लखनउ, 6 जुलाई. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट दसवीं और बारहवीं पास छात्र.छात्राओं को टैबलेट और लैपटाप देने के लिए आज सरकार ने शासनादेश जारी करते हुए इसके क्रय के लिए राज्य के इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन लिमिटेड को अधिकृत कर दिया।

टैबलेट और लैपटाप की गुणवत्ता की देखरेख के लिए कम से कम पांच सदस्यों की एक टीम बनायी गयी है जिसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान.आईआईटी. कानपुर. भारतीय प्रबन्धन संस्थान.आईआईएम. लखनऊ. एनआईसी. यूपीडेस्को और यूपी इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन लिमिटेड के सदस्यों को नामित किया गया है. टैबलेट और लैपटाप के आपूर्तिकर्ता को तहसील स्तर पर सर्विस सेन्टर स्थापित करने की शर्त रखी गयी है

शासनादेश के मुताबिक इसके वितरण के लिए जिला स्तर पर एक समिति होगी जिसका अध्यक्ष जिलाधिकारी को बनाया गया है. समिति में शासन द्वारा नामित जनप्रतिनिधि. मुख्य विकास अधिकारी. अपर जिलाधिकारी. कोषाधिकारी. सूचना विज्ञान अधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक होंगे. जिला विद्यालय निरीक्षक पदेन समिति के सचिव होंगे.

जिलाधिकारियों को समिति में विशेषज्ञ नामित करने की छूट दी गयी है. योजना की सफलता के लिए विशेष परियोजना क्रियान्वयन इकाई का गठन किया गया है. माध्यमिक शिक्षा विभाग के सचिव योजना के समन्वयक के रुप में काम करेंगे.मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने राज्य के सभी मण्डलायुक्तों. जिलाधिकारियों और माध्यमिक शिक्षा निदेशक को शासनादेश भेज दिया है.

शासनादेश में कहा गया है कि क्रय एजेंसी की जिम्मेदारी होगी कि तकनीकी समिति की संस्तुतियों के आधार पर क्रय करने की व्यवस्था करे. इसके लिए ग्लोबल टेण्डर निकालने की भी हिदायत दी गयी है. आपूर्तिकर्ता को समय पर टैबलेट और लैपटाप देने की बाध्यता होगी. आपूर्तिकर्ता को कम से कम पांच प्रतिशत टैबलेट और लैपटाप तहसील स्तर पर निरीक्षण करवाना होगा. आपूर्तिकर्ता ही प्रत्येक विद्यालय के एक या दो अध्यापकों को प्रशिक्षण करायेगा और उसके प्रयोग का मैनुअल भी तैयार करायेगा. छात्र-छात्राओं की सूची बनाने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग को सौंपी गयी है. सूची की एक एक प्रति शासन को और उ.प्र. इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन को भी सौंपनी होगी.

शासनादेश के अनुसार सबसे पहले राजकीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को उसके बाद अशासकीय सहायता प्राप्त. मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त अरबी तथा फारसी मदरसे तथा माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त स्कूलों के छात्रों को योजना का लाभ मिलेगा. इस क्रम में वित्तविहीन विद्यालयों को तीसरे और सीबीएसई/ आईसीएससी से मान्यता प्राप्त विद्यालयों को चौथे स्थान पर रखा गया है.

Related Posts: