भाजपा सहयोगी दलों से नहीं बना पाई सहमति

प्रणव के समर्थन में जेडीयू

नई दिल्ली, 21 जून. राष्ट्रपति चुनाव के मसले पर एनडीए की एकता तार-तार हो गई. अब यह पूरी तरह से साफ हो गया है कि एनडीए के चार घटक दलों में से बीजेपी और अकाली दल पी. ए. संगमा का समर्थन करेंगे, तो जेडीयू और शिवसेना यूपीए के उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी के लिए वोट डालेगी.

जेडीयू के कदम को 2014 के लोकसभा चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है. जिस तरह से बीजेपी में नरेंद्र मोदी का कद बढ़ रहा है, उससे नीतीश कुमार खुश नहीं हैं. राजनीति के जानकारों का मानना है कि यही कारण है कि जेडीयू ने कांग्रेस के नेता प्रणव दा को समर्थन करने का फैसला किया है. जेडीयू ने सीनियर सहयोगी बीजेपी के उलट राष्ट्रपति चुनाव में यूपीए के उम्मीदवार प्रणव मखर्जी का समर्थन करने की घोषणा की है. शरद यादव ने साफ किया कि प्रणव मुखर्जी को समर्थन के फैसले से एनडीए पर असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि राजनीति में ऐसे फैसले होते रहते हैं. पहले भी ऐसा हो चुका है जब अकाली दल ने कांग्रेसी उम्मीदवार ज्ञानी जैल सिंह का समर्थन किया था और 2007 में शिवसेना ने प्रतिभा पाटिल का समर्थन किया था. जेडीयू अध्यक्ष ने राष्ट्रपति चुनाव पर आम सहमति न बनाने के लिए कांग्रेस को कोसा. उन्होंने कहा कि आम सहमति से राष्ट्रपति चुने जाते तो ज्यादा अच्छा होता लेकिन कांग्रेस ने इसके लिए कोशिश नहीं की.

भाजपा ने दिया संगमा को समर्थन

भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रपति चुनाव के बारे में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के घटक दलों के विरोध की परवाह न करते हुए पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी ए संगमा को समर्थन करने की आज एकतरफा घोषणा कर दी जिससे इस मुद्दे पर गठबंधन में अंतर्विरोध खुलकर सामने आ गया. लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरण जेटली ने यहां एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा की.

इसी के साथ अगले राष्ट्रपति के चुनाव में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी और श्री संगमा के बीच सीधा मुकाबला होना तय हो गया. भाजपा के इस फैसले में केवल शिरोमणि अकाली दल ही उसके साथ है तथा शिव सेना एवं जनता दल  यू ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी का समर्थन करने की घोषणा की है.श्रीमती स्वराज ने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव के बारे में राजग की दो औपचारिक और कई अनौपचारिक बैठकें हुई लेकिन इनमें कोई आम सहमति नहीं बन पाई. उन्होंने कहा कि दो घटक दल जनता दल यू और शिव सेना अभी तक इस पक्ष में नहीं हैं कि राजग को इस चुनाव में उम्मीदवार लडाना चाहिए. तीसरे घटक दल शिरोमणि अकाली दल ने कहा है कि वह राष्ट्रपति चुनाव के बारे में भाजपा के साथ रहेगा.

श्रीमती स्वराज ने कहा कि मुख्य विपक्षी दल होने के नाते भाजपा शुरू से ही इस हक में थी कि श्री मुखर्जी के खिलाफ उम्मीदवार लडाया जाना चाहिए पर इस बारे में राजग में सहमति नहीं बन पा रही थी. उन्होंने कहा कि भाजपा पर यह आरोप नहीं लगाया जाना चाहिए कि राष्ट्रपति के चुनाव के बारे में उसने सभी दलों के बीच आम सहमति नहीं बनने दी. उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी सत्तारूढ गठबंधन की होती है और संप्रग इसमें पूरी तरह विफल रहा है. संप्रग ने विपक्षी दलों के साथ विचार विमर्श किये बिना अपने उम्मीदवार की एकतरफा घोषणा कर दी. उन्होंने राजग के शासन काल में पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम की उम्मीदवारी का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सभी दलों से बात कर उस समय आम सहमति बनाई थी. श्री जेटली ने कहा कि इस मामले में संप्रग का रवैया कुछ ऐसा था कि उन्होंने एक उम्मीदवार चुन लिया है और बाकी सब दल उसका समर्थन करने के लिए एक लाइन में खडे हो जायें. उन्होंने कहा कि इस तरह से आम सहमति नहीं बनती. श्रीमती स्वराज ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जब वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को फोन कर श्री मुखर्जी के बारे में समर्थन मांगा तो श्री आडवाणी ने उनसे पूछा था कि वह उनको जानकारी दे रहे हैं या उनसे श्री मुखर्जी की उम्मीदवारी के बारे में सलाह मांग रहे हैं. श्रीमती स्वराज ने कहा कि आम सहमति बनाने की यह प्रकिया सही नहीं है.

एकमात्र विकल्प
उन्होंने कहा कि राजग के सामने दो उम्मीदवार थे जिनमें से एक पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने स्वयं ही चुनाव न लडने की घोषणा कर दी. इसके बाद श्री संगमा ही बचे थे और पार्टी ने उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और लोकसभा के अध्यक्ष के रूप में उनके सफल कार्यकाल को देखते हुए उनके समर्थन का निर्णय लिया. उन्होंने कहा कि श्री संगमा देश के बडे नेताओं में से एक हैं और पूर्वोत्तर के तो सबसे बडे नेता हैं. वह राष्टआपति चुनाव में उपयुक्त उम्मीदवार हैं और पार्टी उनके समर्थन की औपचारिक घोषणा करती है.

श्रीमती स्वराज ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव अनिवार्य है और इसे किसी तरह के विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि संप्रग ने श्री मुखर्जी को उम्मीदवार बनाया है और यह सबको पता है कि वित्त मंत्री रहते हुए उन्होंने देश की क्या हालत की है इसलिए भी भाजपा ने यह निर्णय लिया कि मैदान खाली छोडकर श्री मुखर्जी को वाकओवर नहीं दिया जायेगा. श्री जेटली ने कहा कि भाजपा श्री मुखर्जी को वाकओवर देकर कमजोर संप्रग को मजबूती नहीं देना चाहती थी. ऐसी सरकार के उम्मीदवार का समर्थन कैसे किया जा सकता है जो तरह तरह के हथकंडे अपनाकर बहुमत जुटाये और कुछ राजनीतिक दलों को अपने साथ रखने के लिए जांच एजेन्सियों का दुरूपयोग करे.

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