नयी दिल्ली, 31 अगस्त, नससे.  कोयला आवंटन पर मुलायम सिंह यादव ने तीसरा मोर्चा खोलकर बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. मुलायम लेफ्ट पार्टी, टीडीपी और कई विपक्षी दलों के साथ संसद में धरना दे रहे हैं. वे कोयला आवंटन के लाइसेंस रद्द किए जाने व इस मामले की उच्चस्तरीय जांच  की मांग कर रहे हैं.

मुलायम ने दावा किया कि बीजेडी और एआईएडीएमके भी इस मामले में उनके साथ हैं.  श्री यादव ने कहा हमारी मांग है कि उच्चतम न्यायालय के किसी मौजूदा न्यायाधीश या सीबीआई को मामले की जांच करनी चाहिए. यदि वे जांच का आदेश नहीं देते हैं तो हम राष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष करेंगे और मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएंगे. यह पूछे जाने पर कि क्या ये दल भविष्य में भी एक साथ रहेंगे या यह तीसरे मोर्चे की शुरुआत है. उन्होंने कहा यह जारी रहेगा और आप जो भी सोचना चाहें आप सोच सकते हैं.

उन्होंने कहा हम चाहते हैं कि कोल ब्लाक लाइसेंस को रद्द किया जाना चाहिए और इस मुद्दे पर संसद में बहस हो. यादव ने कहा कि सरकार की दोनों सदनों में जवाबदेही तय होनी चाहिए. माकपा नेता सीताराम येचुरी ने भाजपा और कांग्रेस के बीच मैच फिक्सिंग के आरोपों को दोहराते हुए कहा कि ये दोनों अपनी कारगुजारियों पर पर्दा डालने के लिए संसद को नहीं चलने देना चाहतीं. सपा नेता मुलायम के साथ आने से तीसरे मोर्चे की तरफ बढऩे के संकेतों के बारे में पूछे जाने पर येचुरी ने कहाए अभी यह नहीं कह सकते कि यह क्या रुख लेगा. अभी तथ्य यह है कि हम इस मुद्दे पर एक हुए हैं.

भाकपा नेता गुरूदास दासगुप्ता ने कहा भ्रष्टाचार और संसदीय लोकतंत्र को नष्ट करने के प्रयासों से लडऩे के लिए हम एकजुट हैं. यह केवल संसद में ही नहीं होगा बल्कि बाहर भी होगा. यह एक नए दिन और नए युग की शुरुआत है. तेदेपा नेता नामा नागेश्वर राव ने कहा हम चाहते हैं कि सरकार कोल ब्लाकों के आवंटन को रद्द करे. उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक में लौह अयस्क की लूट में कांग्रेस और भाजपा दोनों शामिल हैं.

विरोध करने के नाम पर मुलायम जनता को भ्रमित कर रहे है-भाजपा

संयुक्त मोर्चा के तत्वाधान में सपा सुप्रीमो मुलामय सिंह यादव, वाम नेताओं और तेदेपा द्वारा सता और विपक्ष के खिलाफ धरना प्रदर्शन करने के बाद भाजपा ने कहा कि विरोध कर रही पार्टियां कांग्रेस बी के रूप मे काम कर रही है. भाजपा प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने कहा कि जनादेश सरकार चलाने के लिए होती है, भ्रष्टïचार करने के लिए नहीं. उन्होंने कहा कि मुलायम के नेतृत्व में तथाकथित संयुक्त मोर्चा केवल दिखावट के लिए विरोध करती है. सता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष में भी अपनी भूमिका अदा करना चाहती है ताकि जनता का समर्थन पा सके. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता है कि कोई भी पार्टी सरकार के साथ भी रहे और विपक्ष की भूमिका भी अदा करे. यदि ऐसा है तो राष्ट्रपति भवन में यूपीए के लिए दी गई समर्थन की चिट्ठी को तुरंत वापस लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार के हरेक मोड़ पर वाम नेता और सपा सरकार कांग्रेस के साथ खड़ी रही है ऐसे में विरोध केवल जनता को दिग्भ्रमित करने के लिए ही है.

भाजपा ने प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई

भाजपा ने आज फिर दोहराया कि कोयला ब्लाक आवंटन में कथित अनियमितता पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक  की रिपोर्ट के आलोक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए और यह लड़ाई नहीं रुकेगी. भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि राजग की मांग है कि कोयला ब्लाक आवंटन मामले में प्रधानमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए और सभी कोयला ब्लाकों के आवंटन को रद्द किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा हम इस मांग पर कायम हैं. इस मामले में पूरा राजग एकजुट है. यह पूछे जाने पर कि वाममोर्चा समेत अन्य विपक्षी दल संसद में चर्चा चाहते हैं और भाजपा अलग थलग दिख रही है सिन्हा ने कहा वाममोर्चा समेत अन्य गैर राजग दलों ने भी कोयला ब्लाक आवंटन को रद्द करने की मांग की है. यह हमारी दो अहम मांगों में से एक है. इसलिए अलग थलग पडऩे का कोई सवाल नहीं है. उन्होंने कोयला ब्लाक आवंटन मामले में अपना विरोध जारी रहने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा राजग एकजुट है और इस लड़ाई को पुरजोर तरीके से आगे बढ़ाया जायेगा. सिन्हा ने कहा हम अपनी दोनों मांग पर कायम हैं. इसमें पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है.

सीएजी विनोद राय की है राजनीतिक महत्वाकांक्षा

नई दिल्ली, 31 अगस्त.  कोल ब्लॉक आवंटन को लेकर कैग रिपोर्ट आने के बाद कांग्रेस के लिए भारी मुश्किलें खड़ी हो गई है और विपक्ष का हमलावर रुख बना हुआ है. वहीं, कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने अब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक  विनोद राय के खिलाफ एक नया मोर्चा खोल दिया है.

दिग्विजय सिंह ने राय पर हमला बोलते हुए कहा कि विनोद राय राजनीतिक महत्वाकांक्षा पाल रहे हैं. कोयला ब्लॉक आवंटन पर कैग के आंकड़े तथ्य से परे हैं. दिग्विजय ने कहा कि साल 1989 में टीएन चतुर्वेदी ने बोफोर्स तोप को लेकर एक रिपोर्ट को पेश किया था और सेवानिवृत्ति के बाद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे.

बाद में वह संसद के सदस्य बने और फिर कर्नाटक के राज्यपाल नियुक्त किए गए.
कांग्रेस महासचिव ने एक बातचीत में कहा कि जिस रास्ते पर कैग जा रहा है, उससे यह स्पष्ट है कि टीएच चतुर्वेदी की तरह विनोद राय की राजनीतिक महत्वाकांक्षा है. वह एक मनगढ़ंत आंकड़े दे रहे हैं, जिसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है. उन्?होंने किस प्रकार इस आंकड़े का गणन किया, यह समझ से परे है. कैग रिपोर्ट सामने आने के बाद यह पहली बार है कि किसी वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने खुलेआम विनोद राय पर हमला बोला है.

गौर हो कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने बीते हफ्ते कोयला ब्लॉक आवंटन, रिलायंस पावर को अतिरिक्त कोयले की आपूर्ति और दिल्ली एयरपोर्ट से संबंधित डायल को लेकर एक ऑडिट रिपोर्ट पेश की. इनमें कुल मिलाकर सरकारी खजाने को 3.81 लाख करोड़ रुपये की चपत लगने की बात सामने आई है.

राज्य विकास के लिए सिफारिश की थी

कोयला ब्लॉक आवंटन को लेकर आई सीएजी की रिपोर्ट के बाद सुबोध कात सहाय ने अपने ऊपर लगे आरोप को लेकर सफाई देते हुए कहा कि वह झारखंड से सांसद हैं. राज्य के विकास के लिए उन्होंने एसकेएस कंपनी को कोल ब्लॉक दिए जाने की सिफारिश की थी. पाच फरवरी 2008 को सहाय ने पत्र लिखकर आवंटन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सीधे हस्तक्षेप करने को कहा था. सहाय ने एसकेएस इस्पात स्टील प्लाट्स के लिए झारखंड व छत्तीसगढ़ में कोयला खदान की मांग की थी. गौरतलब है कि श्री सहाय के पत्र के अगले ही दिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने सहाय के पत्र को कोयला मंत्रालय को भेज दिया था. 7 फरवरी को स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक हुई. इसमें एसकेएस की अर्जी पर विचार हुआ.

इस बैठक में सहाय के भाई सुधीर सहाय बतौर एसकेएस निदेशक शामिल हुए थे. तीन महीने बाद सहाय के भाई की कंपनी को कोयला खदान आवंटित हो गई. कुछ महीने बाद एसकेएस की विरोधी कंपनी मामले को कोर्ट में ले गई. इस साल मई में दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि फतेहपुर कोल ब्लॉक आवंटन को लेकर सहाय के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता. कोर्ट से सहाय को राहत मिली गई लेकिन अभी तक यह नहीं बताया गया है, क्यों और कैसे विजय सेंट्रल में दूसरी खदान आवंटित की गई.

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