भोपाल, 1 अक्टूबर. भोपाल के युवा विधायक विश्वास सारंग ने बताया कि उनकी पूज्य माता जी स्व. प्रसून सारंग की स्मृति में देश की प्रसिद्घ संत साध्वी मां कनकेश्वरी देवी के मुखारबिंद से श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन 15 अक्टूबर से भोपाल शहर के रवींद्र भवन प्रांगण में किया जा रहा है. श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन संबंधी तैयारियों को लेकर कल एक बैठक भी बुलाई गई है.

सारंग ने बताया कि परम पूज्य राष्ट्र  संत मां कनकेश्वरी देवी संपूर्ण भारतवर्ष में 15 वर्ष की उम्र से श्रीराम कथा और श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से विश्व शांति का अभियान आरंभ कर ज्ञान का अमृत रस बरसा रही हैं. उन्होंने बताया कि इसके पूर्व भी भोपाल शहर में मां कनकेश्वरी देवी श्रीराम कथा के माध्यम से अमृत बरसा चुकी हैं.

विधायक सारंग ने बताया कि वे प्रतिवर्ष अपनी पूज्य माताजी की स्मृति में धार्मिक आयोजन कराते आ रहे हैं. इसी श्रृंखला में इस वर्ष उनकी स्मृति में मां कनकेश्वरी देवी के मुखारङ्क्षबद से श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन का निश्चय किया है. इसी आयोजन के संबंध में 2 अक्टूबर को सायं 5 बजे 74 बंगले स्थित उनके कार्यालय एच-50 पर शहर के प्रमुख श्रद्घालुओं और समाज प्रमुखों की एक बैठक बुलाई गई है.

सिर्फ सांसों का बंधन नहीं है उम्र : परसराम

उम्र सिर्फ सांसों का बंधन नहीं है. उम्र जीवन की जीवटता का नाम है. आज यह साबित कर रहे हैं 125 वर्ष के परसराम गुर्जर. एक साधारण-से कृषक परिवार में जन्मे परसराम गुर्जर ने उम्र के 125 वर्ष से अधिक बसंत में जीवन के तमाम उतार-चढ़ाव को भोगा है. जीवन के इस अनुभव की विरासत को वह अपनी पीढिय़ों तक पहुंचाने में आज भी पीछे नहीं हैं.परसराम गुर्जर स्कूल शिक्षा तो नहीं ले सके मगर उन्हें अनपढ़ कहना स्वयं का दंभ ही होगा. स्वप्रेरणा से कृषि कार्य के साथ ही वह वेद-पुराणों व धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करते रहे और आज भी उन्हें कंठस्थ है. उम्र की स्मरण शक्ति एवं श्रवण पर कोई प्रभाव नहीं है. शारीरिक रूप से वह सक्षम हैं. चलते-फिरते ही नहीं स्वयं के दैनिक कार्य करने की क्षमता भी है. ऐसा लगता है कि उन्हें स्वयं मां नर्मदा ने वरदान में दी है. परसराम गुर्जर के पिता स्व. हरभजन ङ्क्षसह गुर्जर ने अपने बेटे को आत्म अनुशासन की सीख दी थी. यह सीख उनके जीवन का हिस्सा बन गई. इसी सीख पर चलते हुये आपने हमेशा अपने जीवन को अनुशासित किया.

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