नई दिल्ली, 30 मार्च. संसद के अपमान के आरोप में भेजे गए विशेषाधिकार हनन नोटिसों के जवाब में भी अरविंद केजरीवाल अपने पुराने रुख पर अडिग हैं. केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने संसद का अपमान नहीं किया है , बल्कि संसद के अंदर बैठने वाले लोग लगातार इसका अपमान कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह संसद का सम्मान करते हैं , परंतु दागी 162 सांसदों के प्रति सम्मान नहीं प्रकट कर सकते.

राज्यसभा सचिवालय को भेजे गए अपने जवाब में केजरीवाल ने कहा कि मैंने अपने शब्दों या किसी काम से संसद का अपमान नहीं किया है. उन्होंने कहा ,  मैं ससंद को लोकतंत्र के मंदिर की तरह मानता हूं और मुझे इस बात का काफी दुख है कि इसके अंदर बैठने वाले लोग ही अपनी हरकतों और कार्यों से अक्सर इस मंदिर का अपमान करते रहते हैं. कई घटनाएं भी इस बात को साबित कर चुकी हैं कि संसद का अपमान बाहर के लोग नहीं बल्कि संसद के अंदर बैठे लोग ही कर रहे हैं.

गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल की एक टिप्पणी पर राज्यसभा सदस्य राजनीति प्रसाद और प्रोफेसर रामकृपाल यादव ने संसद के अपमान का आरोप लगाते हुए उन्हें नोटिस भिजवाया है. नोटिस के जवाब में केजरीवाल की पूरी चिट्ठी यहां पढ़ें केजरीवाल ने कहा , मैं संसद का सम्मान करता हूं और कई अच्छे सांसदों का भी सम्मान करता हूं , लेकिन कुछ सांसदों के बारे में मैं यह नहीं कह सकता. संसद में आज कुछ लोग तो ऐसे हैं , जिन्हें लोग अपने घर बुलाने से भी कतराएं. ऐसे लोग जब संसद में बैठे हों , तो उसका सम्मान कैसे किया जाए ? अपने बयान में उन्होंने बताया कि लोकसभा के अंदर इस समय 162 सांसद ऐसे हैं , जिन पर 522 आपराधिक मामले दर्ज हैं. उन्होंने यह भी कहा कि संसद की छवि खराब करने के लिए सभी पार्टियां जिम्मेदार हैं , क्योंकि उन्होंने पिछले (2009 के) लोकसभा चुनावों में ऐसे लोगों को बढ़-चढ़ कर टिकट दिया. उन्होंने बताया कि 2004 के चुनावों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 128 सदस्य लोकसभा में थे जबकि 2009 में इनकी संख्या बढ़कर 162 हो गई.

दागी नेताओं के बारे में टिप्पणी करते हुए केजरीवाल ने हालिया रिलीज़ फिल्म पान सिंह तोमर के डायलॉग का जिक्र कया और कहा कि जब फिल्म का हीरो पर्दे पर कहता है कि बीहड़ में बागी रहते हैं , डाकू तो संसद में रहते हैं. उन्होंने कहा जब इस तरह के डायलॉग पर लोग तालियां बजाते हैं , तो हमें हैरानी नहीं होनी चाहिए क्योंकि आज हमारी संसद की यही छवि है. 29 दिसंबर 2011 को संसद में चर्चा के दौरान लोकपाल बिल फाडऩे की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब सांसद राजनीति प्रसाद ने मंत्री जी के हाथ से बिल छीनकर फाड़ दिया क्या तब संसद अपमानित नहीं हुई ? इस घटना को बाकी सांसद बैठकर चुपचाप देखते रहे क्या तब संसद का अपमान नहीं हुआ ? जब संसद में कुर्सियां फेंकी जाती हैं , माइक उखाड़कर फेंके जाते हैं , तब क्या संसद की गरिमा बनी रहती है ?

केजरीवाल ने कहा , ‘ मैंने कुछ भी गलत नहीं कहा था. मैंने सिर्फ जनता के प्रश्नों को उठाया था. अगर आपके कानून की नजऱ में मैं दोषी हूं तो मैं उस कानून के तहत सजा भुगतने के लिए तैयार हूं. मैं व्यक्तिगत रूप से अपनी बात कहने का मौका चाहता हूं.’

टीम अन्ना पर बरसे सांसद

लोकसभा की ओर से भेजे गए नोटिस पर शुक्रवार को अरविंद केजरीवाल के जवाब पर कई राजनीतिक पार्टियां बौखला गई हैं. समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने टीम अन्ना को अपराधियों का अड्डा बताया है. उन्होंने कहा कि टीम अन्ना के कई सदस्यों पर मुकदमे भी चल रहे हैं. वहीं , राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कहा कि अरविंद केजरीवाल सठिया गए हैं. वह मेंटल केस बन गए हैं और कुंठाग्रस्त हैं, इसीलिए ऐसा बयान दे रहे हैं. जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव ने केजरीवाल के बयान पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया.

शरद यादव ने कहा कि वह हर आदमी के बयान पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकते. अरविंद केजरीवाल के जवाब पर सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि अरविंद ने सभी को मुजरिम मान लिया है , जबकि उनके खिलाफ अभी कोई जुर्म साबित नहीं हुआ है.गौरतलब है कि संसद के अपमान के आरोप में भेजे गए विशेषाधिकार हनन नोटिसों के जवाब में भी अरविंद केजरीवाल अपने पुराने रुख पर अडिग हैं. केजरीवाल ने कहा है कि उन्होंने संसद का अपमान नहीं किया है , बल्कि संसद के अंदर बैठने वाले लोग लगातार इसका अपमान कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह संसद का सम्मान करते हैं.,लेकिन दागी 162 सांसदों के प्रति सम्मान नहीं प्रकट कर सकते.

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