नई दिल्ली, 26 अप्रैल. हर तरह के मौसम, बारिश, तेज गर्मी, कोहरे और चक्रवात में भी तस्वीरें लेने में सक्षम भारतीय उपग्रह रीसैट-1 का इसरो ने सफल परीक्षण किया है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से करीब सुबह 5.45 बजे रीसैट-1 को प्रक्षेपित किया गया।

हर तरह के मौसम में लेगा तस्वीरें-यह इसरो का पहला रेडार इमेजिंग सैटेलाइट होगा जो हर तरह के मौसम, बारिश, तेज गर्मी, कोहरे और चक्रवात में भी तस्वीरें लेने में सक्षम है। 1,858 किलोग्राम वजन वाले उपग्रह का कार्यकाल पांच वर्ष का है। प्रक्षेपण वाहन रीसैट-1 उपग्रह को पृथ्वी से ऊपर 480 किमी की कक्षा में 97.552 डिग्री पर स्थापित करेगा। उपग्रह पर मौजूद उपकरण इसे धक्का देकर 536 किलोमीटर की ऊंचाई पर अंतिम रूप से स्थापित कर देंगे।

अब तक का सबसे भारी उपग्रह-भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (पीएसएलवी) द्वारा प्रक्षेपित किया जाने वाला यह सबसे भारी उपग्रह है। भारत वर्तमान में एक कनाडाई उपग्रह से ली गई तस्वीरों पर निर्भर है क्योंकि घरेलू रिमोट सेंसिंग अंतरिक्ष यान उस वक्त धरती की तस्वीरें नहीं ले सकते जब आकाश पर घने बादल होते हैं।
इसरो के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने कहा कि रेडार इमेंजिंग उपग्रह (रीसैट-1) करीब 1,858 किलोग्राम वजन का है। इसलिए किसी पीएसएलवी के द्वारा प्रक्षेपित किया जाने वाला यह सबसे भारी उपग्रह है। रीसैट-1 की इसके विकास सहित लागत करीब रुपये 378 करोड़ रुपये है। इसके रॉकेट (पीएसएलवी-सी 19) के निर्माण में 120 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इससे यह मिशन 498 करोड़ रुपये को हो गया।

बड़ी सफलता : राधाकृष्णन

श्रीहरिकोटा. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने पीएसएलवी-सी 19 के माध्यम से रीसैट-1 के प्रक्षेपण को देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम में बड़ी सफलता करार दिया है। राधाकृष्णन ने रीसैट-1 के सफल प्रक्षेपण के बाद मिशन कंट्रोल रूम से देश को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यह घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है कि रीसैट-1 मिशन कामयाब रहा।

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