वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने मंगलवर को यहां वैश्विक चीनी उद्योग से चीनी के दाम में अक्सर होने वाले भारी उतार चढाव पर अंकुश लगाने के उपाय करने का आह्वान किया। अंतरराष्ट्रीय चीनी परिषद [आईएससी] के आज यहां 41वें सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक चीनी उद्योग की स्थिति में सुधार लाने के लिए काफी कुछ किए जाने की आवश्यकता है, क्योंकि हम अभी भी ऐसे समय में हैं जिसमें विश्व चीनी बाजार में लगातार मूल्यों में उतार चढाव बना हुआ है।

नई दिल्ली. मुखर्जी ने चीनी परिषद से कहा कि वैश्विक चीनी क्षेत्र के विकास और उसमें स्थायित्व लाने के लिए उसे कदम उठाने चाहिए। अंतरराष्ट्रीय चीनी परिषद एक वैश्विक संस्था है जो कि पूरी दुनिया में चीनी उद्योग के विकास के लिए काम करते है। यह अंतरराष्ट्रीय चीनी संगठन की संचालन समिति है। भारत इसका 1993 से सदस्य है। वित्त मंत्री ने कहा कि मूल्य स्थिरता के लिए बेहतर सूचना इसका सबसे मजबूत औजार है। ऐसे में मैं आईएससी से कहूंगा कि वह मांग एवं आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय नीतियों व चीनी उत्पादन के मामले में वास्तविक अनुमान के बाद उसमें व्यापारिक प्रतिस्पर्घात्मकता के बारे में परीक्षण करने और उनका विश्लेषण करना चाहिए।

मुखर्जी ने विकासशील देशों में चीनी उत्पादन की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए चीनी प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास क्षेत्र में वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने इस अवसर पर चीनी की गुणवत्ता में सुधार, रिकवरी स्तर, चीनी उत्पादन में पर्यावरण और ऊर्जा आदि की खपत पर और ध्यान दिए जाने पर भी जोर दिया। खाद्य मंत्री केवी थामस ने इस मौके पर घरेलू चीनी उत्पादन की चक्रीय प्रकृति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह हमारा अथक प्रयास है कि बहुआयामी नीतिगत हस्तक्षेप के जरिए चीनी उत्पादन में हर दो-तीन साल बाद आने वाले चक्रीय उतार चढाव को समाप्त कर दिया जाए।

चीनी उद्योग में चीनी के साथ बनने वाले सह उत्पादों जैसे इथनाल के बारे में थामस ने कहा सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों के बीच प्रौद्योगिकी उन्नयन के बारे में सूचनाओं के आदान प्रदान से भारत में गन्ना फसल का पूरा फायदा उठाया जा सकेगा। भारत दुनिया को दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है जबकि सबसे बड़ा उपभोक्ता है। चीनी विपणन वर्ष [अक्टूबर से सितंबर] 2011-12 के बीच देश में कुल दो करोड़ 52 लाख टन चीनी उत्पादन होने का अनुमान है, जबकि सालाना खपत दो करोड 20 लाख टन तक है। देश में चीनी का उत्पादन इस बार खपत से अधिक रहने का अनुमान देखते हुए सरकार ने इस साल 30 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी है।

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