पिछले कुछ वक्त में डीजल कारों की सेल में जबर्दस्त बूम आया है। इसकी वजह यह है कि डीजल इंजन वाली कारों को चलाने का खर्च पेट्रोल के मुकाबले आधे से भी कम पड़ता है। यही वजह है कि कीमत करीब 1 लाख रुपये ज्यादा होने के बावजूद लोग जमकर डीजल कारें खरीद रहे हैं। उधर , पेट्रोल और डीजल के दामों में भी करीब 30 रुपये का फर्क है। हालांकि अब डीजल के 5 रुपये महंगा हो जाने से यह अंतर थोड़ा कम हुआ है , लेकिन इसके बावजूद डीजल के गाड़ी चलाने अभी भी फायदे का सौदा है।

रनिंग कॉस्ट में कितना फर्क : एक छोटी डीजल हैचबैक कार करीब 18-20 किमी / लीटर का माइलेज देती है। दाम बढऩे से पहले इन्हें चलाने का खर्च करीब 2 रुपये प्रति किमी आता था और 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद अब इसी कार को चलाने का खर्च 2.25 पैसे प्रति किमी आएगा यानी 25 पैसे प्रति किमी ज्यादा खर्च करने होंगे। इसी तरह एक डीजल सेडान कार को चलाने का खर्च पहले 2.65 रुपये प्रति किमी पड़ता था (15 किमी / लीटर के माइलेज के हिसाब से ) । दाम बढऩे के बाद अब यह 3 रुपये प्रति किमी पड़ेगा।

पेट्रोल से मुकाबला : पेट्रोल से चलने वाली कार का खर्च काफी ज्यादा होता है। डीजल से मुकाबले में यह अभी भी काफी महंगा पड़ेगा। अगर आपकी इसी छोटी कार में पेट्रोल इंजन लगा हो तो प्रति किमी खर्च करीब 5 रुपये बैठता है। यानी अभी भी इन दोनों की रनिंग कॉस्ट में काफी फर्क है। इसके अलावा ऐसी भी संभावना है कि पेट्रोल के दामों में भी जल्द और बढ़ोतरी हो सकती है। तब यह फर्क और ज्यादा बढ़ जाएगा। फिलहाल डीजल के दामों में बढ़ोतरी के बाद डीजल कारों की बिक्री में कोई फर्क पडऩे की संभावना नहीं है।

Related Posts: