नई दिल्ली, 6 जनवरी. सुप्रीम कोर्ट ने आरुषि हत्याकांड में उसके माता-पिता राजेश तलवार और नूपुर तलवार के खिलाफ मुकदमा चलाए जाने को हरी झंडी दे दी है। अदालत ने तलवार दंपति की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द किए जाने का आग्रह किया था। डॉक्टर राजेश और नूपुर तलवार ने गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट के उस समन को चुनौती दी थी, जो कोर्ट ने फरवरी, 2010 में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए जारी किया था।

उस वक्त सीबीआई ने कहा कि था उसे इस हत्याकांड में किसी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले, इसलिए इस केस को बंद कर दिया जाए। लेकिन साथ ही सीबीआई ने संकेत दिए कि हो सकता है कि राजेश तलवार ने आरुषि की हत्या की हो। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि राजेश और नुपूर तलवार को आरोपी माना जा सकता है। कोर्ट ने तलवार दंपती पर हत्या और सबूत मिटाने का मामला चलाने की हरी झंडी देते हुए समन जारी किया, लेकिन आरुषि के माता-पिता सुप्रीम कोर्ट गए, जहां से उन्हें अंतरिम राहत मिल गई। लेकिन आज न्यायमूर्ति एके गांगुली और न्यायमूर्ति जेएस खेखर की पीठ ने इस दंपति की याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि मजिस्ट्रेट के दंपति पर मुकदमा चलाने के आदेश में कुछ भी गलत नहीं है। निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए पीठ ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए फैसला दिया है। पीठ ने कहा, ‘हम याचिका को खारिज करते हैं।’ इसके साथ ही पीठ ने स्पष्ट किया कि आज के आदेश से आरोपियों के खिलाफ चलाए जाने वाले मुकदमे में कोई पूर्वाग्रह नहीं पाला जाना चाहिए।

तलवार दंपति की 14 वर्षीय इकलौती पुत्री आरुषि 15-16 मई, 2008 की दरमियानी रात नोएडा स्थित अपने घर में मृत पाई गई थी। परिवार के घरेलू नौकर हेमराज का शव भी अगले दिन घर की छत पर मिला था। शुरुआत में इस मामले की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस ने की थी। उत्तर प्रदेश पुलिस ने 23 मई, 2008 को आरुषि के पिता राजेश तलवार को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद 29 मई, 2008 को जांच सीबीआई को सौंप दी गई। गाजियाबाद की अदालत ने 11 जुलाई, 2008 को राजेश तलवार को जमानत दे दी। सीबीआई ने ढ़ाई साल की जांच के बाद गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत में इस मामले में यह कहते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी कि उसे ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे तलवार दंपति पर मुकदमा चलाया जा सके। गाजियाबाद की निचली अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि दंपति पर मुकदमा चलाने के लिए रिपोर्ट में प्रथमदृष्टया कई तत्व मौजूद हैं।

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