लालपरेड मैदान पर प्रतिदिन 2 बजे से होगी कथा

भोपाल,15 दिसंबर.”कर्मश्री” संस्था द्वारा मानव कल्याण एवं समाज सुधार के उददेश्य को दृष्टिगत रखते हुऐ राजधानी में एक महाआयोजन आचार्य मृदुल कृष्ण शास्त्री द्वारा वाचित श्रीमद भागवत कथा  का आयोजन किया जा रहा है. यह काय्र्रक्रम 17 से 23 दिसंबर तक शहर के लाल परेड मैदान में आकार लेगा.संस्था द्वारा भोपाल शहर में पहली बार आचार्य मृदुल कृष्ण शास्त्री द्वारा वाचित श्रीमदभागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है.

84 कोसीय परिक्रमा का लाभ
श्रीकृष्ण की लीलाओं के साक्षी मथुरा-वृंदावन, गोकुल-बरसाना, नंदगांव-गोवर्धन, महावन सहित पूरे चौरासी कोसीय बृजधाम को कथा के आयोजन के दौरान लालपरेड मैदान पर जीवंत किया जा रहा है. जहां श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, जहां उन्होने बाललीलाएं कर गोकुलवासियों को मुग्ध किया, पूतना सहित अनेक दैत्यों का वध कर बृजवासियों को आतंक से मुक्ति दिलाई,गोवर्धन उठाकर बृजवासियों की रक्षा की और इंद्र का घमंड तोडा, गोपियों संग रासलीला रचाई, कंस का वध कर मानवजाति का कल्याण किया, ऐसी सभी झांकियां लालपरेड पर जीवंत की जा रही है. इन झांकियों का दर्षन करने वाले भक्त पूरे चौरासी कोस की परिक्रमा का लाभ प्राप्त कर सकते हैं.

कलश यात्रा से शुभारंभ
भागवत कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा से होगा. यह कलश यात्रा शनिवार 17 दिसंबर को दोपहर 1 बजे न्यू मार्केट हनुमान मंदिर से आरंभ होकर टॉप एन टाउन , रोशनपुरा, बापू की कुटिया, राजभवन, कुम्हारपुरा होते हुए लालपरेड मैदान में प्रवेश करेगी. कलश यात्रा में हजारों की संख्या में माता-बहनें कलश लेकर शामिल होंगी.

27 भव्य प्रवेश द्वार
कथा आयोजन स्थल एवं मुख्य मंडप में प्रवेष हेतु अराध्य देवों, महापुरूषों एवं ऋषियों के नाम से कुल 27 भव्य प्रवेष द्वारों का निर्माण कराया जा रहा है. आयोजन स्थल पर प्रवेश हेतु वृंदावन द्वार, मीरा द्वार, संत हिरदाराम द्वार, महंत नरहरी द्वार, रसखान द्वार, कबीर द्वार, महाराणा प्रताप द्वार, षिवाजी द्वार आदि नामों से 8 मुख्य प्रवेश द्वारों का निर्माण किया जा रहा है. मुख्य मंडप में धर्मयजमानों के प्रवेश हेतु श्रीराम द्वार, भगवान महावीर द्वार, भगवान गौतम बुद्ध द्वार, भगवान गुरूनानक देव द्वार, भगवान झूलेलाल द्वार नाम से 5 प्रवेष द्वार होंगे. इसी तरह स्वामी विवेकानंद द्वार, नेताजी सुभाषचंद्र बोस द्वार, चंद्रषेखर आजाद द्वार, भगतसिंह द्वार, रानी लक्ष्मीबाई द्वार एवं गौतम ऋषी द्वार, भारद्वाज ऋषी द्वार, विष्वामित्र ऋषी द्वार, कष्यप ऋषी द्वार, जमदग्नि ऋषी द्वार, वषिष्ठ ऋषी द्वार, अ़ित्र ऋषी द्वार, भगवान वाल्मीकि द्वार, संत रविदास द्वार  आदि नामों से 15 जन प्रवेश  द्वार बनाए जा रहे हैं. मुख्य मंडप का नाम आद्य शंकराचार्य मंडपम रखा गया है.

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