संत शिवकुमार के 105वें जन्मोत्सव में भाग लेंगी

तुमूर, 28 अप्रैल. कर्नाटक में फिर से अपना जनाधार मजबूत करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी शनिवार को दो दिवसीय राज्य के दौरे पर हैं. वह आज सिद्धगंगा मठ जाएंगी और यहां लिंगायत समुदाय के सबसे बड़े संत शिवकुमार के 105वें जन्मोत्सव में भाग लेंगी.

मालूम हो कि राज्य में लिंगायत समुदाय की 14 प्रतिशत आबादी है और वह यहां सत्ता समीकरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं. इस कार्यक्रम में राज्य के सभी बड़े नेता जुटने वाले हैं. सबसे खास बात यह है कि कार्यक्रम में भ्रष्टाचार का आरोप झेलने वाले कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा नेता येद्दयुरप्पा भी शामिल होने वाले हैं जो लिंगायत समुदाय से हैं. वर्ष 1990 में कांग्रेस ने कर्नाटक के तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री विरेंद्र पाटिल को हटाकर सत्ता पर दूसरे मुख्यमंत्री को बैठा दिया था. कांग्रेस के इस फैसले से लिंगायत समुदाय भड़क गया जिसका खामियाजा कांग्रेस को आज तक भुगतना पड़ रहा है.

वर्ष 2004 में कांग्रेस कर्नाटक की सत्ता से बाहर हुई थी, तभी से यहां कांग्रेस लगातार सत्ता में आने के लिए कोशिशें कर रही है. इसी कोशिश को सफल बनाने के लिए सोनिया गांधी कर्नाटक की यात्रा पर हैं. यहां पर कांग्रेस की हार की वजह से लिंगायत समुदाय का कांग्रेस से जुदा होना था. शनिवार को सोनिया इस समुदाय के सबसे बड़े संत शिवकुमार के105 वें जन्म उत्सव पर उनसे मुलाकात करेंगी. ऐसा भी माना जाता है कि संत शिवकुमार के आशीर्वाद के बाद ही येदियुरप्पा कर्नाटक की सत्ता पर काबिज हुए थे. अब सोनिया का संत के दरबार में हाजिरी देना कर्नाटक की सत्ता के करीब पहुंचने की जुगत का ही एक हिस्सा माना जा रहा है.

कर्नाटक यात्रा के दौरान सोनिया यहां सूखा पीडि़त क्षेत्रों में जाकर लोगों से मुलाकात करेंगी. इन सभी के पीछे कर्नाटक में कांग्रेस की बिगड़ी हालत को सुधारना माना जा रहा है. यह सारी जुगत लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की नैया को पार लगाने के लिए भी की जा रही है. भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा की असली ताकत यह लिंगायत समाज ही रहा है. इसमें इस मठ की हनक है. मठ के एक बार कहने पर ही यहां पर सत्ता में बड़ा परिवर्तन हो जाता है. ऐसे में लिंगायत समुदाय का किसी पार्टी के साथ होना उसकी जीत को तय करता है. कांग्रेस की पूरी कोशिश है कि इस बार यह समुदाय उनके खेमे से जुड़े जिससे कांग्रेस दोबारा कर्नाटक और देश की सत्ता पर दोबारा काबिज हो सके. सिद्धगंगा मठ में संत शिवकुमार की देखरेख में हजारों बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं. यहां पर किसी धर्म से कोई भेदभाव नहीं किया जाता है. इसके चलते कर्नाटक में इस मठ के प्रति सभी की आस्था है.

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