अंतराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर शहर में हुए विविध आयोजन

भोपाल, 18 मई. अंतराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. जिसके अंतर्गत प्रात: 8.30बजे संग्रहालय के निदेषक प्रो. के.के मिश्रा ने पार्किंग स्थल से खजाने की खोजखजाने की खोजखजाने की खोजखजाने की खोज प्रतियोगिताके लगभग 60 प्रतिभागियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.इस प्रतियोगिता का उ?देष्यप्रतिभागियों को कुछ प्रष्नो के उत्तर देते हुए शहर के विभिन्न संग्रहालय से अवगत करानाथा.

प्रात: 10.30 बजे शैलकला भवन में प्रो. शंखो चौधरी के निजी संग्रह पर आधारितप्रदर्षनी स्मृतिस्मृतिस्मृतिस्मृति का उ?घाटन  संजीव मित्तल, संयुक्त सचिव संस्कृति मंत्रालय भारत सरकारएवं उपाध्यक्ष राष्ट्रीय मानव संग्रहालय समिति द्वारा किया गया. यह विषेष प्रदर्षनी स्मृति देषके प्रख्यात मूर्तिकार स्व. प्रो. शंखो चौधरी एवं उनकी पत्नि ईरा चौधरी द्वारा संकलितएथनोग्राफिक वस्तुओं पर केन्द्रित है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर प्रो.शंखो चौधरी की स्मृति में जन-सामान्य के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है.

इस प्रदर्षनी मेंलगभग 200 प्रादर्ष शामिल है, जिनमें साधारण घरेलू उपकरणों से लेकर लकड़ी, बांस, तांबेचमड़े एव धातु से निर्मित कलात्मक वस्तुऐं सम्मिलित है.इसके पश्चात संग्रहालय के आवृत्ति भवन में आईकोम द्वारा घोषित इस वर्ष की विषयबदलते परिवेष में संग्रहालय नई चुनौतियाँ, नई आकांक्षाएँ पर परिचर्चा का आयोजन कियागया. जिसमें नेषनल म्यूज्यिम इंस्टिटूयट, नई दिल्ली से प्रो. अनूपा पाण्डे, ने संग्रहालयो कीभूमिका एवं महत्ता पर प्रकाष डालते हुऐ कहा कि बदलते परिवेष के साथ-साथ संग्रहालयोंतथा संग्रहालय के प्रादर्षो एवं संकलन के रख रखाव में भी कई परिवर्तन देखे जा रहे है.नवीन सूचना तंत्रो एवं उत्कृष्ट तकनीक का उपयोग करके संग्रहालयों को विष्व स्तर परग्लोबलाइज कर दिया है, जो दर्षको का संग्रहालय के प्रति अधिक रूझान बढ़ाते है. इसअवसर पर अलीगढ़ मुस्लिम विष्वविद्यालय, अलीगढ़ से प्रो. साईद नकवी ने भारत में स्थितसंग्रहालयो का उदाहरण देते हुऐ संग्रहालय का वर्तमान परिवेष तथा आने वालीचुनौतियां एवं उनके समाधान पर विस्तार से विवरण प्रस्तुत किया.

इस परिचर्चा की अध्यक्षता कर रहे  संजीव मित्तल ने अपने अध्यक्षीय व्यक्तव्य मेंकहा कि अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस एक ऐसा महत्वपूर्ण अवसर है जहाँ संग्रहालय विददर्षको से सम्प्रेषण कर उनके विचार जान सकते है. भारत सरकार संग्रहालय के हित में सहयोगात्मक कार्यक्रमों का संचालन कर रही है जिसमें ब्रिटिष म्यूज्यिम एवं शिकागो के’आर्ट म्यूज्यिम’ के साथ सहयोगात्मक कार्यक्रम शामिल है. इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानवसंग्रहालय अपने-आप में एक अनूठा संग्रहालय है. जिसने अपनी गतिविधियों एवं प्रस्तुतीकरणसे विष्व स्तर पर पहचान बनाई है.इस अवसर पर संग्रहालय के निदेषक, प्रो. के.के मिश्रा ने अपने स्वागत उ?बोधन मेंवक्ताओं का परिचय दिया तथा संग्रहालय के संयुक्त निदेषक श्री ऐ.के श्रीवास्तव ने अंत मेंधन्यवाद ज्ञापन दिया.एस. ओ एवं बालाग्राम से आये विषेषरूप से सक्षम बच्चों को संग्रहालय की विभिन्नमुक्ताकाष एवं अंतरंग प्रदर्षनियों का भ्रमण कराया गया. इसके साथ ही स्कूली बच्चो के लियेमानव संग्रहालयमानव संग्रहालयमानव संग्रहालयमानव संग्रहालय विषय पर एक प्रषनोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमेंभारतीय संस्कृति, सामान्य ज्ञान इतिहास मानव विज्ञान एवं खेलों से संबंधित प्रष्न पूछे.

स्कूलीबच्चों ने उत्साह पूर्वक इन प्रष्नो के उत्तर दिये इस प्रतियोगिता में कक्षा 7 से 12 वी तक केलगभग 35 स्कूली बच्चों ने भाग लिया. इस प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार 1000/- रू. नगदकुमारी नीतू नेवारे कक्षा 12 वी सेंटपाल को-एड स्कूल, द्वितीय पुरस्कार 700/- रू. कुमारीमंजू पांडे कक्षा 9 वी क्वीन मेरी हा.से. स्कूल, तृतीय पुरस्कार 500/- श्री ललित मेहरा कक्षा7 वी हरमन माइनर स्कूल एवं सांत्वना पुरस्कार आनंद साहू, कल्पना थापा, अंचल थापा एवंअषंदेव, प्रत्येक को 200/- नगद प्रदान किए गये. इस कार्यक्रम के संयोजक श्री डी. के.चौधरी थे.इस कार्यक्रम में स्व. प्रो. शंखो चौधरी की पत्नि, संग्रहालय के निदेषक, संयुक्त निदेषक,एवं अधिकारियों कर्मचारियों सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे.सांय 7 बजे चैरेवती मुक्ताकाष मंच पर केसरिया बालम ग्रुप इन्दौर द्वारा राजस्थानीलोक नृत्य प्रस्तुत कर दर्षकों को मन्त्र मुग्ध कर दिया कार्यक्रम का आरंभ गणेष वन्दना सेहुआ. इस के पश्चात केकेकेकेसरिया बालम पधारो म्हारे देषरिया बालम पधारो म्हारे देषरिया बालम पधारो म्हारे देषरिया बालम पधारो म्हारे देष, नामक स्वागत गीत गाया तदोउपरान्तघूमर नृत्य प्रस्तुत कर दर्षकों की खूब तालियां बटोरी.इसके पश्चात राजस्थान का विष्व प्रसिद्ध कालवेलिया नृत्य प्रस्तुत कर दर्षकों को झूमनेपर मजबूर कर दिया. इसके अतरिक्त चिरमी नृत्य, मयूर नृत्य, होली नृत्य, भवई नृत्य,मालवा का कान ग्वालिया एवं संजा नृत्य प्रस्तुत कर दर्षकों का भरपूर मनोरन्जन किया.

Related Posts: