चेन्नई, 14 अप्रैल. तमिलनाडु सरकार ने  कहा कि उत्पाद एवं सेवा कर भले ही अप्रैल 2010 से लागू न हो सका पर राज्यों को केंद्रीय बिक्री कर में कमी करने से हुए नुकसान की भरपाई बंद नहीं होनी चाहिए।

तमिलनाडु ने कहा है कि सीएसटी को चरणबद्ध तरीके से कम करते हुए खत्म करने की प्रक्रिया में उसे राजस्व का ‘भारी नुकसान हो रहा है जो स्थायी प्रकृति का नुकसान है।’ मुख्यमंत्री जयललिता ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा है। उन्होंने लिखा है, सहमति बना कर और उचित प्रणाली के जरिए जीएसटी पेश करने की जिम्मेदारी भारत सरकार की है इसलिए यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि जीएसटी पेश न होने की विफलता का नुकसान राज्य सरकारें झेलें। 1 अप्रैल 2010 से जीएसटी न लागू होने को सीएसटी संबंधी मुआवजा रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता। भारत सरकार को जीएसटी पेश होने तक मुआवजा देना होगा क्योंकि राज्यों को राजस्व का नुकसान हो रहा है।  चालू वित्त वर्ष के केंद्रीय बजट में सीएसटी के एवज में राज्यों को मुआवजे के भुगतान के लिए मात्र 300 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. जबकि राज्यों ने 2010-11 के लिए 19,060 करोड़ रुपए की मांग की थी जबकि उन्हें 6,393 करोड़ रुपए का ही भुगतान हुआ है।

सीएसटी की वसूली केंद्र सरकार करती है और उसे राज्यों को देती है। केंद्र और राज्यों ने वैट तथा जीएसटी को लागू करने के लिए सीएसटी को 31 मार्च 2010 तक चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने पर सहमति जताई थी और इसी आधार पर 1 अप्रैल 2007 को सीएसटी की दर 4 प्रतिशत से घटा कर 3 प्रतिशत कर दी गयी थी। जून 2008 से यह दर दो प्रतिशत कर दी गयी पर उसके बाद इसमें कमी नहीं की जा सकी। हाल में केंद्रीय वित्त सचिव आरएस गुजराल ने कहा था कि केंद्र सीएसटी के एवज में लगातार मुआवजा नहीं दे सकता क्योंकि केवल 3 साल तक मुआवजा देने की योजना थी। नाराज राज्य सरकारों का कहना है कि ऐसे में सीएसटी को फिर 4 प्रतिशत कर दिया जाना चाहिए। केंद्र ने अब 1 अप्रैल 2013 से जीएसटी लागू करने का मंसूबा बना रखा है और इसके लिए विशेष सूचना प्रौद्योगिकी नेटवर्क परिचालक कंपनी की स्थापना का प्रस्ताव हाल में मंजूर किया गया है।

Related Posts: