दिल्ली, 18 मार्च, नससे. आगामी आम चुनाव मे प्रधानमंत्री की कुर्सी देख रहे मुलायम सिंह यादव संप्रग सरकार के बचे-खुचे समय (दो वर्ष) मे अपने को मंत्री पद के लिए खर्च करने को तैयार नहीं हैं. हालांकि तृणमूल और द्रमुक की धमकियों से आजिज कांगे्रस-सपा को संप्रग सरकार में शामिल करने के लिए बेकरार है, लेकिन मुलायम कड़ी और पक्की सौदेबाजी के बाद ही मंत्री पद की तरफ रूख करेंगे.

सूत्रों के अनुसार मुलायम सिंह ने कांगे्रस नेतृत्व वाली संप्रग सरकार में शामिल होने या न होने के मुद्दे पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी चर्चा की. बैठक में मुलायम ने कहा कि जो हालात हैं उसमें लगता है कि लोकसभा के आम चुनाव 2014 से पहले हो सकते हैं. प्रदेश मे चुनावों में जिस तरह का अपार समर्थन मिला है उसमें पार्टी के लिए आम चुनावों मे 60 लोकसभा सीट निकालना कठिन नहीं होगा. सपा प्रमुख ने कहा कि बेहतर है कि पार्टी अभी से आम चुनाव की तैयारी में लग जाए.

वहीं दूसरी ओर संसद के बजट सत्र मे जहां कांग्रेस अपनी साख बचाने के लिए जूझ रही है. वहीं मनमोहन सिंह सरकार ममता बनर्जी की चेतावनी के बाद खतरे मे पड़ गयी है. सोमवार को ही राष्ट्रपति का अभिभाषण पारित करना और फिर इसी सप्ताह रेल बजट और आम बजट पारित कराना सरकार के लिए बड़ी चेतावनी है. ऐसे मे जल्द से जल्द मुलायम सिंह को सरकार मे शामिल कराना कांग्रेस की मजबूरी बन गयी है. हालांकि मुलायम सिंह ने सरकार को पहले से ही बाहर से समर्थन दे रखा है, लेकिन उससे कांग्रेस आश्वस्त नहीं है. 2008 मे मुलायम ने वामदलों के समर्थन वापसी के बाद सरकार बचायी थी और फिर पिछले सत्र मे लोकपाल विधेयक पारित होने के समय वाकआउट कर अप्रत्यक्ष रूप से विधेयक पारित हो जाने देने मे सरकार की मद्द की थी.

वहीं दूसरी ओर मुलायम के सहयोगी व पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि मौजूदा स्थिति मे राजनीति कहती है, ‘नेता जी (मुलायम) बड़े उद्देश्य की तरफ देखें, लेकिन तय नियति को करना है.’ उन्होंने कहा कि देश मे गैर कांग्रेस-भाजपा राजनीति का माहौल बन रहा है और सबसे बड़े सूबे से 60-70 सीट लेने वाला नेता ही उसके केंद्र मे रहेगा. वहीं जमीनी स्थिति यह है कि मुलायम अब काफी अस्वस्थ हैं और उनकी पहले जैसी सक्रियता नहीं रही. ऐसे मे पार्टी का एक बड़ा तबका सरकार में शामिल होने की भी दलीले दे रहा है.

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