भोपाल, 9 अप्रैल. भारतीय स्टेट बैंक की उन्नति तथा प्रगति में हमारे बैंक के कर्मचारियों के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता है, रही कारण है कि स्टेट बैंक देश में सभी बैंकों का सभी क्षेत्रों में सिरमौर बना हुआ है.

उक्त उद्गार भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य महाप्रबंधक सुशील कुमार मिश्रा ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अवार्ड स्टाफ एम्पलाईज यूनियन भोपाल सर्कल भोपल की ‘महामाया हैरिटेज मैरिज गार्डन’ भोपाल में सम्पन्न द्वितीय त्रैवार्षिक सामान्य सभा में मुख्य अतिथि के उद्बोधन के रूप में कहे. उन्होंने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक के कर्मचारी न केवल बैंकिंग के क्षेत्र में वरन् सामाजिक तथा आर्थिक परिदृश्य में भी अपनी महती भूमिका निभा रहे हैं, जिससे आम आदमी को किसी तरह की परेशानी न हो. उन्होंने बताया कि विगत दिनों सार्वजनिक अवकाश के चलते भारतीय स्टेट बैंक द्वारा दो आधे कार्यदिवस को पूर्ण दिवस में परिवर्तित कर जनता की सेवा करते हुये बैंक कर्मियों ने अपनी कार्यक्षमता, कर्तव्य परायणता तथा देशहित में योगदान का परिचय दिया है.

इस अवसर पर महाप्रबंधक यशोवर्धन सिन्हा ने अवार्ड स्टाफ यूनियन के क्रियाकलापों पर संतोष प्रकट करते हुये संघ के उज्जवल भविष्य की कामना की. महाप्रबंधक ने भोपाल मंडल के अवार्ड स्टाफ यूनियन को सभी मंडलों में आदर्श यूनियन का खिताब देते हुये पदाधिकारियों को सामान्य सभा की सफलता के लिये शुभकामनाएं दीं. सामान्य सभा को संबोधित करते हुये स्टेट बैंक अधिकारी संघ के महासचिव का. संजीव मिश्रा ने कर्मचारी संघ तथा अधिकारी संघ को बैंक के दो पहिये निरूपित करते हुये कहा कि इन दोनों के आपसी सामंजस्य तथा विश्वास से ही भारतीय स्टेट बैंक तरक्की की राह पर अग्रसर है. इससे पूर्व कर्मचारी संघ के महाएसचिव का. अरुण भगोलीवाल ने सामान्य सभा के आयोजन पर प्रकाश डालते हुये संघ की विभिन्न उपलब्धियों के बारे में बताते हुये प्रबंधन तथा अधिकारी संघ को उन्हें संघ तथा अन्य मामलों में सहयोग देने के लिये आभार माना.

उद्ïघाटन समारोह उपरांत दोपहर 3 बजे से सामान्य सभा का डेलीगेट्स सेशन प्रारंभ हुआ जिसमें मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के विभिन्न शाखाओं/कार्यालयों से आये डेलीगेट्स ने अपने विचार रखे तथा संगठन की विभिन्न गतिविधियों पर विचार-विमर्श किया. समारोह के अंत में संघ के अध्यक्ष का. राजेंद्र ङ्क्षसह राणा ने आभार प्रदर्शन किया. कार्यक्रम का संचालन संघ के उप महासचिव (मुख्यालय) रजत मोहन वर्मा ने किया.

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