भारत में इस समय विकास का युग है. सभी सरकारें, नेता व पार्टियां विकास की ही बातें कर रही हैं, लेकिन मध्यप्रदेश ने इसे कर भी दिखाया. 11वीं पंचवर्षीय के जो विकास लक्ष्य निर्धारित किये गये थे, उन्हें दो साल पहले ही प्राप्त कर लिया. दुनिया में भारत और चीन के बीच विकास की दौड़ चल रही है, जिसमें फिलहाल चीन आगे चल रहा है, लेकिन भारत भी बहुत पीछे नहीं है- इस बात की संभावनाएं बनी हुई हैं कि भारत कभी भी इस दौर में आगे भी निकल सकता है. मामला प्रतिस्पर्धा में नहीं चल रहा है- दोनों अपनी-अपनी सामथ्र्य से इसमें जुटे हैं.

देश के अन्दर भी सभी राज्य अपनी-अपनी सम्पदा व साधनों से विकास में जुटे हैं. उनमें भी आपस की प्रतिस्पर्धा जैसी कोई बात नहीं है. मध्यप्रदेश विकास की इस गति में आगे चल रहा है. विपरीत राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय परिस्थितियों में देश की विकास दर घटकर 8-7 प्रतिशत के इर्द-गिर्द चल रही है. मध्यप्रदेश के लिये 11वीं पंचवर्षीय योजना में विकास दर 7.6 प्रतिशत निर्धारित की गई थी. लेकिन मध्यप्रदेश ने 2004-05 के आधार वर्ष पर निर्धारित दर से कहीं ज्यादा लगातार तीन वर्ष में 9 प्रतिशत की विकास दर प्राप्त कर ली. साथ ही यह वातावरण भी बन गया है कि योजना के आगामी बचे वर्षों में यह बढ़कर 10.06 प्रतिशत हो जायेगी. सन् 2006-07 के मूल्यों पर राज्य का योजना फन्ड 70 हजार 239 करोड़ का था जो वर्तमान मूल्यों पर 86 हजार 187 करोड़ का हो गया.

इस वर्ष राज्य में वर्षा भी बहुत अच्छी हुई है. उसका क्षेत्रवार व महीनों के अनुसार वितरण… भी अच्छा था. राज्य के किसी भी जिले में सूखे की स्थिति नहीं है. कृषि पर आधारित चावल, तेल, कपास व शक्कर मिलें उत्पादन में वृद्धि दर्शा रही हैं. मध्यप्रदेश में 10वीं पंचवर्षीय योजना में प्रति व्यक्ति आय 4.83 प्रतिशत की वार्षिक दर थी जो अब बढ़कर 7.93 प्रतिशत हो गई है. राज्य में विकास की संभावनाओं में पिछले तीन साल की प्रगति के मुकाबले आने वाले वर्षों में प्रगति व विकास की रफ्तार और
तेज रहेगी.

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