नयी दिल्ली, 4 सितम्बर. प्रधानमंत्री मनमोहन छात्रों के ज्ञान के निचले स्तर पर चिंता जताते हुए शिक्षकों से बच्चों में लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय एवं स्वतंत्रता तथा धर्मनिरपेक्षता का पाठ पठाने की अपील की है और उनमें संवेदनशीलता बढ़ाने का आह्वान किया है ताकि बच्चे सामाजिक एवं आर्थिक बदलाव की प्रक्रिया में भाग ले सकें.

श्री सिंह ने आज यहां शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर अपने निवास पर राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित होने वाले शिक्षकों को संबोधित करते हुए यह बात कहीं. गौरतलब है कि कल राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी इन शिक्षकों को विज्ञान भवन में राष्ट्रीय अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित करेंगे. उन्होंने कहा कि छात्रों का ज्ञान का निम्नस्तर काफी चिंताजनक है. इसलिए हम छात्रों के दाखिले. बुनियादी ढांचे की बजाय स्कूलों में क्या पढाया जा रहा है उस पर अब ध्यान देना चाहते है और हम इसके लिए अपनी शिक्षा रणनीति बदलना चाहते है. इसलिए हमें छात्रों के सतत मूल्याकंन की प्रणाली की जरूरत है और अभिभावकों तथा समुदाय को भी हम जोडऩा चाहते है ताकि शिक्षा की गुणवत्ता बढ सके.  शिक्षक के रूप में आप ज्ञान तथा साथ की खोज के लिए बच्चों का मार्ग निर्देशन को और उनमें लोकतांत्रिक मूल्यों की पैदा को तथा समानता. सामाजिक न्याय. स्वतंत्रा धर्मनिरपेक्षता एवं मानव गरिमा के प्रति सम्मान का भाव पैदा करें.

प्रधानमंत्री ने शिक्षक राष्ट्रनिर्माण की प्रक्रिया में काफी योगदान देते है और वे राष्ट्र निर्माता है तथा देश के भविष्य की कुंजी हैं. उन्होंने कहा कि शिक्षकों में देशके नीति निर्माण .सुशासन प्रबंधन तथा निर्णय लेनेकी प्रक्रिया के अविभाज्य हिस्सा है. देश में शिक्षा सुधार में उन्हें अपनी भूमिका निभानी है और स्तरीय शिक्षा प्रदान करनी है.

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