आम आदमी यह जानना चाहता है कि क्या ”स्वाइन फ्लू” सुअर से फैलता है. बर्ड फ्लू मुर्गी से, मेड काऊ फ्लू गाय से, डेंगू दिन में काटने वाले साफ पानी के मच्छर से फैलता है. वैसे आमतौर पर एक मौसम जाने और दूसरे मौसम के आने की संधिकाल या मिलन काल में मच्छरों से वायरल फ्लू का संक्रमण व आक्रमण फैलता ही है. हर आदमी ”वायरल” की मामूली सर्दी-खांसी-हल्की हरारत का अभ्यस्त हो चुका है. बड़ी बेफिक्री से सोचता है कि दो चार दिन में इलाज करनेे या न करने पर भी ठीक हो जाएगा. लेकिन स्वाइन फ्लू के जो लक्षण बताये जा रहे हैं वे वायरल फ्लू जैसे ही लगते हैं.

फ्लू में सबसे बड़ी परेशानी यह होती है कि इसकी रफ्तार बहुत तेज होती है. कुछ वर्षों पूर्व चीन में बर्ड फ्लू की शुुुरुआत हुई थी. वह देखते ही देखते सारी दुनिया में फैल गया. करोड़ों अरबों रुपये की मुर्गियां सभी देशों में तुरंत मार दी गईं. मध्यप्रदेश में इस समय स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है. आम आदमी को यह भी जानकारी दी जानी चाहिए कि एकाएक यह कहां से आ गया. इसके इलाज के व्यापक प्रबंध भी किये जा रहे हैं लेकिन यह भी पता चलना चाहिए कि इसे फैलने से रोकने के लिए लोगों को क्या करना है. हिदायत के तौर पर कहना तो बहुत आसान है कि भीड़भाड़ वाले जगहों से दूर रहें लेकिन आज की जिंदगी में भीड़भाड़ से दूर रहना उतना ही मुश्किल है. आज तो हर दफ्तर और सड़क पर भीड़भाड़ ही है. अगर मास्क पहनना जरूरी है तो इसे अनिवार्य कर देना चाहिए. साथ ही सार्वजनिक तौर पर जगह-जगह फ्री या बहुत कम मूल्य पर यह सभी लोगों को उपलब्ध करा दिये जाएं.

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