिजनों की संपत्ति में आपराधिक साठगाठ साबित होती है।

2008 में दाखिल किया था हलफनामा :

वर्ष 2008 में मायावती ने एक नया हलफनामा दाखिल किया था, जिसमें आयकर आयुक्त के गत 27 मई, 30 मई एवं 31 मई के आदेश को आधार बनाया गया है जिसमें उन्हें अभियोजन से छूट दी गई थी, सीबीआइ ने इसी हलफनामे का जवाब दाखिल किया था। सीबीआइ ने जवाबी हलफनामे में कहा था कि आयकर विभाग के आदेशों से इस मामले की जाच पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

भाजपा बैकफुट पर
बसपा द्वारा आरोप लगाने के बाद कि भाजपा शासित काल में सीबीआई का दुरूपयोग किया गया था और जानबूझकर मायावती को फंसाया गया. जवाब में भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि ऐसा नहीं है. भाजपा ने कभी भी सीबीआई का बेजा इस्तेमाल नहीं किया है. पार्टी प्रवक्ता तरूण विजय ने कहा कि सरकार अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए सीबीआई को बेजा इस्तेमाल कर रही है.

सरकार ने पल्ला झाड़ा
विधि मंत्री सलमान खुर्शीद ने आज कहा कि मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले को रद्द किए जाने का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है.

खुर्शीद ने कहा राजनीति से इसका संबंध जोडऩा सही नहीं है. हम सभी को उच्चतम न्यायालय का सम्मान करना चाहिए. यह कहना बेहद गलत है कि इसका देश की राजनीति से कोई लेना देना है. उच्चतम न्यायालय हमारे देश का एक स्वायत्त स्वतंत्र और बेहद सम्मानीय संस्थान है. यह एक संवैधानिक संस्थान है और उच्चतम न्यायालय अपने विवेक के अनुसार फैसले करता है. उन्होंने कहा कि आदेश को देश में किसी प्रकार के राजनीतिक घटनाक्रम से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. उन्होंने कहा मैं समझता हूं कि इसे किसी मकसद से या किसी अन्य संबंध में या देश के किसी अन्य घटनाक्रम से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा. कृपया उच्चतम न्यायालय का सम्मान करें.

Related Posts: