नई दिल्ली, 10 अक्टूबर. गरीबी रेखा को लेकर सरकार की फजीहत को संज्ञान में लेते हुए सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) 21 अक्टूबर को होने वाली बैठक में कोई सिफारिश कर सकती है। एनएसी के एक सूत्र ने कहा, ‘अध्यक्ष ने 21 अक्टूबर को एक बैठक बुलाई है। गरीबी के अनुमानों से सम्बंधित मुद्दे और सामाजिक आर्थिक एवं जाति जनगणना-2011, एजेंडे के मुख्य हिस्सा होंगे। सोनिया गांधी की बीमारी और इलाज के लिए उनके विदेश जाने के कारण पिछले दो महीने से एनएसी की बैठक नहीं हुई है। सोनिया की अनुपस्थिति में योजना आयोग द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दायर एक हलफनामे को लेकर सरकार की काफी फजीहत हुई है। हलफनामे में कहा गया है कि शहरी इलाकों में प्रतिदिन 32 रुपये से अधिक और ग्रामीण इलाकों में 26 रुपये से अधिक खर्च करने वाले गरीबी नहीं हैं। हलफनामे से विवाद पैदा हो गया और एनएसी सदस्य अरुणा रॉय व हर्ष मंदर सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। यहां तक कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि योजना आयोग गरीबी के मुद्दे को लेकर भ्रमित है और वह सर्वोच्च न्यायालय को भ्रमित कर रहा है। एनएसी के एक सूत्र ने कहा, ‘हलफनामे ने यह संदेश दिया है कि इस स्तर से ऊपर के लोग अपनी स्थिति से खुश हैं और इस स्तर से ऊपर के लोग अच्छी स्थिति में हैं और वे सरकारी सब्सिडी के पात्र नहीं हैं। अपना चेहरा बचाने के लिए सरकार ने तत्काल घोषणा की कि जनवरी 2012 तक सामाजिक आर्थिक एवं जाति जनगणना के आकड़े उपलब्ध हो जाने के बाद देश में गरीबी के आकड़े को अंतिम रूप देने के लिए एक दूसरी विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी। समस्या दरअसल यह है कि देश में गरीबी का कोई सटीक आकड़ा उपलब्ध नहीं है।

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