नवभारत समाचार सेवा जोधपुर 1 अक्टूबर. पाकिस्तान और चीन से मिल रही चुनौती के मद्देनजर भारतीय वायुसेना बड़ी पहल कर रही है. अब पाकिस्तान से सटे जोधपुर (राजस्थान) के आसमान पर लड़ाकू विमान सुखोई-30 की दहाड़ सुनने को मिलेगी.

यहां वायुसेना के बेड़े में सुखोई के शामिल होने के साथ ही मार करने की उसकी क्षमता काफी बढ़ जाएगी और अपनी वायुसीमा की सुरक्षा व्यवस्था भी पुख्ता हो जाएगी. भारत-पाक सीमा पर जोधपुर एक प्रमुख एयर बेस है. ऐसे में यहां सुखोई के बेड़े में शामिल होने से जरूरत पडऩे पर भारत मिनटों के भीतर दुश्मन के छक्के छुड़ा सकता है. वायुसेना ने लोहेगावं और बरेली स्थित अपने स्टेशनों को सुखोई एमकेआई 30 के लिए स्क्वाड्रन तैयार करने के बेस के रूप में चुना है. इसी के तहत 31 स्क्वाड्रन ‘द लॉयन को लोहेगांव (पुणे) एयरबेस से जोधपुर शिफ्ट किया गया है. जोधपुर एयरबेस से सुखोई-30 मात्र सात मिनट में पाक सीमा तक पहुंच सकता है.

वायुसेना सूत्रों के अनुसार यहां अगले साल अपग्रेड सुखोई भी शामिल किए जाएंगे. इस लड़ाकू विमान की खासियत इसी से समझी जा सकती है कि सुखोई एक घंटे में 2450 किमी तक पहुंच जाता है.

देश की पश्चिमी सीमा के लिए यह काफी अहम होगा. एक बार उड़ान भरने के साथ वह आठ हजार किलो तक के हथियार लेकर 5200 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है.

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