श्री शिवराज सिंह चौहान ने पदनाम से ”मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना” लागू करके देश में पहला राज्य बन गए हैं. इसकी पहली यात्रा 3 सितम्बर की शाम भोपाल से देश के दक्षिण में स्थित रामकालीन तीर्थ रामेश्वरम् के लिए प्रारंभ हो गई. इसकी विशेषता व योजना की सार्थक व्यवहारिकता कहा जाना चाहिए कि यह केवल 60 वर्ष या इससे अधिक आयु के लोगों के लिए है. इसका सीधा असर यह हुआ कि इसमें वृद्धजनों को पूरा लाभ मिल गया. इस यात्रा का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है.

इसकी चयन प्रक्रिया में यह मानवीय व्यवस्था भी समाहित है कि पति या पत्नी किसी एक के चयनित हो जाने पर दूसरा जीवनसाथी स्वयं चयनित हो जाता है. इनमें वे ही लोग शामिल हो सकेंगे जो आयकर दाता नहीं है. इस यात्रा में 984 लोग जा रहे हैं. इसे रेलवे के पर्यटन निगम के जरिये आयोजित किया है. इस प्रथम यात्रा के अनुभव से ही इसकी उपयोगिता सिद्ध होगी. इससे यह बात जरूर होनी चाहिए कि सभी वृद्धजन तीर्थ यात्री बने है. उनकी अवस्था व आर्थिक दशा को ध्यान में रखते हुए उनकी सुख-सुविधा, आराम और दर्शन सभी सुखद अनुभव रहे.

दूसरी यात्रा अजमेर शरीफ गरीब नवाज की दरगाह के लिये होगी. इसके अलावा अन्य तीर्थों में बद्री-कैदार, जगन्नाथपुरी, द्वारकापुरी, हरिद्वार, अमरनाथ, वैष्णोदेवी, शिर्डी, तिरुपति, काशी, गया, अमृतसर, सम्मेद शिखर, श्रवण बेलगोला, बैलांगणी, चर्च, नागपट्टïनम शामिल है. मध्यप्रदेश में धार्मिक पर्यटन एक बहुत ही स्वागत योग्य यात्रा कार्यक्रम बनाया गया है. तीर्थ यात्रियों के लिये गाइड के साथ-साथ  ठहरने, भोजन स्थानीय आवागमन की व्यवस्था की गई है.

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