इस्लामाबाद, 9 अप्रैल. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रमुख और पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बेटे बिलावल भुट्टो ने रविवार को ट्विटर पर अपने पहले भारत दौरे के बारे में अपनी भावनाओं को जाहिर किया.

बिलावल ने दोनों देशों को ऐसे समय में हथियारों पर पैसा खर्च करने की बात को फिजूल करार दिया जब कई लोग गरीबी में जीवन यापन कर रहे हैं. 23 वर्षीय बिलावल भुट्टो ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट पर लिखा, यह काफी शर्मनाक है कि दोनों देशों की बड़ी जनसंख्या के गरीबी में रहने के बावजूद हथियारों पर इतना खर्च किया जा रहा है. बिलावल ने कहा कि दोनों देशों का परमाणु जखीरा एक-दूसरे को कई बार खत्म करने के लिए काफी है. इसके बजाए दोनों देशों को शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार पर खर्च करना चाहिए ताकि वे एक दूसरे को शिक्षित कर सकें, व्यापार कर सकें और एक दूसरे के घाव भर सकें. उन्होंने अपनी मां और पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय बेनजीर भुट्टो की कही बात को याद करते हुए लिखा, हर पाकिस्तानी में थोड़ा बहुत भारत है और हर भारतीय में थोड़ा बहुत पाकिस्तान है. बिलावट भुट्टो अपने पिता जरदारी के साथ एक दिन के दौरे पर रविवार को भारत आए थे.

दोस्ती की राह चलकर विश्वास बहाली की मंजिल हासिल करने में जुटे भारत और पाकिस्तान ने इस दिशा में रविवार को एक और अहम कदम बढ़ाया. जियारत के मकसद से भारत पहुंचे पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सभी विवादित मुद्दों के व्यावहारिक समाधान तलाशने की इच्छा जताई. प्रधानमंत्री आवास पर लंच से पहले दोनों नेताओं के बीच 40 मिनट की अकेले में हुई बातचीत ने भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय रिश्तों के हर मुद्दे को समेटा. आपसी रिश्ते सामान्य करने की राह में रोड़ा बन रहे आतंकवाद का मसला मनमोहन ने जरदारी के समक्ष उठाया तो पाकिस्तानी नेता ने कश्मीर, सर क्रीक और सियाचिन के विवादित मुद्दों को छेड़ा.

विदेश सचिव रंजन मथाई ने कहा कि पीएम ने मुंबई हमलों के साजिशकर्ता हाफिज सईद की गतिविधियों को रोकने की जरदारी से अपील की और 26/11 के गुनहगारों को दंडित करने की जरूरत पर बल दिया. मथाई के अनुसार, सईद के मामले में जरदारी ने दोनों देश की सरकारों को मिलकर लंबी बातचीत करने को कहा. पाक राष्ट्रपति ने कश्मीर, सर क्रीक समेत सियाचिन मसले की सुलह की ओर भारतीय नेतृत्व का ध्यान खींचा. अजमेर शरीफ में जियारत के लिए जरदारी की इस निजी यात्रा का इस्तेमाल मनमोहन ने लंच डिप्लोमेसी के जरिए द्विपक्षीय संबंधों के तार कसने के लिए बखूबी किया. दूसरी ओर, जरदारी ने भारतीय प्रधानमंत्री को पाक आने का न्योता देकर सद्भावना और अमन का संदेश दिया. मनमोहन ने इस निमंत्रण को स्वीकार कर जताया कि सरहद के दोनों ओर माहौल सकारात्मक करने की कोशिश भारत चाहता है.

सूत्रों के अनुसार, सितंबर में प्रधानमंत्री की पाक यात्रा हो सकती है. बातचीत में आतंकवाद और कश्मीर के मुद्दे ऐसे थे जो विवाद की स्थिति पैदा करने के लिए काफी थे. लेकिन रिश्ते सुधारने की दिली तमन्ना की वजह से दोनों नेताओं ने समझदारी से यह मसले उठाए. जरदारी ने कहा कि उनका देश, भारत के साथ बेहतरीन रिश्ते चाहता है. आतंकवाद पर मनमोहन और कश्मीर पर जरदारी के संदेश का असर रिश्तों में गर्मजोशी बढ़ाने की इस कवायद पर नहीं पडऩे दिया गया. इसका अंदाजा लंच से पूर्व मुलाकात के बाद मनमोहन और जरदारी के साझा बयान से लगाया जा सकता है. दोनों ने ही वार्ता को संतोषजनक बताया.

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