नई दिल्ली, 26 अगस्त. क्या उन्मुक्त चंद जल्द ही राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने में सफल रहेंगे. अभी तक का चलन देखा जाए तो भारत को अंडर-19 विश्व कप में विजेता बनाने वाली टीम के कप्तान को छह महीने के अंदर ही राष्ट्रीय टीम में शामिल कर लिया गया तथा उन्मुक्त के कौशल, जज्बे और फार्म को देखते हुए उनका दावा भी मजबूत बन गया है.

उन्मुक्त की अगुवाई में भारत ने टाउन्सविले में आस्ट्रेलिया को चार विकेट से हराकर तीसरी बार अंडर-19 विश्व कप जीता. इससे पहले भारत ने 2000 में मोहम्मद कैफ और 2008 में विराट कोहली की कप्तानी में जूनियर विश्व कप जीता था. कैफ की कप्तानी में भारत ने 28 जनवरी, 2000 को श्रीलंका को उसकी सरजमीं पर हराकर खिताब जीता था. इसके एक महीने से कुछ दिन बाद ही कैफ को अपना पहला टेस्ट मैच खेलने का मौका मिल गया था.

चयनकर्ताओं ने कैफ को उनके शानदार प्रदर्शन का इनाम देते हुए उन्हें दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज के लिए टीम में शामिल किया और उत्तर प्रदेश के इस बल्लेबाज ने दो से छह मार्च के बीच बेंगलूर में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया. भारत दूसरी बार 2008 में विश्व चैंपियन बना था. कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम ने मलेशिया में खेले गए टूर्नामेंट के फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 12 रन से हराया था. यह मैच दो मार्च को खेला गया था और इसके साढ़े पांच महीने बाद कोहली ने अगस्त, 2008 में श्रीलंका के खिलाफ डाम्बुला में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला. तब से कोहली टीम के नियमित सदस्य बने हुए हैं. अब उन्मुक्त की बारी है जिन्होंने फाइनल में नाबाद 111 रन बनाकर टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. उन्मुक्त 2010 से दिल्ली की रणजी टीम का अहम हिस्सा हैं. उन्होंने अब तक 11 प्रथम श्रेणी मैचों में 43.41 की औसत से 738 रन बनाए हैं जिसमें रेलवे के खिलाफ विषम परिस्थितियों में खेली गई 151 रन की पारी भी शामिल हैं.

इसके अलावा वह इंडियन प्रीमियर लीग में दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए खेलते रहे हैं. भारत का आगे का कार्यक्रम काफी व्यस्त है और ऐसे में उन्मुक्त को राष्ट्रीय टीम में जगह मिल सकती है. वह हालांकि पहले ही भारत-ए टीम में जगह बना चुके हैं. दिल्ली का यह 19 वर्षीय खिलाड़ी अगले महीने भारत ए टीम के साथ न्यूजीलैंड दौरे पर जाएगा और जहां वह अच्छा प्रदर्शन करके राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को प्रभावित करने की पूरी कोशिश करेंगे. भारत तीसरी बार अंडर-19 विश्व चैंपियन बना है. यह कुल नौवां जूनियर विश्व कप था और इन सभी में भारतीय टीम ने शिरकत की है. जूनियर विश्व कप में भारत की अगुवाई करने वाले अन्य खिलाडिय़ों एम सेंतिलनाथन (1988), अमित पगनिस (1998), पार्थिव पटेल (2002), अंबाती रायुडु (2004), रविकांत शुक्ला (2006) और अशोक मनेरिया (2010) में से केवल पार्थिव पटेल ही सीनियर टीम में जगह बनाने में सफल रहे.

अंडर-19 में सर्वाधिक शतक लगाने वाले बल्लेबाज बने उन्मुक्त

भारत की अंडर-19 टीम के कप्तान उन्मुक्त चंद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व कप फाइनल में शतक जड़कर जूनियर वनडे अंतरराष्ट्रीय मैचों में सर्वाधिक शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए. उन्मुक्त का अंडर-19 वनडे मैचों में यह पांचवां शतक है जो कि नया रिकार्ड है. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के कैमरन बैकक्राफ्ट और दक्षिण अफ्रीका के क्विन्टन डि काक को पीछे छोड़ा जिनके नाम पर चार-चार शतक दर्ज हैं. उन्नीस वर्षीय उन्मुक्त ने अंडर-19 के 21 मैच में 67.58 की औसत से 1149 रन बनाए हैं. भारत ने तीसरी बार अंडर-19 का खिताब जीता और इस तरह से उसने ऑस्ट्रेलिया के रिकार्ड की बराबरी की. भारत ने इससे पहले 2000 और 2008 में जूनियर विश्व कप का खिताब जीता था.

ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत दूसरा ऐसा देश बन गया है जिसके नाम पर एक ही समय में सीनियर और जूनियर विश्व कप का खिताब है. भारत की सीनियर टीम ने पिछले साल वनडे विश्व कप जीता था. ऑस्ट्रेलिया की सीनियर टीम ने 1987 में सीनियर विश्व कप का खिताब जीता था जबकि इसके एक साल बाद उसकी जूनियर टीम अंडर-19 का खिताब जीतने में सफल रही थी. यह पहला अवसर है जबकि ऑस्ट्रेलियाई टीम अंडर-19 के फाइनल में पराजित हुई. उन्मुक्त ने टाउन्सविले में खेले गए मैच में नाबाद 111 रन बनाए जिससे भारत ने उसे छह विकेट से हराया.

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