आरोपों पर विचार कर रही है सीबीआई

नई दिल्ली, 29 मार्च. सेनाध्यक्ष जनरल वी. के. सिंह अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में रोज कोई न कोई धमाका कर रहे हैं.

ताजा करप्शन बम उन्होंने सेना में कार्यरत लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग के खिलाफ फोड़ा है. सीबीआई सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह द्वारा लिखे गये पत्र पर विचार कर रही है. इस पत्र में सेना प्रमुख ने उन आरोपों की जांच करवाने के लिए कहा है, जो तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद ने लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग के खिलाफ लगाये हैं. सीबीआई सूत्रों ने कहा कि एजेंसी को जनरल सिंह का पत्र मिला है और इसके साथ सांसद अंबिका बनर्जी की शिकायत भी नत्थी की हुई है.

उन्होंने बताया कि एजेंसी कैबिनेट सचिवालय और रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर विशेष सीमांत बल के लिये खरीदे गये उपकरणों का रिकार्ड मांग सकती है. बनर्जी ने पिछले साल मई महीने में रक्षामंत्री को पत्र लिखा था. जनरल सुहाग दीमापुर स्थित तीसरी कोर के कमांडर हैं और वह सेना प्रमुख का पद संभालने वाले संभावित अधिकारी हैं. की कतार में हैं.

उन्होंने बताया कि जनरल सिंह ने अब सीबीआई से अनुरोध किया है कि वे विशेष सीमांत बल (एसएफएफ) के लिये किये गये सौदे में हुए भ्रष्टाचार के बारे में सांसद द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करे. इस दौरान जनरल सुहाग महानिदेशक थे. यह बल भारत की बाह्य खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनलसिस विंग (रॉ) के साथ काम करता है. सूत्रों के मुताबिक बनर्जी ने आरोप लगाया है कि इस गुप्त बल के लिये जरूरी सामानों के सौदे में दलाली दी गई. इन उपकरणों में रात में देखने वाले उपकरण से लेकर पैराशूट तक शामिल हैं. उन्होंने दावा किया कि सांसद ने कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का नाम लिया था जिन्हें कथित रूप से इन सौदों में दलाली मिली थी. एसएफएफ को इस्टेब्लिशमेंट-22 के नाम से भी जाना जाता है. यह एक खुफिया बल है और इसका गठन 1962 के बाद किया गया था. यह रॉ के अंतर्गत काम करता है जो कैबिनेट सचिवालय के नियंत्रण में आता है.

चिट्ठी लीक होना ‘देशद्रोह’ : आर्मी चीफ

आर्मी चीफ जनरल वी के सिंह ने चिट्ठियों के लीक होने के मामले में पल्ला झाड़ लिया है. उन्होंने चिट्ठियों के लीक होने पर कहा है कि इसमें उनका कोई हाथ नहीं है. आर्मी चीफ ने कहा है कि चिट्ठियों का लीक होना दुर्भाग्यपूर्ण है और उसकी जांच होनी चाहिए. वहीं, सरकार ने इस मामले की जांच आईबी को सौंप दी है.

सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री को सेना की तैयारियों की खराब स्थिति के बारे लिखी चिट्ठी लीक होना ‘देशद्रोह’ का मामला है और इस काम को अंजाम देने वाले से सख्ती से निपटा जाना चाहिए. सेना प्रमुख को पद से हटाये जाने की मांग के बीच उन्होंने यह बात कही है. सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि खुफिया ब्यूरो से मीडिया में पत्र जारी होने की जांच करने को कहा गया है. प्रधानमंत्री को लिखी आधिकारिक चिट्ठी लीक होने से सिंह और सरकार के बीच तनाव बढ़ गया है. जनरल सिंह ने कहा कि उनकी छवि खराब करने के लिये बेतुका रूख अपनाया गया है.

सेना मुख्यालय द्वारा जारी संक्षिप्त बयान में सेना प्रमुख ने कहा कि उनका प्रधानमंत्री तथा रक्षा मंत्री के साथ आधिकारिक पत्राचार विशिष्ट प्रकार का है. सिंह फिलहाल जम्मू कश्मीर में हैं. 31 मई को रिटायर हो रहे जनरल सिंह ने कहा, ‘चिट्ठी लीक होने को देशद्रोह का कृत्य समझा जाना चाहिए. उनकी छवि खराब करने का बेतुका रूख बंद होना चाहिए. पत्र लीक करने वाले को तलाशा जाना चाहिए और उससे सख्ती से निपटा जाना चाहिए.’ सिंह का पत्र मीडिया में लीक होने के बाद समाजवादी पार्टी, जनता दल यू तथा राजद ने उन्हें बख्रास्त किये जाने की मांग की है. सरकार के साथ विपक्ष भी इस बात पर सहमत है कि उनकी सुरक्षा संबंधी चिंताएं सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए थी.

पत्र लीक होने के मामले की जांच कराये जाने की पुरजोर मांग उठी थी. यह भी माना जा रहा है कि सेना प्रमुख को सबसे पहले देश की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता प्रत्यक्ष तौर पर रक्षा मंत्री के समक्ष रखी चाहिए थी. सेना प्रमुख पर अनुशासन तोडऩे का भी आरोप लगा है. सिंह की चिट्ठी ऐसे समय लीक हुई जब एक साक्षात्कार को लेकर पहले से उनके और सरकार के बीच कड़वाहट थी. हाल ही में उन्होंने मीडिया को दिये साक्षात्कार में दावा किया था कि उन्हें एक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल ने एक सौदे की मंजूरी के लिये 14 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की थी.

तीनों सेना प्रमुख विश्वसनीय : एंटनी

रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने कहा है कि जनरल वी.के. सिंह समेत तीनों सेना के प्रमुखों को सरकार का विश्वास हासिल है और वे अपना काम कर रहे हैं. रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इसके साथ ही एंटनी ने ऐलान किया कि आर्मी चीफ की चि_ी लीक होने की जांच इंटेलिजेंस ब्यूरो करेगी.

ब्लैकलिस्ट होने वाली कंपनियों में 2 भारतीय और 4 विदेशी कंपनियां शामिल हैं. एंटनी ने कहा कि जिसने भी प्रधानमंत्री को लिखी गई आर्मी चीफ की चिट्ठी लीक की है, वह राष्ट्रद्रोही है. कोई भी राष्ट्रभक्त ऐसा नहीं कर सकता है. रक्षा मंत्री ने कहा कि हमने इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) से लीक की जांच करने के लिए कहा है और रिपोर्ट मिलने के बाद जिम्मेदार शख्स के खिलाफ हमारे कानून के तहत सबसे कठोर कार्रवाई की जाएगी. इससे पहले सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह ने कहा था कि प्रधानमंत्री को भेजी गई चिट्ठी लीक करने के मामले में उनका हाथ नहीं है. उन्होंने भी इसे देशद्रोह करार देते हुए कहा कि चिट्ठी का लीक होना दुर्भाग्यपूर्ण है. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखी गई आर्मी चीफ वी.के. सिंह की चिट्ठी ने देश की सियासत को गरमा दिया है.

समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, बीजेडी, जेडीयू ने सरकार से रक्षा मंत्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी और उन्हें बर्खास्त करने की मांग की थी. इससे पहले उन्होंने अपने पूर्व सहयोगी रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल तेजिंदर सिंह द्वारा 14 करोड़ रुपये रिश्वत की पेशकश का रहस्योद्घाटन करके सैन्य डील में होने वाले भ्रष्टाचार पर से पर्दा उठाया था. आर्मी चीफ के पक्ष में आई टीम अन्ना-उधर, आर्मी चीफ जनरल वी के सिंह के पक्ष में टीम अन्ना  सामने आ गई. टीम अन्ना ने जनरल सिंह को  पूरा समर्थन देते हुए कहा कि सरकार की हां में हां न मिलाने की वजह से ही उन्हें निशाने पर लिया गया है.

टीम अन्ना के अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया,  आर्मी चीफ और सीएजी जैसे कुछ लोग जो सरकार की हां में हां नहीं मिलाते, उन्हें निशाने पर ले लिया जाता है. हम आर्मी चीफ के संघर्ष का पूरा समर्थन करते हैं. हमें उन पर गर्व है.  उन्होंने कहा, ऐसा लगता है कि सरकार ने उनके खिलाफ जंग छेड़ दी है. आर्मी चीफ के खिलाफ दिए जा रहे बयानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, नेता देश की सुरक्षा तैयारियों में कमी पर चर्चा करने के बदले राजनीति खेल रहे हैं.

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