मध्यप्रदेश के लिए राघवजी ने केंद्र को दिए बजट पूर्व सुझाव

औद्योगिक एवं अन्य विकास के लिए रेलवे नेटवर्क को बढ़ाएं

नई दिल्ली, 18 जनवरी, नससे. मध्यप्रदेश के वित्तमंत्री श्री राघवजी ने केन्द्रीय बजट के संबंध में आयोजित बैठक में सुझाव दिया कि केन्द्र सरकार राज्य सरकारों को छठवें वेतनमान के कारण हुए व्यय भार वहन करने में मदद करे.

केन्द्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में आयोजित बजट पूर्व सुझावों के राज्यों के वित्त मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए श्री राघवजी ने कहा कि छठवें वेतनमान के कारण राज्यों की वित्तीय स्थिति खराब हुई है. लेकिन अभी तक केन्द्र ने कोई मदद नहीं की. उन्होंने सुझाव दिया कि केन्द्र सरकार इस संबंध में अब मदद करे. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ऐसी वस्तुओं या मदों पर सर्विस टैक्स न लगाये जो राज्य के दायरे में आते हैं. उन्होंने कहा कि मनोरंजन कर विलासिला कर, भवन एवं सम्पत्ति कर आदि राज्यों के दायरे में आते हैं. यदि इन पर केन्द्र सरकार द्वारा सर्विस टैक्स लगाया जाता है तो यह संघीय ढांचे के खिलाफ होगा और नागरिकों पर कर की दोहरी मार पड़ेगी. श्री राघवजी ने मध्यप्रदेश में औद्योगिक एवं अन्य विकास के लिए रेलवे नेटवर्क को और बढ़ाने पर बल दिया. उन्होने कहा कि मध्यप्रदेश जो देश के मध्य में है वहां रेलवे नेटवर्क औसत से बहुत कम है. उन्होंने बताया कि ललितपुर-सिंगरौली रेलमार्ग का कार्य 40 साल में भी पूरा नहीं हो पाया है. इसी प्रकार जबलपुर से गोंदिया और खंडवा से रतलाम मार्ग का ब्रॉडगेज में परिवर्तन भी नहीं हो पाया है. उन्होंने बताया कि इन मार्गों के ब्रॉडगेज हो जाने से औद्योगिक विकास को गति मिलेगी. खंडवा-रतलाम मार्ग तो दिल्ली-मुम्बई कॉरीडोर में आता है. श्री राघवजी ने कहा कि राज्य सरकार ने ओला-पाला प्राभावितों के लिए क्षतिपूर्ति राशि की बार-बार मांग की है. केन्द्र सरकार द्वारा गठित मंत्री समूह ने भी सैद्धांतिक रूप से क्षतिपूर्ति के लिए सहमति दी है. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने स्वयं के संसाधनों से 1725 करोड़ रूपये क्षतिपूर्ति के रूप में दिये हैं. यह राशि केन्द्र सरकार द्वारा मध्यप्रदेश सरकार को दी जानी चाहिए. बुंदेलखंड पैकेज की पूरी राशि राज्य सरकार को नहीं मिली है. इस साल एक भी पैसा केन्द्र सरकार से नहीं मिला है जबकि 750 करोड़ रूपये बकाया हैं. उन्होंने यह राशि अतिशीघ्र दिये जाने पर बल दिया.

वित्त मंत्री ने बताया कि प्रदेश में घरेलू उपभोक्ताओं को 24 घंटे और खेती किसानी के लिए आठ घंटे नियमित रूप से बिजली उपलब्ध कराने के लिए फीडर सेपरेशन का कार्य शुरू किया गया है. यह कार्य दो साल में पूरा करेंगे. इस पर 12 हजार करोड़ रूपये व्यय होना है. केन्द्र सरकार गांवों के सर्वांगीण विकास के इस कार्य में सहयोग करे. श्री राघवजी ने सुझाव दिया कि ऐसे राज्य जहां क्षेत्रफल ज्यादा है लेकिन आबादी कम एवं बिखरी हुई है उन क्षेत्रों में सड़क, बिजली, स्कूल, अस्पताल आदि आधारभूत संरचनायें उपलब्ध कराने के लिए केन्द्र सरकार केन्द्र स्तर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज राज्यों को दे ताकि ऐसे क्षेत्रों को सर्वांगीण विकास हो सके. उन्होंने सुझाव दिया कि प्रदेश में किराये के भवनों में चल रहे आंगनवाड़ी केन्द्रों के भवनों के निर्माण के कार्य को ग्राम विकास योजना से जोड़ा जाए. उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में 70 प्रतिशत आंगनवाड़ी किराये के भवनों में संचालित हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत बनाये गये स्कूलों की बाड्रीवाल के लिए राज्य सरकार अलग से प्रावधान करे. उन्होंने प्रदेश के वनों के रख-रखाव के लिए विशेष पैकेज अथवा कार्वन क्रेडिट दे क्योंकि वनों के रख-रखाव से पूरे देश के वातावरण को लाभ मिलता है.

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