भोपाल, 14 सितंबर. देशभर के प्रमुख किसान संगठनों ने रासायनिक खाद पर सब्सिडी को बंद कर जैविक कृषि को समर्थन देने की मांग की है. किसानों को परम्परागत बीज के मामले में आत्म्निर्भर बनाने के लिए गाँव स्तर पर बीज बैंक बनाने और हर राज्य में किसान आय आयोग बनाने की मांग भी की गई है. इसके साथ ही किसान संगठनों पर्यावरण के अनुकूल जैविक खेती की स्कूली शिक्षा का अंग बनाने के कदम उठाए जाएं.

ये मांग गुरुवार को भोपाल में समाप्त हुए दूसरे राष्टरीय किसान स्वराज सम्मेलन में पारित नीतिगत प्रस्ताव में शामिल की गई है. प्रस्ताव को मध्यप्रदेश समेत 15 राज्यों से आए 400 किसान प्रतिनिधियों, यूनियन नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शोधकर्ताओं ने सर्वसम्मति से पारित किया. खेती से जुड़े प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार राज्य और जिला स्तर पर एकजुट प्रयास करने पर सभी किसान संगठनों से सहमति जताई. सम्मेलन में जैविक खेती करने वाले मध्यप्रदेश के चार सफल किसानों समेत देशभर के किसानों का सम्मान किया गया.

अलायंस फार सस्टेनेबल एंड हालिस्टिक एग्रीकल्चर आशा और बीज स्वराज अभियान मध्यप्रदेश एवं भोजन का अधिकार अभियान म.प्र. के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में प्रतिभागी किसान यूनियनों और किसान नेताओं के तीन अलग-अलग समूहों के बीच छह दौर की बातचीत के बाद किसान स्वराज नीति के मसौदे पर सहमति बनी. किसानों ने एकमत से कहा कि उन्हें उनके बीजों पर बाहरी कंपनियों का मालिकाना हक मंजूर नहीं होगा. उन्होंने केन्द्र सरकार के प्रस्तावित बीज विधेयक में बीज को लेकर आत्म निर्भरता, सामुदायिक सीड बैंक बनाने जैसे संशोधनों के सुझाव पेश किए जिसे सम्मेलन में मंजूरी दी गई. रासायनिक खाद और कीटनाशकों के पर्यावरण पर पड़ रहे दुष्परिणाम की चर्चा करते हुए सम्मेलन में खाद पर दी जा रही सब्सिडी को बंद कर पर्यावरण के लिए सुरक्षित जैविक खेती को समर्थन देने और इस पर बजट में खर्च बढ़ाए जाने की मांग की गई. किसान संगठनों ने कहा कि सरकार पेड़ पौधों, फसल और पशुधन को एकीकृत करने की नीति बनाएं. बीज के साथ पशुधन का भी संरक्षण हो और गाँव स्तर पर बनने वाले बीज बैंक की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की मांग भी की गई.

किसान नेताओं ने कहा कि जैविक खाद की कमी से निपटने के लिए देश की सभी पंचायतों में एक गौशाला का प्रावधान किया जाना चाहिए. जिसमें गोबर और गौमूत्र से खाद तैयार की जा सके. उन्होंने कहाकि जैविक खेती को स्कूली शिक्षा का अंग बनाया जाना चाहिए. जिससे भावी पीढ़ी इसके फायदों से अवगत हो सके. किसानों की आय सुनिश्चित करने की लेकर पारित प्रस्ताव में कृषि मजदूरी और छोटे किसानों की मजदूरी का न्यूनतम मूल्य सरकारी कर्मचारी के न्यूनतम वेतन के बराबर करने की मांग की गई.

इसी के मुताबिक समर्थन मूल्य को बढ़ाने किसानों को छठवें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन के बराबर आमदनी की गारंटी देने, असिंचित क्षेत्र के किसानों के लिए एक समग्र नीति तैयार करने और इन किसानों को उत्पादक बोनस देने की मांग भी उठी, जिसे सम्मेलन में सर्वसम्मति से पारित किया गया. सम्मेलन के आखिरी दिन जैविक खेती में कीर्तिमान अर्जित करने वाले मध्यप्रदेश में झाबुआ के तेज सिंह देवा, झाबुओं के ही गोबा कोका, हरीश तिवारी और छतरपुर गांधी आश्रम के संजय सिंह के साथ देश के विभिन्न राज्यों के 25 किसानों को सम्मानित किया गया. इस आयोजन में शेतकरी संगठन के अध्यक्ष विजय जावडिय़ा पश्चिम ओडिशा किसान संगठन के नेता सरोज मोहंती, आंध्रप्रदेश तेलगु देशम किसान यूनियन के अध्यक्ष नल्लामल्ला वेंकटेश्वर राव, कर्नाटक राज्य रैयत संगला के नेता भक्त वत्सलम समेत किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई नेताओं ने भाग लिया.

Related Posts: