पूर्ववर्ती विधानसभा के मंत्रियों के रिश्तेदारों पर लगे आरोपों पर चर्चा की अनुमति नहीं

मंत्रियों के परिजनों एवं उनके सगे संबंधियों पर 17 प्रकार के आरोप लगाये गये हैं, तो कुछ मंत्रियों के स्टाफ में कार्यरत अधिकारियों पर भी लगे आरोप

भोपाल,28 नवंबर.नभासं. राज्य विधानसभा में आज मंत्रिमंडल के विरुद्व प्रमुख प्रतिपक्षी दल कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा प्रारंभ होने के पहले ही अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी द्वारा पूर्ववर्ती विधानसभा के कार्यकाल और मंत्रियों के रिश्तेदारों पर लगाए गए अरोपों पर चर्चा करने की अनुमति नहीं देने से हंगामे और शोरगुल की नौबत आ गई.

विधानसभाध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी का कहना था कि पूर्ववर्ती विधानसभा के कार्यकाल और मंत्रियों के रिश्तेदारों पर लगाये आरोपों पर चर्चा की अनुमति प्रदान नहीं की जा सकती है.अविश्वास प्रस्ताव में शामिल आरोपों के संबंधों में संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा, उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय,पशुपालन मंत्री अजय विश्नोई और सत्ता पक्ष की इस पर आपत्ति थी.सत्ता पक्ष के विधायक व मंत्रीगण नियमों और न्यायालय के आदेशों का हवाला देकर पुरानी विधानसभा के कार्यकाल और उस समय के मंत्रियों के कार्यो के संबंध में आरोपों पर चर्चा नहीं कराई जा सकती है.चर्चा केवल वर्तमान विधानसभा के कार्यकाल पर ही हो सकती है. कांग्रेस दल के उप नेता चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी, डॉ गोविंद सिंह,आरिफ अकील, नर्मदा प्रसाद प्रजापति और अन्य सदस्यों ने नियमों और परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2002 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष गौरीशंकर शेजवार द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में पुरानी विधानसभा से संबंधित आरोपों पर चर्चा की गई थी. इसलिए वर्तमान में प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव के आरोपों पर चर्चा कराई जा सकती है. इस बीच भाजपा और कांग्रेस विधायकों के बीच तीखी नोंकझोंक होने के साथ आरोप -प्रत्यारोप का दौर चलता रहा.इस आपत्ति पर के पक्ष और विपक्ष में लगभग एक घंटे तक बहस होती रही.

सदन में हंगामे की स्थिति के बीच अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने मिश्रा विजयवर्गीय सहित सत्ता पक्ष के सभी सदस्यों की आपत्तियां सुनी है. इन सदस्यों का कहना था कि अविश्वास प्रस्ताव में ऐसे आरोप लगाए गए हैं. जिनका वर्तमान सरकार और मंत्रिमंडल से संबंध नहीं है. उनका कहना था कि पिछली 12 वीं विधानसभा विघटित हो चुकी है. उस समय के मंत्रिमंडल के कार्यकलापों पर 13 वीं विधानसभा के मंत्रिमंडल पर लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा नहीं कराई जा सकती है. उन्होंने कहा कि विजयवर्गीय ने पंजाब विधानसभा के एक मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा वर्ष 2008 में दिए गए आदेश के हवाले के साथ लिखित में तर्क दिया है कि पिछले मंत्रिमंडल के जिन विभागों की अनियमितिताओं का उल्लेख आरोपपत्र में है उनमें से कई पूर्व मंत्री वर्तमान विधानसभा के सदस्य नहीं है. रोहाणी ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव की सूचना नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और उनके दल के सदस्यों ने 20 नवंबर को दी और आरोपपत्र 21 नवंबर को प्राप्त हुआ है. जिसमें 15 मंत्रियों के खिलाफ 37 आरोप हैं.इन आरोंपो में 17 ऐसे आरोप हैं जो मुख्यमंत्री और मंत्रियों के परिजनो एवं संबंधियों के संबंध में है. इसमें एक आरोप पूर्व मुख्य सचिव और एक राज्यसभा सदस्य के खिलाफ भी है. साथ ही इस प्रस्ताव पर चर्चा के संदर्भ में 10 आरोपपत्र 26 नवंबर को प्राप्त हुए है. कांग्रेस सदस्य आरिफ अकील ने 15 विभागों के मंत्रियों के खिलाफ तीन अलग अलग आरोप पत्र दिए है.एक अन्य सदस्य डॉ कल्पना परूलेकर ने आठ मंत्रियों के खिलाफ 17 आरोप दिए है.

