मध्य प्रदेश सरकार फसलों के भंडारण में हो चुकी भारी गफलत के बाद अब उनके भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था कर रही है. समर्थन मूल्य से सरकारी खरीदी का दौर शुरू होते ही किसानों ने अपनी उपज बेचने के लिये सरकारी माध्यम को ही व्यापारियों में ऊपर महत्व दिया और शोषण से मुक्ति पाई. अन्यथा प्रारंभ से यह होता आता रहा है कि फसल आने के समय अनाज के व्यापारी आपसी गोलबंदी करके अनाज कम भाव पर खरीदते थे और खरीदी संपन्न हो जाने के बाद उसे भंडारण में रोक कर ऊंचे भाव पर बेचते थे. इसमें उपजकर्ता किसान और आम उपभोक्ता का व्यापारिक शोषण होता रहा. समर्थन मूल्य खरीदी व्यवस्था में अभी और सुधार की जरूरत है. सरकार एक लक्ष्य तक खरीदी करती है, उसके बाद व्यापारी खरीदते हैं, जो सरकार के समर्थन मूल्य से कम होता है.

इसके अलावा मंडियों में अनाज उठाकर भंडार गृह की ले जाने की व्यवस्था भी चरमरा गई. एक तो इतने ट्रक ट्राली उपलब्ध नहीं हुये. दूसरी ओर भंडारगृह ही नहीं थे, जहां अनाज को ले जाया जा सके. नतीजा यह हुआ कि अनाज खुले में पड़ा रहा और बरसात हो जाने से अनाज भी काफी खराब हुआ. संसद और सर्वोच्च न्यायालय तक सरकार की खिंचाई हो गई. अब सरकार ने भंडारण व्यवस्था जमा ली है और यह अनुमान भी होता है कि इस वजह से मंडियों में परिवहन भी समय पर हो जायेगा. साथ ही जुलाई के काम में और इलेक्ट्रानिक तराजू व स्टाक लगाया जायेगा.

समर्थन मूल्य से सरकार और किसान सीधे संपर्क में आ गये हैं और बिचोलियो व्यापारियों की भूमिका गौड़ हो गई है. इस रबी सीजन में गेहंू के भंडारण के लिये निजी गोदाम मालिकों को उनके गोदामों के इतने माल के लिये न्यूनतम साढ़े तीन माह की गारंटी दी जायेगी. राज्य शासन का पिछले साल समर्थन मूल्य पर 50 साल मीट्रिक टन गेहूं खरीदते का लक्ष्य था. अब सरकार ने 60 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है.  भंडारण की जो व्यवस्था की गई है उसके मुताबिक 30 साल मीट्रिक टन निजी गोदामों में 20 लाख मीट्रिक टन सरकारी गोदामों में और 10 लाख मीट्रिक टन केप्स बनाकर भंडारित किया जायेगा. निजी गोदामों का क्रय लाटरी के हिसाब से किया जायेगा और उसी आधार पर उसे भरने व निकालने की कार्यवाही होगी.

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