• वतन वापसी

नई दिल्ली, लंदन ओलंपिक खेलों की बैडमिंटन प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचने वाली भारतीय स्टार साइना नेहवाल का मंगलवार को स्वदेश लौटने पर जोरदार स्वागत किया गया.

साइना आज तड़के ब्रिटिश एयरवेज की उड़ान से यहां पहुंचीं, साइना के साथ उनके पिता हरवीर सिंह, कोच पुलेला गोपीचंद और कई सुरक्षाकर्मी थे. इस 20 वर्षीय खिलाड़ी के चेहरे पर लंबी उड़ान के कारण थकान नहीं थी और उन्होंने मुस्करा कर प्रशंसकों का अभिवादन किया. इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर साइना की झलक पाने के लिये प्रशंसकों की भीड़ इक_ा थी. वह वहीं से अपने गृह नगर हैदराबाद के लिये रवाना हो गयीं.

साइना ने लंदन ओलंपिक के महिला एकल में तीसरे स्थान के मैच में दुनिया की नंबर दो चीनी खिलाड़ी शिन वैंग के आधे मैच से हटने के बाद कांस्य पदक जीता था. वैंग पहला गेम जीतने के बाद चोटिल हो गयी थीं जिसके बाद उन्होंने हटने का फैसला किया था.
साइना इस तरह से भारोत्तोलक कर्णम मल्लेश्वरी (सिडनी 2000 में कांस्य) के बाद ओलंपिक में पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बनीं. साइना के साथ ही अन्य बैडमिंटन खिलाड़ी पी कश्यप, ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा भी स्वदेश पहुंचे, कश्यप ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में हार गये थे.

लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर स्वदेश लौटी देश की शीर्ष बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल ने भव्य स्वागत के बीच कहा कि ओलंपिक पदक जीतने से उनका आत्मविश्वास बढ़ गया है और इस कारण वह आगामी प्रतियोगिताओं में ज्यादा सहज होकर खेल सकेंगी.
कोच पुलेला गोपीचंद और पिता हरवीर सिंह के साथ यहां मौजूद सायना ने संवाददाताओं से कहा यह तो अभी शुरुआत है. मुझे देश के लिए अभी बहुत से पदक जीतने हैं और भरोसा है कि मैं पदक का रंग बदलने में जरूर कामयाब रहूंगी. विश्व की नंबर पांच खिलाड़ी सायना ने कहा मैं इस कामयाबी और समर्थन के लिए अपने माता, पिता तथा गोपी सर का धन्यवाद करती हूं.

मैंने इसके लिए काफी मेहनत की है और सबकी दुआओं से कामयाब हुई हूं. सायना तड़के लंदन से ब्रिटिश एयरवेज की उड़ान से दिल्ली पहुंची थी और वहां से सीधे हैदराबाद आ गयी. हवाई अड्डे पर उनके स्वागत के लिए भारी भीड़ उमड़ी थी जहां से उन्हें और गोपीचंद को रथ की तरह सजाई गई बस की छत पर गोपीचंद अकादमी तक लाया गया. पदक मिलने से उत्साहित सायना ने कहा ओलंपिक बड़ी चुनौती होती है. हम सबने इसके लिए काफी तैयारी की और अच्छी कोशिश की. हमने कोई खराब प्रदर्शन नहीं किया. मैंने अपनी पूरी ताकत झोंकी. ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने भी अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन दुर्भाग्य से जीत नहीं पायीं. उन्होंने कहा अभी बहुत सफर बाकी है. उम्मीद है कि मैं अगला ओलंपिक खेल पाऊंगी और तब शायद रजत या स्वर्ण जीत सकूंं. इस बार दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खिलाडिय़ों के खिलाफ खेलने से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है. सायना ने कहा मैं पिछले वर्ष रैंकिंग में नंबर तीन तक गयी थी. यह अच्छा था. अब ओलंपिक में नंबर तीन पर रही हूं. इस सिलसिले को आगे बढ़ाना है. इसके लिए पूरी कोशिश करुंगी. यह आगे बढऩे का और देश के लिए ज्यादा से ज्यादा पदक जीतने का समय है.

ओलंपिक में भारत के लिए पहली बार बैडमिंटन का पदक जीतने वाली कांस्य विजेता ने कहा कि हर कोई हमेशा ही स्वर्ण जीतना चाहता है लेकिन सबके लिए यह संभव नहीं. मैं पोडियम तक पहुंच कर खुश हूं. यह एक बड़ी उपलब्धि है.

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