रोहाणी ने कहा कि सभी आरोपपत्रों का अवलोकन करने से स्पष्ट है कि इसमें कई आरोप ऐसे है जो पिछले मंत्रिमंडल के मंत्रियों के संबंध में है. इस संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के मंत्रिमंडल के खिलाफ तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्तावों के आरोपों का भी अवलोकन किया है. इसमें यह पाया गया है कि दिग्विजय सिंह मंत्रिमंडल के खिलाफ वर्ष 1996,1998 और 2002 में लाये गए अविश्वास प्रस्तावों के आरोप उसी समय के थे जितनी अवधि तत्कालीन मंत्रिमंडल ने पूरी की थी. वर्ष 2002 के अविश्वास प्रस्ताव के आरोपपत्र में एक भी आरोप बाहरी व्यक्ति या पूर्व मंत्रिमंडल सदस्य के खिलाफ नहीं था. रोहाणी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने सदन में जो अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया है वह प्रस्ताव भी शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में कार्यरत मंत्रिमंडल के खिलाफ है. न कि पूर्व मंत्रिमंडल के खिलाफ उन्होंने कहा कि पूर्व के किसी मंत्रिमंडल के खिलाफ नियमानुसार अविश्वास प्रस्ताव लाया भी नहीं जा सकता है. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा के नियम पूर्णतया स्पष्ट हैं और स्थापित परंपराएं है कि न्यायालयो में विचाराधीन मामलों,ऐसे मामलो में कोई व्यक्ति अपने ऊपर लगे आरोपों के संबंध में सदन आकर उसका प्रतिवाद नहीं कर सकता है अर्थात जो व्यक्ति सदन का सदस्य नहीं है के खिलाफ आरोप नहीं लगाए जायेंगे. उन्होंने कहा कि मंत्रियों के परिजनों अथवा संबंधियों के मामलों में आरोप तभी लगाए जा सकते हैं जब आरोप लगाने वाला दस्तावेजों से यह स्पष्ट कर दे कि मंत्रिमंडल के किसी सदस्य ने अपने संबंधियों या परिजनों को अपने पद और हैसियत का दुरूपयोग कर लाभ पहुंचाया है. अध्यक्ष रोहाणी ने कहा कि सभी तर्कों को सुनने के बाद लगता है कि दिसंबर 2008 से कार्यरत वर्तमान मंत्रिमंडल के खिलाफ इस अवधि के ही आरोप लगाए जा सकते हैं. इसके पूर्व के मंत्रिमंडल के सदस्यों के खिलाफ आरोप लगाना नियमानुसार नहीं है. इसलिए वे पूर्व के मंत्रिमंडल के सदस्यों एवं रिश्तेदारों पर लगाए आरोपों पर चर्चा की अनुमति प्रदान नहीं करेंगे.

प्रमाण देने पर ही होगी चर्चा रोहाणी

विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी ने अविश्वास प्रस्ताव को लेकर कहा कि कोई भी मंत्री अपने परिजन को लाभ पहुंचाता है और विधानसभा सदस्य इसके प्रमाण देता है तो सदन में चर्चा होगी. रोहाणी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि जो प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन हं उन पर सदन में नियमानुसार चर्चा नहीं हो सकती है. इसके अलावा पिछली विधानसभा की चर्चा इस सदन में नहीं होगी. लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति सदन का सदस्य नहीं है और किसी मंत्री ने उसे लाभ पहुंचाया है तो चर्चा हो सकती है. कांग्रेस विधायक दल के उपनेता चौधरी राकेश सिंह के आरोप के जवाब में रोहाणी ने कहा कि मैने हमेशा विधानसभा का संचालन निष्पक्षता से किया है. वे नियम की बात रहे हैं, लगता है उन्होंने ठीक से होमवर्क नहीं किया है. इससे पहले चौधरी राकेश सिंह ने आरोप लगाया था कि विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में जो अपना मत रखा है, वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बीती रात उनके साथ बैठकर पांच पेच की रिपोर्ट तैयार कराई थी. इसमें विधानसभा के अधिकारी भी शामिल हैं. उनका कहना है कि वर्तमान विधानसभा के सदस्य यदि पिछली विधानसभा के सदस्य रहें है, तो उनके द्वारा किए गए भ्रष्टचार पर चर्चा करना नियम विरुद्ध नहीं है.

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